पश्चिमी दुनिया के प्रायश्चित का यह तरीका बहुत पुराना है

अशरफ अली बस्तवी

Ashraf Ali Bastavi

आखिरकार ‘मरवान’ उनके हाथ लग ही गया.  हमने 27 फरवरी को अपने एक आर्टिकल में यह ज़िक्र किया था ,

“ पश्चिमी दुनिया जब यह देखती है की हमारा ज़ुल्म कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है और इन्साफ पसंद लोग आवाज़ तेज़ कर रहे हैं तो तो अचानक उनकी इंसानी हमदर्दी जाग उठती है , और उनको कोई आयलन कुर्दी  हाथ लग जाता है .

जिसकी हफ़्तों दर्द भरी दास्तानें सुन सुना कर बड़ी चालाकी से  हजारों बच्चों की मौत को भुला देते हैं . जंग से तबाह  लोगों को मदद पहुंचाने पर  रिपोर्ट्स की भरमार हो जाती है , घडियाली आंसू बहाने की होड़ लग जाती है , यहाँ भी की किसी आयलनकुर्दी का इंतज़ार कीजिये “.

आखिर कार 25 फरवरी को सीरिया में भयानक बमबारी से  500 से अधिल लोगों को मौत की  नीद सुलाने और हजारों लोगों को बेघर कर देने के बाद .

अपने गुनाहों को धोने का वेस्ट वर्ल्ड ने रास्ता निकल ही लिया . उनके हाथ एक 4 साल का मरवान हाथ लग गया है .यह बच्चा अपने मरचुके माँ बाप के कपड़ों के साथ कूच करते हुए jordon के रेगिस्तान में मानवाधिकार वालंटियर्स को मिला है .

याद कीजये  इस से पहले सितम्बर 2015 में आयलान कुर्दी , जून  2017 में ओम्रान और अब मार्च 2018 में मरवान को तलाश कर लिया गया है , यह सिलसिला अभी जारी  रहे हगा .

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