भीमा-कोरेगांव मामला: असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है- सुप्रीम कोर्ट

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पांच लोगों की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी और सभी को हॉउस कस्टडी में रखने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया।

Awais Ahmad

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में महाराष्ट्र पुलिस के ज़रिए देश के कई राज्यों में छापे मारकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि कस्टडी में लिए गए लोग हॉउस कस्टडी यानी नजरबंद रखे जाएंगे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जस्टिस चंद्रचूण ने टिपण्णी करते हुए कहा कि असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है, अगर आप इन सेफ्टी वॉल्व को नहीं रहने देंगे तो प्रेशर कुकर फट जाएगा।

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में हुई गिरफ्तारियों के खिलाफ इतिहासकार रोमिला थापर, देवकी जैन, अर्थशास्‍त्री प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और मजा दारूवाला ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्ज़ी लगाई थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पांच लोगों की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया।

सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तार सुधा भारद्वाज ने अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ते हुए भारत में वकालत करने को अपने पेशे के तौर पर चुना, वह दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाती भी हैं। उनका एफआईआर में नाम नहीं है।

सिंघवी ने कहा कि हमें नहीं पता कि ये लोग इस महान सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा हैं। इनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। इन्हें इनके घरों से अरेस्ट किया गया है। इसका असहमति जताने की आजादी पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

राजीव धवन ने डर जताते हुए कहा कि इनके बाद अब उनकी बारी है। इन लोगों ने हमारे साथ काम किया है।

एडिशनल सॉलिसिटर जनलर तुषार मेहता ने कहा कि कोई आरोपी यहां नहीं है। कोई थर्ड पार्टी उनके लिए राहत की मांग नही कर सकती। अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गिरफ्तारी पर रोक की मांग का विरोध करते हुए कहा, ‘उन्हें अच्छा नागरिक तो होना ही चाहिए। ये गिरफ्तारियां बिना सोचे-समझे नहीं की गईं।’ उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों का मामला हाई कोर्ट देख रहा है, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को इससे किनारे रहना चाहिए।

जिस पर सिंघवी ने कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा सुनिश्चित जीने के अधिकार और आजादी के अधिकार से जुड़ा है। लिहाजा इन गिरफ्तारीयों पर रोक लगाई जाए।

वामपंथी विचारकों के पक्ष में सीनियर वकीलों राजू रामचंद्रन, राजीव धवन, इंदिरा जयसिंह और लॉयर प्रशांत भूषण ने दलीलें पेश कीं।

गौरतलब है कि भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में देश के कई हिस्सों में मंगलवार को पुणे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने महाराष्ट्र, गोवा, तेलंगाना, दिल्ली और झारखंड में की गई. पुणे पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की। इस मामले में समाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरिया और वरनोन गोंजालवेस गिरफ्तार किए गए थे।

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