भारतीय उर्दू पत्रकारिता की ओर से पाकिस्तानी पत्रकारिता के लिए क्या है तोहफा इस रिपोर्ट में देखें

दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित उर्दू एडिटर मीट में प्रोफेसर अख्तरुल वासे का बयान

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नई दिल्ली,30 नवम्बर : दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित उर्दू एडिटर मीट को संबोधित करते हुए यूनिसेफ की ओर से उर्दू पत्रकारिता के लिए तैयार किए गए सिलेबस पर अपनी टिप्पणी व्यक्त करते हुए  प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने आज कहा है कि भारतीय उर्दू पत्रकारिता की ओर से पाकिस्तानी उर्दू पत्रकारिता के लिए यह सिलेबस एक बड़ा तोहफा होगा.

ज्ञात रहे कि दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आज यूनिसेफ के सहयोग से शिखर organization फॉर सोशल डेवलपमेंट द्वारा “उर्दू एडिटर नेशनल मीट आन रूटीन एमुनाईज़ेशन” के टाइटल से एक प्रोग्राम का आयोजित किया गया जिसमें मौलाना आजाद उर्दू यूनिवर्सिटी जोधपुर के वाइस चांसलर प्रोफेसर अख्तरुल वासे, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद के वाइस चांसलर प्रोफेसर असलम परवेज़ समेत कई राज्यों के उर्दू एडिटर और वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी उपस्तिथि दर्ज कराई. इस अवसर पर इस बात पर गंभीर विचार विमर्श किया गया कि किस तरह टीकाकारी की मुहिम को बड़े पैमाने पर कामयाब बनाया जाए.

इस अवसर पर अलग-अलग तरह से लोगों ने अपने अपने सुझाव पेश किए.

 प्रो वासे ने कहा कि अगर हम यह सोचते हैं की सलम में होने वाली बीमारी से आलीशान बिल्डिंगों में रहने वाले लोग बच जाएंगे तो यह हमारी भूल है, क्योंकि बीमारी पहले सलम में दस्तक देती है उसके बाद वह एक बड़ी आबादी को अपनी चपेट में ले लेती है. उन्हों ने अफ़सोस पर्कट करते  हए कहा कि हम धर्म को मानते हैं, लेकिन धर्म की नहीं मानते. उन्होंने कहा कि जिस तरह हमने ऊँट को मुसलमान गाय को हिंदू, सीताफल को हिन्दू खजूर को मुसलमान,हरे रंग को मुसलमान और केसरिया रंग को हिंदू बना दिया है यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

इस अवसर पर प्रोफेसर असलम  परवेज़ ने कहा कि अगर हम सोचते हैं कि हम सड़कों पर कूड़ा फेंक कर बीमारी से बच जाएंगे तो यह सही नहीं है. उन्होंने कहा कि इन्हीं से बीमारियां पैदा होती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जो आबादी बीमार हो और गरीबी से पीड़ित हो उस के भले के लिए भी हम सबको मिलकर काम करना चाहिए.

Etv उर्दू के एडिटर तहसीन मुनव्वर ने अपने तजुर्बात साझा करते हुए कहा कि जब हम तेजपुर के एक गाँव में 2 घंटे बड़ी नाव और आधे घंटे छोटी नाव में तैरने के बाद पहुंचे तो हमें वहां यह पता चला कि यहां शिक्षा  और स्वास्थ्य का कोई केंद्र ही नहीं है न यहाँ सड़क है. उन्होंने कहा कि हमें सिस्टम को ठीक करने के लिए पहले बुनियादी चीज़ों को ठीक करना होगा.

इस अवसर पर लोगों ने कहा कि टीकाकारी के खिलाफ भी काफी बड़े पैमाने पर मुहीम चलायी गयी है और अफवाह फैलाई गई है, जिस पर बाद में क़ाबू पा लिया गया है. यह सच है कि यूनिसेफ द्वारा पिछले कई सालों से टीकाकारी की सफलता के लिए कोशिश हो रही है, इसे कामियाब बनाने के लिए धार्मिक गुरुओं खासतौर से इमाम और मोअज़्ज़िन को भी आगे लाना होगा.

लोगों ने अपने सुझाव में कहा कि MSDP के तहत जिन 90 जिलों को चिन्हित किया गया है, उन से इस प्रोग्राम को जोड़ा जा सकता है. लोकल लोगों को इस से जोड़ा जाये और उनकी परेशानियों को पूछ कर उस को भी दूर करने की कोशिश की जाए तो इस प्रोग्राम को कामियाब बनाया जा सकता है.

इस अवसर पर FM रेडियो, आल इंडिया रेडियो से लेकर तमाम ऐसे संसाधनों का इस्तेमाल करने की अपील की गई जिससे बड़ी आबादी तक पहुंचा जा सकता है.

शिखर के डायरेक्टर डॉक्टर रेहन सूरी ने इस अवसर पर आने वाले तमाम मेहमानों का अभिनंदन करते हुए कहा कि शिखर पहले दिन से समाज में लोगों की तरक्की के लिए काम कर रही है, और इस सिलसिले में उन्होंने शिखर की ओर से की जाने वाली कोशिशों से भी लोगों को अवगत कराया.

प्रोग्राम में यूनिसेफ की जिम्मेदार सोनिया सरकार ने टीकाकारी और स्वास्थ्य को लेकर उर्दू मीडिया की कवरेज पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में जिस तरह उर्दू मीडिया ने टीकाकारी और स्वास्थ्य के मसले को उठाया है उसके लिए हम उनके आभारी हैं.

इस अवसर पर तहसीन मुनव्वर, डॉक्टर मुजफ्फर हुसैन गजाली, सादिक शेरवानी. मोहम्मद यामीन समेत अलग-अलग पत्रकार संगठनों के जिम्मेदारों को भी शिखर की ओर से स्वास्थ्य सेवा में उनके योगदान के लिए सर्टिफिकेट से नवाजा गया.

प्रोग्राम के आखिर में यूनिसेफ की ओर से मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी को एक सिलेबस सौंपा गया. यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एहतेशाम ए खान (डीन स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन) ने इस पर अपनी टिप्पणी व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी कोशिश होगी कि यूनिसेफ के सहयोग से बड़े पैमाने पर इस को किया जाये. उन्हों ने यूनिसेफ का आभार प्रकट करते हुए कहा कि हमें एक बना बनाया सिलेबस मिल गया है. उन्होंने कहा कि हेल्थ बीट के लिए भी पत्रकारों को तैयार करने की कोशिश करेंगे ताकि समाज को सेहतमंद बनाया जा सके. इस मौके पर उन्होंने कहा कि जब तक समाज स्वस्थ नहीं होगा तब तक दुनिया की सारी नेमत बेकार है इसलिए हैदराबाद उर्दू यूनिवर्सिटी इस बात के लिए वचनबद्ध है कि ऐसे पत्रकार तैयार किए जायें जो सेहत के मुद्दे पर अच्छा काम कर सकें.

इस अवसर पर प्रोफेसर वासे ने कहा कि यूनिवर्सिटी इस में डिप्लोमा कोर्स कराए ताकि उर्दू अखबार में काम कर रहे लोगों को इस से जोड़ा जा सके और वह लोग यह डिप्लोमा डिग्री लेकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकें. इस अवसर पर सय्यद फैसल अली, डॉ परदीप हलदार, डॉ फखरुद्दीन, डॉ दानिश,(WHO), मंसूर आगा और सुहैल अंजुम समेत कई लोग मौजूद रहे.

साभार : वतन समाचार डॉट कॉम 


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