येरुशलम पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को अमेरिका ने वीटो किया

एशिया टाइम्स

अमेरिका ने येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के फैसले को खारिज करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को वीटो कर दिया है.

ट्रंप के इस फैसले का ब्रिटेन और फ्रांस सहित सुरक्षा परिषद के अन्य 14 सदस्य भी विरोध कर रहे हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि निकी हेली ने सोमवार को यूएन के इस प्रस्ताव को निरस्त करने के लिए वीटो का इस्तेमाल किया.

अमेरिका ने ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार वीटो का इस्तेमाल किया है. अमेरिका ने आखिरी बार वीटो का इस्तेमाल 2011 में किया था. उस वक्त येरुशलम और उसके क्षेत्रों में इस्राएली बस्तियों के निर्माण की आलोचना करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ वीटो किया गया था

मिस्र द्वारा प्रायोजित इस प्रस्ताव में येरुशलम पर ट्रंप के फैसले पर खेद प्रकट किया गया और अन्य देशों से अपने दूतावास तेल अवीव से येरुशलम नहीं ले जाने का आह्वान किया.

हालांकि, इस प्रस्ताव में अमेरिका और ट्रंप का स्पष्ट तौर पर नाम नहीं लिया गया.

इस प्रस्ताव में अरब-इस्राएल विवाद के द्विराष्ट्र समाधान पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी खत्म करने का आह्वान किया गया.

UN Security Council Votes to Undermine Trump Jerusalem Decision

The world’s major nations all just voted to condemn Trump’s decision on Jerusalem

Posted by NowThis Politics on Monday, 18 December 2017

इस प्रस्ताव को पेश करते हुए संयुक्त राष्ट्र में मिस्र के स्थाई प्रतिनिधि अमर अब्देलातीफ अब्दुलात्ता ने कहा कि अमेरिका का यह फैसला इस्राएल के कब्जे वाले क्षेत्रों की मान्यता के सुरक्षा परिषद की प्रस्तावना का उल्लंघन है.

हेली ने इस प्रस्ताव पर वोटिंग को अपमान बताया. निकी हेली ने कहा, “यह वीटो अमेरिका की संप्रभुता की रक्षा और मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका का बचाव करता है.”

ट्रंप ने अपने दामाद और सलाहकार जेयर्ड कुश्नर को इस्राएल और फिलस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया की मध्यस्थता करने का जिम्मा सौंपा है.

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के स्थाई प्रतिनिधि मैथ्यू रायक्रॉफ्ट ने कहा कि येरुशलम को इस्राएल की राजधानी की मान्यता देने के ट्रंप के फैसले का कोई कानूनी प्रभाव नहीं था और उनका देश इससे असहमत है.

इस्राराएल के स्थाई प्रतिनिधि डैनी डैनन ने कहा कि ट्रंप ने इस तथ्य को मान्यता दी है कि येरुशलम, इस्राएल की राजधानी है जो पिछले 3,000 साल से है.

[आईएएनएस]

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