जादुई शीशे जैसा सोशल मीडिया

तारिक हुसैन रिज़वी

Asia Times Desk

दिल्ली के बाल भवन के एक कमरे में बच्चों के मनोरंजन के लिए फ्रेम में जड़े कुछ शीशे (आईने) रखे हैं। उस के सामने जा कर आप को हंसी आ जाएगी, क्योंकि उस में आप वैसे नज़र आएंगे, जैसे आप हैं नही। विज्ञान में हम विभिन्न प्रकार के मिरर के बारे में जानकारी हासिल करते हैं जैसे प्लेन, स्फेरिकल इत्यादि। घर पर वही हंसाने का काम टी-स्पून भी करता है, आप स्पून में वैसे नज़र आएंगे जैसे आप हैं नही।

तारिक हुसैन रिज़वी

सोशल मीडिया भी जादुई आईने की तरह वह दिखाता है, जो होता ही नही है। व्हाट्सएप और फेसबुक का स्तेमाल लगता है इंडिया में बना ही झूठ के लिए है। जादुई आईना हंसाता है, जबकि सोशल मीडिया रुलाता है। मुंडका उपनिषद से लिया गया राष्ट्रीय वाक्य सत्य मेव जयते सीख कुछ और देता है, लेकिन ज़ुकरबर्ग का फेस बुक और व्हाट्सएप दर्शाता कुछ और है।

फैलनी ख़बर चाहिए, लेकिन फैलती अफवाहें हैं। दिल्ली लाल कुआं की घटना हो, या मॉब-लिनचिंग की कोई घटना हो, तोड़ मरोड़ कर दी गई झूठी सूचनाओं की ही परिणति होती है। दंगो, हिन्दू-मुस्लिम द्वेष, फ़ोटो-शॉप चित्रों के सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से देश की शांति भंग होती है।

साधारण लोग मानसिक प्रताड़ना के शिकार होते हैं। सोशल मीडिया का सबसे बड़ा फायदा झूठ या सच बोल कर चुनाव में उठाया जाता है, आम चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों ने जमकर सोशल मीडिया का उपयोग कर आमजन को चुनाव के जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

इस आम चुनाव में सोशल मीडिया के उपयोग से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, साथ ही साथ युवाओं में चुनाव के प्रति जागरूकता बढ़ी। सोशल मीडिया के माध्यम से ही ’निर्भया’ को न्याय दिलाने के लिए विशाल संख्या में युवा सड़कों पर आ गए जिससे सरकार दबाव में आकर एक नया एवं ज्यादा प्रभावशाली कानून बनाने पर मजबूर हो गई। सरकार ने सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए 2009 में क़ानून बनाए, शहरों में साइबर थाने शुरू किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने सायबर क्राइम की धारा 66। को इस आशय से निरस्त कर दिया कि इस के लागू होने से लोगो की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आहत हो गी।

सोशल मीडिया पर होने वाली अनैतिक घटनाओं को दृष्टिकोण में रखते हुए सरकार को बनाए गए सायबर नियमों को कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि लोगों की जान ,माल, और मान की हानि ना हो। आपत्तिजनक सूचनाओं के प्रकाशन के लिए धारा 67। का प्रावधान है, उस का यथासंभव उचित उपयोग सरकार को करना चाहिए, ताकि समाज अफवाहों के जंजाल से बचा रहे।

लेखक  तारिक टाइम्स वीकली के संपादक है 

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