ट्रोल का शिकार ओवैसी की पार्टी

बैरिस्टर असद ओवैसी की पार्टी मजलिस के पास "ट्रोल" नहीं है

एशिया टाइम्स

भारत की जितनी भी राजनीतिक दल है सभी के पास “ट्रोल” है। मग़र बैरिस्टर असद ओवैसी की पार्टी मजलिस के पास “ट्रोल” नहीं है। सभी दलों के पास सुनियोजित “ट्रोल” सिस्टम है जिसका अपना आईटी सेल है और उसी सेल से सबकुछ ऑपरेट होता है। लेकिन, मजलिस के पास ऐसा कुछ भी नहीं है। मजलिस के जितने भी समर्थक है उनमें से थोड़े-बहुत उत्तेजक है जो सेल्फ़-मेड ट्रोल की तरह लगने लगते है। ओवैसी साहब के जितने भी समर्थक है उनमें से बहुत मजलिस के प्राथमिक सदस्य भी नहीं होंगे। मैं भी मजलिस का प्राथमिक सदस्य नहीं हूँ। मग़र असद साहब की हक़गोई का क़ायल हूँ इसलिए असद साहब के डिफेंस में खड़ा रहता हूँ। सभी दलों के पास आईटी सेल के नाम पर गालिबाज़ों की भारी भीड़ है। भाजपा, आप, काँग्रेस, समाजवादी इत्यादि-इत्यादि सभी के पास ट्रोल रूपी गालिबाज़ मौजूद है। लेकिन वह लोग कम बदनाम है इसका कारण है कि उनलोगों के पास एक कंट्रोल सिस्टम है जो कब उत्तेजक होना है और कब नर्म सब कंट्रोल सिस्टम तय करता है। ट्रोल पूरी एक भीड़ के साथ विरोधियों को धर-दबोचती है इसलिए विरोधियों को छटपटाने का भी मौक़ा नहीं मिलता। जब कभी कुछ सेलिब्रिटी टाइप के लोग धरे जाते है तब ही बात बाहर तक निकल पाती है। लेकिन मजलिस के गिनती के कुछ समर्थक जिनको भारतीय राजनीति की बहुत बुनियादी समझ भी नहीं है वह उत्तेजक हो जाते है और सेल्फ़-मेड ट्रोल की तरह लगने लगते है। चूँकि मजलिस के पास कोई आईटी सेल नहीं है इसलिए कोई कंट्रोल सिस्टम भी नहीं है। बस यही कारण है कि मजलिस को चाहने वाले लोग ट्रोल लगने लगते है। इसलिए, मजलिस वाले भाईयों से गुज़ारिश है कि पहले पूरी एक आईटी सेल बनाओ जिसमें कंट्रोल सिस्टम भी हो नहीं तो अपना समय उत्तेजना में खर्च न करके ओवैसी साहब के डिबेट सुनने के साथ-साथ पार्लियामेंट के पुराने डिबेट को सुना कीजिये और कुछ किताबें और स्कॉलरली आर्टिकल भी पढ़ा कीजिये। जरूरी नहीं कि तनक़ीद करने वाले सभी लोग ओवैसी साहब का विरोधी ही है।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
Tariq Anwar Champarni

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