नफरत के खिलाफ़ हम सब को मज़लूमों का एक जत्था बनाना होगा:   उमर ख़ालिद  

MEHDI HASAN AINI QASMI

Asia Times News Desk

देवबंद: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ’क्या हिंदुस्तान में लोकतंत्र जिंदा है’ के शीर्षक से कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में जेएनयू प्रकरण के बाद चर्चाओं में आए छात्र उमर खालिद ने आरएसएस पर लोकतंत्र समाप्त करने की कोशिशों का आरोप लगाया। कहा कि भाजपा सोचती है कि वह हिटलर की तरह हिंदुस्तान से मुसलमानों का वजूद खत्म कर देगी। लेकिन उसे समझना होगा कि हिंदुस्तान का मुसलमान जर्मनी का यहूदी नहीं है।
गुरुवार की देर शाम ईदगाह रोड स्थित शेखुल हिंद हाल में देवबंद इस्लामिक एकेडमी, एवं अब्नाए मदारिस इस्लामिया(AMI) के बैनर तले आयोजित हुए कार्यक्रम में जेएनयू छात्र एवं यूथ लीडर उमर खालिद ने कहा कि आज देश लोकतंत्र की ६९वीं सालगिरह मना रहा है।
 पर हमें सोचना होगा कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों विशेषकर मुस्लिम व दलितों को जो अधिकार दिए गए थे,वह हमें हासिल हैं या नहीं।
उन्होंने अधिकार पाने के लिए एकजुट होने का आहवान करते हुए कहा कि देश पर काबिज सांप्रदायिक ताकतों को तोडऩे के लिए हमें नाउम्मीदी से निकल कर जन आंदोलन चलाना होगा और अपने वोट की ताकत का सही इस्तेमाल करना होगा।
जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के पूर्व अध्यक्ष मोहित कुमार पांडेय ने कहा कि वर्तमान हालात के लिए केवल भाजपा ही नहीं बलिक कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल भी दोषी हैं। कहा कि गुजरात में बीजेपी जीती नहीं बल्कि कांग्रेस हारी है। क्योंकि कांग्रेस में भी आरएसएस की विचारधारा के लोग मौजूद हैं।
प्रदेश की योगी व केंद्र की मोदी सरकार पर उन्होंने कहा कि सरकारें फूट डालो राज करो की राजनीति पर चल रही है। क्योंकि आरएसएस की सोच वही है जो अंग्रेजों की थी। उन्होंने कहा कि सरकारी शोषण का शिकार हो रहे दलित व मुस्लिमों व पिछड़े समाज के लोगों को एक मंच पर आना ही होगा। ताकि दूसरी बार अंग्रेजी सोच से आजादी पाई जा सके।
यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के संयोजक नदीम खान ने कहा कि आज जिन पॉलिसी पर सरकारे चल रही हैं उनसे वास्वत में देश का लोकतंत्र खतरे में है। हमें पीडि़तों का एक संगठन बनाना होगा और एकजुट होकर देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए मुहिम चलानी होगी। उन्होंने भीम आर्मी अध्यक्ष चंद्रशेखर का जिक्र करते हुए कहा कि जरूरत है कि आज हम उनकी लड़ाई लड़ें। ताकि जुल्म के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाया न जा सके।
कार्यक्रम को डा. आतिफ सुहेल सिद्दीकी, मौलाना नदीमुल वाजदी, मुफ्ती अनवार क़ासमी,
मीरान हैदर,खालिद सैफी, शारिक हुसैन, मोहम्मद शिहाद व अशफाकुल्लाह ने भी सम्बोधित किया और नफरत के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का आहवान किया। अध्यक्षता मौलाना नदीमुलवाजदी व संचालन मौलाना महमूद सिद्दीकी ने किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक मौलाना मेहदी हसन ऐनी कासमी सहित महमूद सिद्दीक़ी, मौलाना आजम कासमी, मौलाना शाहनवाज कासमी आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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