बाबरी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा

Awais Ahmad

सुप्रीमकोर्ट ने अयोध्या विवाद सुलह के लिए मध्यस्थता को भेजा, मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एफ़एम इब्राहिम कलीफुल्ला होंगे और आर्ट आफलिविंग के श्री श्री रविशंकर व वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू सदस्य होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल को 4 सप्ताह मे प्रगति रिपोर्ट कोर्ट मे देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता तुरंत शुरू हो उसे शुरू होने मे एक सप्ताह से ज़्यादा वक़्त न लगे। मध्यस्थता पीठ फ़ैज़ाबाद मे बैठेगी राज्य सरकार मध्यस्थता पीठ को सुविधाएँ देगा।

अयोध्या मामले में मध्यस्थता को लेकर मीडिया रेपोर्टिंग पर फिलहाल पाबंदी नहीं लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि हम चाहते हैं कि मेडिएशन को लेकर रेपोर्टिंग नहीं हो, लेकिन हम ऐसा आदेश नहीं पास कर रहे। मेडीएटर्स को अधिकार होगा कि वो चाहें तो मीडिया रेपोर्टिंग पर पाबंदी लगा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अयोध्या मामले की मध्यस्थता कमेटी ज़रूरत के मुताबिक पैनल में और सदस्यों को शामिल कर सकते है। अयोध्या मामले की मध्यस्थता के लिए नियुक्त पैनल के तीनों सदस्यों को कोर्ट ने अधिकार दिया है।

जाने मध्यस्थता पैनल में बारे में 

1- जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्‍ला

जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्‍ला का जन्म कराईकुड़ी, तमिलनाडु में सन् 23 जुलाई 1951 को हुआ था. 2011 में राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने हाईकोर्ट के जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का कार्यवाहक चीफ जस्टिस नियुक्त किया है।

इससे पहले जस्टिस इब्राहिम मद्रास हाईकोर्ट में स्थायी जज थे. 24 फरवरी 2011 को उन्होंने जेएंडके हाईकोर्ट के जज के तौर पर शपथ ग्रहण की थी। 2012 में चीफ जस्टिस एफएम इब्राहिम खलीफुल्ला को पदोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस बना दिया गया।जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्ला अयोध्या भूमि विवाद के लिए बनाए गए पैनल की अध्यक्षता करेंगे

2- श्रीश्री रविशंकर

श्रीश्री रविशंकर का जन्म भारत के तमिलनाडु राज्य में 13 मई 1956 को हुआ था। उनके पिता का नाम व वेंकट रत्नम् था जो भाषाकोविद् थे और उनकी माता श्रीमती विशालाक्षी एक सुशील महिला थीं। आदि शंकराचार्य से प्रेरणा लेते हुए उनके पिता ने उनका नाम रखा ‘रविशंकर’ था। रविशंकर शुरू से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। मात्र चार साल की उम्र में वे श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ कर लेते थे। बचपन में ही उन्होंने ध्यान करना शुरू कर दिया था।

1982 में श्रीश्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउण्डेशन की स्थापना की थी। 1997 में ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फार ह्यूमन वैल्यू’ की स्थापना की। जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उन मूल्यों को फैलाना है जो लोगों को आपस में जोड़ती है। श्रीश्री रवि शंकर विश्व स्तर पर एक आध्यात्मिक नेता एवं मानवतावादी धर्मगुरु के रूप में जाने जाते हैं।  उनके भक्त उन्हें आदर से प्राय: “श्री श्री” के नाम से पुकारते हैं। श्री श्री रविशंकर पहले भी कई बार अयोध्या विवाद में बात चीत से मामले का हल निकालने का प्रयास कर चुके है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू

श्रीराम पंचू सीनियर वकील और मध्यस्थ हैं। वह द मेडिएशन चेम्बर्स के संस्थापक हैं। जो मध्यस्थता में सेवाएं प्रदान करता है।  वह भारतीय मध्यस्थों संघ के अध्यक्ष और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता संस्थान (IMI) के बोर्ड में निदेशक हैं। उन्होंने 2005 में भारत का पहला कोर्ट एनेक्स मध्यस्थता केंद्र स्थापित किया था और मध्यस्थता को भारत की कानूनी प्रणाली का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें “प्रतिष्ठित मध्यस्थ”, “प्रख्यात प्रशिक्षक” और “देश में अग्रणी मध्यस्थों” में से एक के रूप में संदर्भित किया है।

श्रीराम पंचू ने भारत के विभिन्न हिस्से वाणिज्यिक, कॉर्पोरेट और अनुबंध संबंधी विवादों की श्रेणी में जटिल और उच्च-मूल्य विवादों की मध्यस्थता की है। इनमें कंस्ट्रक्शन और प्रॉपर्टी डेवलपमेंट, इनसॉल्वेंसी एंड वाइंडिंग, प्रॉपर्टी विवाद, फैमिली बिजनेस संघर्ष, बौद्धिक संपदा और सूचना प्रौद्योगिकी विवाद शामिल हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों की भी मध्यस्थता की है।

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