बिहार बाढ़ पीड़ितों का दर्द और उस पर मरहम की कोशिश

बिहार के बाढ़ पीड़ितों की दर्द भरी कहानी  मेरी ज़ुबानी: इमरान

एशिया टाइम्स

सफरनामा: तकरीबन एक साल पहले बिहार में भयानक सैलाब आया था जिसने इस कदर तबाही मचाई थी के उसके असरात आज तक बिहार के उन इलाकों में देखे जा सकते है। वहाँ के लोगों के दिल मे इस तबाही का ख़ौफ़ आज भी जिन्दा है। मैं भी उन लोगों का दर्द जानने के लिए केरल के मशहूर समाज सेवक और समाज सेवा की मिसाल ह्यूमन वेल्फेयर फाउंडेशन के महासचिव आरिफ अली टी के साथ दो दिन के दौरे पर गया। पहले तो वहां जाने को दिल नही था मगर फिर हौंसले के साथ  दौरा शुरू हुआ। कटिहार पुहंचने पर हैरानी हुई कि बिहार में इतना साफ सुथरा रेलवे स्टेशन जबकि मैंने तो यही सुना था के वहां पर गंदगी का ही आलम रहता है।

फिर गाड़ी से अररिया को रवाना हुआ तो रास्ते में इस कदर सन्नाटा पसरा था जैसे ये जगह कई बरसों से आबाद न हो और मुझे हैरानी तो इस बात पर भी हुई कि बाढ़ आये हुए एक साल से ज्यादा हो गया मगर सड़क के किनारों पर अभी भी पानी के सूखने के बाद उन पलों को कुरेदने वाले बड़े बड़े मिट्टी के ढेले आज भी पड़े हुये थे जो बाढ़ के बाद ही बनते हैं।

होटल पुहंचा और फ्रेश हो कर सीधा दो गांव के दौरे पर आरिफ अली साहब के साथ निकला। जैसे ही पहले गाँव पुहंचा हैरानी अपनी इन्तेहाँ पर थी के लोगों के घर आज तक टूटे हुए है और लोग वैसे ही खुले में सोते हैं, खाते है और अपनी जिंदगी कैसे तैसे करते हुए बसर कर रहें हैं। लोगों के घरों के पास आज भी बाढ़ का पानी जमा है जहां पर तरह तरह की बीमारियां पलती हैं।

बाढ़ पीड़ितों के दर्द बाँटने जाती फाउंडेशन की टीम

मैंने वहां बैठी अम्मा से पूछा के अम्मा आप लोग कैसे रहते है यहां और खाने कमाने का ज़रिया क्या है तो वो बोली बिटुआ बस जिंदगी काट रहे हैं पानी आवल रहे और सब बहा के अपणो साथ ले गवल रहे। कुछ धान बो लेवे ओहि से सारा साल थोड़की थोड़की खावल रहे। और बिटुआ सब दिल्ली बम्बे गईल रवे कमाई करे ओहो थोड़ा बहुत कमा के लियावे जिसे गुजारा चले। उनसे बातें कर के आगे निकला तो बहुत सारे बच्चे नंगे बदन खेलते हुये मिले उन्होंने मुझे सफेद कुर्ता पजामा में देख के अपनी पूरी ताकत से सलाम किया शायद उनको लगा कोई नए मौलवी साहब आयें हैं ।

फिर मैंने खुद को कहा चलो बेटा कुछ इनसे भी बातें हो जाएं पर उनसे बातें करके में और कशमकश में मुब्तिला हो गया। मैंने उनसे पूछा बच्चा पार्टी पढ़ते हो तुम लोग तो एक सुर में बोले हाँजी कोई बोलै एक क्लास में को दो क्लास बोला ऐसे सबने जवाब दिया। मगर फिर उनमें से एक बच्चा तपाक से बोला भइया ये जो सामने आप तंबू देख रहें है वहां ज्यादा अच्छी पढ़ाई होती है।

तो मैंने उनसे पूछा ये तंबू में कई होता है तो बोले वो न कोई जमात इसलामिया वाले है जो जो यहां आते हैं और कौनो ह्यूमन फाउंडेशन है ऊ लोग पैसा देते है तो यहां दुई ठू मास्टर आते हैं पढ़ाने जो बहुत अच्छा पढ़ाते है हर बात दिमाग मे घुस जात है।

फिर मैंने कुछ जिम्मेदार लोगों से पूछा तो वो लोगों ने बताया के ये One Teacher School है जो ह्यूमन वेल्फेयर फाउंडेशन वाले चलाते हैं। अच्छा लगा ये सुन कर के इस बियाबान में में भी बच्चे पढ़ने लिखने को ले कर इतने उत्सुक है।

गाँव के बच्चों के पढ़ने का एक मिसाली मरकज़

फिर आगे बढ़ा तो एक एकदम नया हैंडपम्प लगा हुआ मिला तो लोगों से पूछा तो वो नल भी ह्यूमन वेल्फेयर फाउंडेशन के ही लगवाया हुआ मिला। कुछ औरतों ने बताया के इस नल लगने से इतनी आसानी हुई है के क्या बताएं आपको। हम लोग इस गंदे तालाब का पानी पीते थे इसी में कपड़े धुलते थे यही खुले में नहाना पड़ता था मगर भला हो इन केरल के फाउंडेशन वाले लोगों का जिन्होंने यहाँ नल लगवाये। अब हम पानी भी साफ पीतें है और यही बैठ के कपड़े भी धुल लेतें हैं और यहां से पानी भर के घर में जा के पर्दे में नहा भी लेते है।

ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा निर्मित एक नल की तस्वीर

फिर थोड़ा आगे बढ़ा तो देखा दो घर थे वो इस कदर टूटे हुये थे के बाढ़ में अपने तबाह होने की गवाही खुद दे रहे थे। पूछने पर पता चला कि बाढ़ में ये घर पूरी तरह डूब गए थे घर वालों ने दौड़ के रात में 3 बजे स्कूल पुहंच के अपनी जान बचाई थी। बगल में ही एक खूबसूरत सा छोटा सा नया घर बना हुआ था।

मैंने पूछा ये किसका हैं तो बोले हमरा ही है कोई फाउंडेशन वाले हैं जो यहाँ आये थे और ये बनवाये हैं। अल्लाह इनको बहुत खुशयों से नवाज़े ये लोग हम गरीबों की इतनी मदद करते है जिसके लिए तो हम जितना शुक्रिया बोले कम है।

जमात के लोकल लोगों से पूछने पर पता चला कल केरल से कुछ लोग आएंगे और ये घर इन लोगों को दे कर जाएंगे।

ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा निर्मित एक घर की तस्वीर

बहुत ज्यादा अंधेरा होने पर होटल वापसी हुई और अगले दिन की पूरी प्लानिंग की क्यों कि अगले दी हमारे पास सिर्फ 1बजे तक का ही टाइम था और तकरीबन 100 किलोमीटर दूर कटिहार से 4 बजे ट्रैन थी। रात में केरल से आये एक डेलिगेशन से मुलाकात हुई जो केरल के मशहूर बिज़नेसमैन मुहम्मद शाफी के मीनार और हाशिम हददाद थंगल की लीडरशिप में आया था। उन लोगों से बात कर के महसूस हुआ के ये लोग इतने बड़े होने के बाद भी जमीन से जुड़े हुये है और लोगों की खिदमत करना अपना फर्ज समझते हैं।

शाफी साहब ने बताया के केरल भी आज से 40 साल पहले बिहार से  ही बदतर हालात में था मगर फिर वहां के लोगों ने अपने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया खुद भी दुनिया भर के देशों में जी तोड़ मेहनत मजदूरी की तब जा कर केरल के ऐसे हालात बदलें हैं के आज वो लोग पूरे देश मे जा जा के लोगों की मदद कर रहें है । खुद से कोशिश करो एकदम खालिस नतीजा जरूर निकलेगा।

बच्चों के चेहरे की एक मुस्कराहट ही हमारी ख़ुशी के लिए काफी है

दूसरे दिन फिर शुरू हुआ भागमभाग वाला सफर। इस बार हम लोग अकेले नही थे केरल की टीम भी हमारे साथ थी। आज हमारा टास्क था इस कुदरत के मारे गरीबों को जो भी घर या हैंडपंप या फिर कम्यूनिटी लर्निंग सेन्टर ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन और ह्यूमन वैलकेअर पल्लकड़ केरल ने एक साथ मिल के बनाये थे उन्हें इन लोगों के सुपर्द कर दिया जाए ताकि ये लोग उसका इस्तेमाल कर सके।

To be continued………………..

Ansar Imran SR

(लेखक ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन के जनसंपर्क अधिकारी है)

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