कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन की जांच की मांग को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस का समर्थन

Ashraf Ali Bastavi

नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र सचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र जांच का समर्थन किया है। दरअसल, पिछले महीने ही यूएन के मानवाधिकार परिषद के कमिश्नर राद अल हुसैन ने एक रिपोर्ट जारी कर आरोप लगाया था कि भारतीय सुरक्षाबल कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जांच की भी मांग की थी। हालांकि, भारत ने उनकी रिपोर्ट को पूर्वाग्रहों से भरी झूठी कहानी बताकर सिरे से खारिज कर दिया था।
गुटेरेस ने गुरुवार को ह्यूमन राइट्स कमिश्नर की रिपोर्ट का समर्थन करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के किसी भी भाग का हम पूरा समर्थन करते हैं। उन्होंने मानवाधिकार परिषद की कार्रवाई को यूएन की आवाज बताया।

सयुंक्त राष्ट्र में ही किसी ने नहीं किया रिपोर्ट का समर्थन: यूएन में भारत के अम्बेस्डर सैयद अकबरुद्दीन ने एंटोनियों गुटेरेस के बयान पर प्रतिक्रिया में कहा कि ये सच है कि ह्यूमन राइट्स कमिश्नर संयुक्त राष्ट्र का ही प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन उनकी रिपोर्ट को खुद यूएन में किसी ने उनकी रिपोर्ट का पालन नहीं किया, जिससे पता चलता है कि कोई भी उनकी रिपोर्ट को मानने और उसके समर्थन के लिए तैयार नहीं है। तो अब रिपोर्ट का जिक्र एक मरे हुए घोड़े को कोड़े मारने जैसा है।

क्या थी रिपोर्ट? : यूएन के मानवाधिकार उच्चायुक्त जैद राद अल हुसैन की रिपोर्ट जुलाई 2016 से अप्रैल 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रम पर आधारित है। 8 जुलाई 2016 में ही सुरक्षाबलों ने जैश आतंकी बुरहान वानी को एनकाउंटर में मार गिराया था, जिसके बाद घाटी में उग्र प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था। इस दौरान हालात काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को कई बार बल प्रयोग भी करना पड़ा। इस पर हुसैन ने सुरक्षाबलों की आलोचना की थी और कश्मीर में स्वतंत्र जांच की मांग भी की थी।

इसके अलावा रिपोर्ट में पाक अधिकृत कश्मीर में लोगों के राजनीतिक अधिकारों को खत्म करने का आरोप लगाया गया था। साथ ही कहा गया था कि पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी कानून का गलत इस्तेमाल कर सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में बंद करता है।

भारत ने रिपोर्ट को बताया था भ्रामक: पिछले महीने रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद विदेश मंत्रालय ने यूएन की रिपोर्ट को विवादास्पद बताया था। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था- “रिपोर्ट पूर्वाग्रहों से भरी है और इसमें झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश की गई है। इसमें ऐसी जानकारियां दी गई हैं, जो गलत या अपुष्ट हैं। ये रिपोर्ट भारत की संप्रभुता और अखंडता का उल्लंघन करती है। जम्मू-कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है। पाकिस्तान ने गैरकानूनी तरीके से इसके एक हिस्से पर कब्जा कर रखा है।”

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