टांडा में आधी रात को दरवाजे तोड़कर बूढे़-बुजुर्गों तक को उठा ले गई पुलिस

Ashraf Ali Bastavi

टांडा :  कावरिया विवाद के दौरान पुलिस कप्तान द्वारा कावरियों को नारा देते ‘अमर थोड़ा जयकारा लगवाओ बोलबम…’ कावरियों को उकसाने के प्रकरण पर रिहाई मंच ने कार्रवाई के लिए डीजीपी और मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को भेजा पत्र, पत्र मेल में संलग्न
मंच ने औरैया में साधुओं की हत्या को गोकषी से जोड़ने को साजिष करार देते हुए सांप्रदायिक तनाव के लिए पुलिस प्रषासन और संघ परिवार को जिम्मेदार ठहराया
लखनऊ 18 अगस्त 2018। रिहाई मंच ने टांडा में कावर यात्रा के दौरान डीजे की आवाज को लेकर हुए तनाव के बाद गिरफ्तार लोगों के परिजनों से मुलाकात की। मंच ने औरैया में साधुओं की हत्या को गोकषी से जोड़ने को साजिष करार देते हुए सांप्रदायिक तनाव के लिए पुलिस प्रषासन और संघ परिवार को जिम्मेदार ठहराया। 13 अगस्त की रात टांडा में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद आए पुलिस कप्तान के वीडियो को लेकर जिसमें वे बोलबम का नारा लगवाते हुए दिखाई दे रहे हैं की डीजीपी और मुख्य सचिव से षिकायत के बाद रिहाई मंच ने टांडा का दौरा किया।  इस प्रतिनिधि मंडल में रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, एडवोकेट यावर अब्बास, अबू अषरफ, फारुक, आफाक, नूर आलम, यूएस मोहम्मद और राजीव यादव शामिल थे।
डीजे की तेज आवाज तनाव की मुख्य वजह तो आखिर क्यों नहीं पुलिस ने किया कावरियों पर मुकदमा
पुलिस बताए क्या योगी राज में कावरियों पर मुकदमा न करने का कोई आदेष है- रिहाई मंच
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भी नहीं जागा प्रषासन और डीजे कंपटीषन करवाकर टांडा को सांप्रदायिक तनाव में झोका
टांडा कावरियां विवाद के बाद गिरफ्तार लोगों के परिजनों से रिहाई मंच ने की मुलाकात
पिछली कुछ सांप्रदायिक घटनाएं भी टांडा विवाद की तह में, कराई जाए उच्च स्तरीय जांच
रिहाई मंच ने 13 अगस्त के विवाद के बाद टांडा के हयातगंज का दौरा करते हुए गिरफ्तार लोगों के परिजनों से मुलाकात की, इस मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियां हुई हैं। चैराहे पर स्थित आजाद टेलर की दुकान में जहां ताला बंद था तो वहीं इस विवाद के दौरान फैयाज की लूटी गई पान की दुकान पर कोई नहीं मिला। फैयाज की दुकान की पीछे ही उनके भतीजे के किराने की दुकान पर मुलाकात की गई। अकबर अली बताते हैं कि उस रात उनकी दुकान के पास ही वाकया जब हो रहा था तो उनके भाई अबरार वहां से तुरंत चले गए थे। बाद में जब मालूम चला कि दुकानें लूटी जा रही हैं तो वे दुकान देखने के लिए आए तो पुलिस ने उन्हें उठा लिया। वे कहते हैं कि इस मोड़ पर उनकी किराना की दुकान है वो मार-झगड़ा क्यों करेंगे। उनके चाचा फैयाज की पान की दुकान लूटने की खबर के बाद अबरार को लगा कि कहीं उनकी दुकान भी तो नहीं लूट ली गई, तभी वो आए।
घर के दो-दो दरवाजे तोड़कर उस दिन पुलिस शकील और जमील को उठा ले गई। यह पूछने पर कि कैसे उठाया। ‘हम दरवाजा बनवा लेंगे आप लोग जाइए’ ये कहते हुए 75 वर्षीय तसरीफुन निषा अपने घर से जाने को कहती हैं। प्रतिनिधि मंडल जब कहता है कि वो पुलिस नहीं है तो उन्हें थोड़ा राहत मिलती है। उन्हें लगता है कि कहीं फिर कुछ न हो जाए। यही डर मोहल्ले के लोगों को भी है। इससे डर-दहषत का अंदाजा लगाया जा सकता है। शायदा बताती हैं कि उनके भाई शकील और जमील को उस दिन पुलिस घर का दरवाजा तोड़कर उठा ले गई। घर का पहले दरवाजे की मरम्मत करवा ली है पर अन्दर का दरवाजा अब भी उसी हालत में पड़ा है।
ताजिमुन निषा बताती हैं कि उस रात डीजे की तेज आवाज से वे लोग परेषान थे और घबराहट के मारे चक्कर आकर वो लेट गईं। उन्हें नहीं मालूम था कि देर रात उनका दरवाजा तोड़ने पुलिस आ जाएगी। ताजिमुन बताती हैं कि रात दो बजे के करीब पुलिस वाले दरवाजा पीटने लगे और कुंडे से मारकर तोड़ने लगे। वे शीबू का नाम ले रहे थे। डरते हुए दरवाजा खोला तो पुलिस-पीएसी वाले घर में घुस गए। हम लोग कह रहे थे कि घर में महिलाएं है पर उन्होंने एक न सुनी। मेरे पति मुन्नू मास्टर और बेटे अरषद को पूछताछ के नाम पर उठा ले गई। छापेमारी के दौरान महिला पुलिस नहीं थी। इस बीच लड़की की तबीयत खराब हो गई थी। हम लोग डर के मारे कांप रहे थे।
पूर्व सभासद डा0 उमालिया बताती हैं कि उस रात दो बजे के करीब पुलिस दरवाजा पीटने लगी और मेरे शौहर जमाल कामिल का नाम लेकर चिल्ला रही थी। हमारे घर में चार परिवार हैं और बहुत सी महिलाएं हैं। हमने कहा कि वो नहीं हैं। जमाल कामिल मौजूदा सभासद भी हैं। पुलिस घर में घुसकर दोनों देवरों जमाल अख्तर और जमाल अजमल को उठा ले गई। वे बताती हैं कि चार तल्ले के मकान में घुसकर तलाषी की और उनके देवर जमाल अजमल को बंडी-लुंगी में ही उठा ले गई। कहा कि बस पूछताछ के बाद छोड़ देंगे पर उनको जेल भेज दिया। मैंने वारंट के बारे में पूछा तो वे कुछ नहीं बताए। उन्होंने बताया कि हमने जेल में मुलाकात की है।
एक मकान की सकरी सी गली में पिछले हिस्से में अपनी छोटी सी बेटी के साथ बैठी अफसाना बताती है कि उस रात भाभी और अब्बू ही घर पर थे। वसीम का नाम लेकर पुलिस दरवाजा पीटने लगी ऐसा लगा कि दरवाजा तोड़ न दें तो दरवाजा खोल दिया गया। पुलिस मेरे बूढ़े अब्बू को उठाकर ले गई। उनको तरस भी नहीं आया कि इतना बुजुर्ग आदमी क्या कोई बवाल करेगा। घर के हालात का जिक्र करते हुए कहती हैं कि अब बहुत मुष्किल हो गई है। लगातार डर बना रहता है और उस रात का मंजर आखों के सामने छाया रहता है।
मोहल्ले के 74 वर्षीय बुजुर्ग मोहम्मद इसराइल कहते हैं कि कावरियों का रास्ता पष्चिम से पूरब की तरफ था पर उन लोगों ने उत्तर और दक्षिण की दिषा में डीजे लगाकर कंपटीषन शुरु कर दिया जो विवाद की वजह बना। वे पूछते हैं कि आखिर पुलिस कहां थी। पुलिस का काम बेगुनाहों को उठाने का है या फिर तनाव न पैदा होने देने का है। मैं यह बात एसपी-डीएम सभी के सामने कहने को तैयार हूं।
प्रतिनिधि मंडल को स्थानीय लोगों ने बताया कि टांडा पिछले कई सालों से लगातार सांप्रदायिक तत्वों के निषाने पर बना हुआ है। खासतौर पर 2013 में राम बाबू हत्याकांड के बाद लगातार हिंदू युवा वाहिनी जैसे संगठनों की गतिविधियों का केन्द्र बना हुआ है। रामबाबू की पत्नी मौजूदा भाजपा विधायक संजू देवी ऐसी घटनाओं में सक्रिय रहती हैं। इस मामले में उठाए गए दानिष इरफान को पहले भी भाजपा विधायक संजू देवी के पति की हत्या के बाद हुई एक हत्या के मामले में उठाकर जेल भेजा गया था। यह पूरा मामूला राजनीतिक है। वरना जो कावर यात्रा यहां से निकली उसपर कोई विवाद नहीं हुआ तो आखिर में उसकी समाप्ति पर हुआ विवाद साफ तौर पर साजिष की ओर इषारा करता है। डीजे का कंपटीषन पूर्वनियोजित सांप्रदायिक साजिष का हिस्सा थी और यही तनाव की मुख्य वजह बना। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए जिससे भविष्य में सांप्रदायिक तत्व इस तरह की घटनाएं अंजाम न दे पांए।
गौरतलब है कि इस मामले में धर्मेंन्द्र त्रिपाठी द्वारा कावरियां पक्ष से एक एफआईआर में 21 लोगों को नामजद और 50-60 अज्ञात के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। वहीं दूसरी तरफ डीजे की तेज आवाज या उसके बाद हुई लूटपाट के संदर्भ में कोई एफआईआर नहीं दर्ज किया गया है। जबकि पुलिस ने अपने बयानों में यह साफ किया है कि एक लड़की की तबीयत खराब थी जहां पर तेज आवाज के चलते यह तनाव हुआ है और डीआईजी का भी यही बयान है। तो आखिर में पुलिस ने खुद इसकी एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की। जब दो पक्षों में तनाव हुआ है तो एक पर ही एफआईआर क्यों। अगर दूसरा पक्ष एफआईआर नहीं करता है तो यह जिम्मेदारी पुलिस की बनती है। क्योंकि उसे शांति पूर्वक कावर यात्रा निकालवाने का निर्देष है। पिछले दिनों कावरियों द्वारा शांति व्यवस्था बाधित करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अगर कोई नया आदेष है कि कावरियों पर एफआईआर नहीं होगा तो पुलिस को उसे सार्वजनिक करना चाहिए। पीड़ितों की ओर से एफआईआर न होने के संदर्भ में पूछा गया तो डर व दहषत मुख्य वजह लगी। लोगों का प्रषासन पर यकीन नहीं है। उनका कहना है कि जूलूस के साथ पुलिस का होना जरुरी है और अगर कोई तनाव बन रहा है तो पुलिस उसके लिए जिम्मेदार है। पुलिस ने तनाव रोकने का प्रयास नहीं किया उल्टे आधी रात घरों में घुसकर बूढ़े-बुजुर्गों तक को उठा ले गई। उससे इंसाफ की क्या उम्मीद की जाए।
एफआईआर में धर्मेंन्द्र त्रिपाठी ने कहा है कि 13-14 अगस्त 2018 की रात लगभग सवा 11 बजे विश्व हिन्दू परिषद कावरिया संघ मेन मार्केट बसखारी के साथ अपने गांव स्थित षिव मंदिर पर जल चढ़ाने जा रहे थे कि मोहल्ला हयातगंज निकट जनाना अस्पताल लगभग 60-70 लोग गोलबंद होकर दंगा कराने की नियत से उनके साथ चल रही कावरिया मंडली व डीजे पर अचानक हमला कर दिया तथा डीजे में तोड़-फोड़ करते हुए मषीन लूट ली। एफआईआर में हयाजगंत के 21 लोग नामजद है। जमाल, राजू मेंबर, आजाद टेलर, आजाद टेलर का लड़का महताब, अबरार फैयाज, पान वाला, सलमान, मोहम्मद अरषद उर्फ शीनू, मोहम्मद शहबान, मोहम्मद अरमान, मोहम्मद महफूज फ्रेंड टेलर, मोहम्मद रब्बी फिरोज शैफी गारमेंट, दानिष, सद्दाम उर्फ नाटे, जाहिद मेंबर, वसीम, महफूज, जुबैर, रईस अषरफी, कल्लू दादा और उनका लड़के के ऊपर नामजद और 50-60 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव को भेजे पत्र में रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा है कि  सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला है कि कस्बा टांडा थाना टांडा जिला अंबेडकर नगर में कावरियां यात्रा में डीजे की तेज आवाज को लेकर दिनांक 13 अगस्त 2018 की रात में लगभग 11 बजे विवाद हुआ। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। उस वीडियो में संतोष कुमार मिश्रा पुलिस अधीक्षक अंबेडकर नगर द्वारा कावरियों को नारा देते हुए उसका तेज आवाज में ‘अमर थोड़ा जयकारा लगवाओ बोलबम…’ लगाने के लिए कावरियों को उकसाते हुए देखा जा सकता है। यह कृत्य उनके कर्तव्यों के निर्वहन से हटकर है। समाज के अलग-अलग संप्रदायों में पारस्परिक विद्वेष फैलाने और शांति व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न करने का अपराध है। यह कृत्य स्पष्ट करता है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने तथा मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के खिलाफ झूठे मुकदमें कायम करने में भी पुलिस की भूमिका रही है। उन्होंने मांग की कि उक्त मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर संतोष कुमार मिश्रा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई की जाए। पत्र के साथ वीडियो भी भेजा है।

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