पहले वह छोड़कर पटना भागा और फिर कानपुर. फिर कुछ दिनों बाद साल 2004 में उनके पास एक चिट्ठी आई. चिट्ठी में लिखा था- तलाक़, तलाक़, तलाक़.

Ashraf Ali Bastavi

लगता है लाख ठोकर खाने के बाद भी मुस्लिम संगठन होश के नाख़ून लेने को तय्यार नहीं हैं, और उन महिलओं की उन को कोई चिंता नहीं है जिन को तलाक़ दे दिया गया है या जिन को मर्दों ने दूसरी शादी कर के पहली बीवी को अलग थलग कर दिया है या तलाक़ दे दिया है.

तीन तलाक़ के बाद भारत में मुसलमान मर्दों के लिए एक से ज़्यादा बीवियां रखना भी असंवैधानिक हो सकता है. बी बी सी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार अगर ऐसा होगा तो इसकी एक बड़ी वजह होंगी 39 साल की समीना बेगम.

उत्तर प्रदेश के संभल की समीना तीन तलाक़ का दर्द भी जानती हैं और अपने ही पति की दूसरी पत्नी को देखने का दर्द भी. वह एक बोसीदा ईमारत में रहती हैं. छोटे से कमरे वाले फ़्लैट की दीवारों को देखकर ऐसा लगता है जैसे उन पर उनके संघर्ष की हज़ारों कहानियां लिखीं हों.

भरी दुपहरी में एक बिस्तर पर उनके दो बेटे सिर तक चादर ताने सो रहे हैं.

एक बिस्तर पर समीना बैठी हैं और नीचे उनका छोटा बेटा दो चूजों के साथ खेल रहा है. वह कभी चूजों को पानी पिलाता और कभी उन्हें उठाकर अपनी हथेली पर रख लेता है.

बच्चा, मुस्लिम

जुकाम और खांसी से परेशान समीना खरखराती आवाज़ में बताती हैं, “पहले शौहर ने बस एक चिट्ठी भेजकर रिश्ता तोड़ लिया जिसमें तीन बार तलाक़ लिखा हुआ था और दूसरे ने फ़ोन पर तलाक़ दे दिया.”

17 साल की उम्र में समीना की अपने पहले पति से मुलाक़ात दिल्ली में हुई थी.

मेरी कविता ने मोहा मन 

उन्हें शेरो-शायरी का बहुत शौक़ था. एक मुशायरे में शामिल होने यहां आई थीं. वह कहती हैं, “उधर मैं मंच पर बैठी शेर पढ़ रही थी और इधर दर्शकों में बैठे एक शख़्स ने मुझसे शादी करने का मन बना लिया.” मुशायरा ख़त्म होने के बाद उस शख़्स ने समीना के सामने आकर उनकी ख़ूब तारीफ़ की. तारीफ़ के बदले समीना ने उनका शुक्रिया अदा कर दिया.

जान-पहचान और दोस्ती के बाद उसने समीना के अब्बा से उनका हाथ मांगा. उसने कहा कि वो उनसे बेपनाह मोहब्बत करता है और अगर समीना से उसका निकाह नहीं हुआ तो वो जान दे देगा.

महिला, मुस्लिम, बहुविवाह
शादी से पहले की समीना की तस्वीर

काफी सोचने-समझने और सलाह-मशविरों के बाद समीना का परिवार राज़ी हुआ और साल 1999 में दोनों का निकाह करा दिया गया.

शादी के दूसरे दिन से ही उत्पीड़न शुरू

इस बार समीना शायरा नहीं बल्कि दुल्हन बनकर दिल्ली आईं. उन्होंने कहा, “मुझे इससे प्यार तो नहीं था लेकिन मैं ये सोचकर ख़ुश ज़रूर थी कि कोई मुझे इतना चाहता है. मुझे लगा था अब ज़िंदगी सुकून से कटेगी.”

उम्मीद के उलट शादी के दूसरे दिन से ही उनकी ज़िंदगी का सुकून छिन गया. वादे के उलट उनके पति ने उनसे पर्दे में रहने और शेरो-शायरी बंद करने का आदेश दिया. 17-18 साल की समीना को जैसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. शादी के कुछ महीने बाद वो प्रेग्नेंट हो गईं और एक बच्चे के जन्म के कुछ महीने के बाद ही दोबारा प्रेग्नेंट.

इसके साथ ही शुरू हो गई रोज की मारपीट और गाली-गलौज… “उसे मुझसे प्यार नहीं था. बस कुछ पलों के जुनून के लिए उसने मुझसे शादी की थी.

पहले वह छोड़कर पटना भागा और फिर कानपुर. फिर कुछ दिनों बाद साल 2004 में उनके पास एक चिट्ठी आई. चिट्ठी में लिखा था- तलाक़, तलाक़, तलाक़.

तलाक़ के बाद समीना अपने दोनों बच्चों को अकेले ही पालती रहीं. दिन-रात रोने और ख़ुदकुशी के ख़यालों के बीच ज़िंदगी कटती रही. पांच साल के साथ के बाद उन्होंने आठ साल का वक़्त अकेले गुज़ारा.

दूसरी शादी में भी धोखा

साल 2012 में समीना की ज़िंदगी में एक और शख़्स आया. उसने समीना को बताया कि उसकी बीवी उसे धोखा देकर भाग गई है और वह अकेले अपने तीन बच्चों को पाल रहा है.

समीना को लगा कि वह उनका दर्द समझेगा… लेकिन इस बार भी उन्हें धोखा ही मिला.

उन्होंने बताया, “शादी के बाद मुझे पता चला कि उसकी बीवी कहीं नहीं भागी है और वह उसके यूपी वाले घर में रहती है. मैं जिसे अपना शौहर समझ रही थी, उसकी पहले से एक बीवी थी, यह जानकर मुझे बहुत बुरा लगा. इस बीच मेरा उससे एक बेटा भी हो चुका था.”

मुस्लिम, महिला
दूसरी शादी के बाद समीना

गुस्से और दुख से भरी समीना ने जब उससे जवाब मांगा तो उसने क़ुरान और शरिया का हवाला दिया. उसने कहा कि एक मर्द चार बीवियां रख सकता है. इसके बाद फिर लड़ाई-झगड़े बढ़ने लगे और उसने फ़ोन करके समीना को तलाक़ दे दिया.

‘अय्याशी’

इसके बाद ही उन्होंने तीन तलाक़, हलाला और बहुविवाह को उखाड़ फेंकने की क़मस खाई. वह ग़ुस्से से कहती हैं, “ये मर्द इस्लाम का चोला पहनकर अय्याशी करते हैं, और कुछ नहीं.”

तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ लड़ाई में जिन औरतों ने आगे बढ़कर मोर्चा थामा, उनमें से एक समीना बेगम भी थीं.

इस जीत के बाद अब समीना ने बहुविवाह, हलाला, निकाह मुता और निकाह मिस्यार के ख़िलाफ़ लड़ाई ठानी है. सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी.

क्या वाक़ई इस्लाम में चार बीवियां रखने की इजाज़त है?

इस सवाल पर इस्लाम के जानकार प्रोफ़ेसर ताहिर महमूद हंसते हुए कहते हैं, “अगर आज मोहम्मद साहब होते तो जो मुसलमान मर्दों का रवैया देखते हुए उन्हें एक भी बीवी रखने की इजाज़त न देते!”

प्रोफ़ेसर ताहिर के मुताबिक, “जब चार शादियों की बात कही गई उस वक़्त हालात आज से बहुत अलग थे. कबीलों में युद्ध होते रहते थे और पुरुष मरते रहते थे. इसलिए विधवा और बेसहारा औरतों को संरक्षण देने के मक़सद से चार शादियों की बात कही गई.”

ताहिर महमूद के मुताबिक उस वक़्त के लिए लिखी गई बातों को आज आंख मूंद कर लागू करना बुद्धिमानी नहीं है. उन्होंने कहा, “लोग कुरान में चार शादियों की बात तो पढ़ लेते हैं मगर ये नहीं पढ़ते कि उसमें ये भी लिखा है कि अगर आप चारों औरतों को एक जैसा प्यार और सहूलियत नहीं दे पा रहे हैं तो यह हराम है.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *