राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए संसद बनाए कानून – सुप्रीम कोर्ट

अब समय आ गया है कि संसद अपराधियों को राजनीति में घुसने से रोकने का कानून बनाए। देश ऐसे कानून जा इंतज़ार कर रहा है। हमें उम्मीद है कि संसद ऐसा कानून बनाएगी।

Awais Ahmad

दागी एमपी एलएलए को चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए संसद से राजनीति में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को रोकने के लिए कानून बनाने के लिए कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने संसद से कहा कि वो राजनीति में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को रोकने के लिए कानून लाये। संविधान पीठ ने अहम फैसले में कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में राजनीति का अपराधीकरण तेज़ी से बढ़ा है, राजनीति में धनबल का प्रभाव बढ़ा है ,ऐसे में देश ऐसे कानून का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जो आपराधिक अतीत वाले लोगों की एंट्री रोक सके।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि लोकतंत्र में वोटर को सब कुछ जानने का हक है। उसे बहरे या गूंगे की तरह नहीं रखा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी अपनी वेबसाइट पर डालें। पार्टी और उम्मीदवार कम से कम तीन बार स्थानीय स्तर पर सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले अखबारों में आपराधिक रिकॉर्ड का ब्यौरा छपवाए।

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस मांग को ठुकरा दिया जिसमे पांच साल से ज़्यादा की सज़ा वाली धारा में आरोप तय होते ही चुनाव लड़ने पर पाबंदी की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो अपनी ओर से चुनाव लड़ने की कोई नहीं अयोग्यता नहीं जोड़ सकता।ये विधायिका का काम है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए 

1. हर उम्मीदवार को नामांकन भरते वक्त चुनाव आयोग की ओर से दिए गए फॉर्म में पूरी जानकारी देनी होगी।

2. अगर कोई आपराधिक मुकदमा लंबित है, तो उसे बोल्ड अक्षर में उसकी जानकारी देनी होगी।

3. अगर कोई उम्मीदवार किसी राजनैतिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहा है, उसे अपनी पार्टी को इसकी जानकारी देनी होगी।

4. राजनीतिक पार्टी, अपने उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी वेबसाइट पर डालनी होगी।

5. उम्मीदवार/ पार्टी दोनों ही बड़े प्रसारण वाले अखबार में और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आपराधिक मुकदमे के बारे में विज्ञापन देगा। कोर्ट ने साफ किया कि नामांकन पत्र भरने के बाद कम से कम तीन बार ऐसा विज्ञापन देना ज़रूरी होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग सदन में बैठकर कानून बनाते हैं, खुद उनपर गंभीर अपराध का आरोप नहीं होना चाहिए। अब समय आ गया है कि संसद अपराधियों को राजनीति में घुसने से रोकने का कानून बनाए। देश ऐसे कानून जा इंतज़ार कर रहा है। हमें उम्मीद है कि संसद ऐसा कानून बनाएगी।

 

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