जिनके पास आधार उनको रैन बसेरे में रुकने की इजाज़त नहीं ??

आधार कार्ड नहीं रखने वाले ऐसे बेघर लोग भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार के लिये अस्तित्व में ही नहीं है और उन्हें इन बसेरों में जगह नहीं मिलेगी?

Awais Ahmad

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार कार्ड के मसले पर केंद्र और राज्‍य सरकारों को घेरा. कोर्ट ने पूछा कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है क्‍या वे सरकार के लिए अस्तित्‍व नहीं रखते. जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्‍यक्षता वाली बैंच ने यह टिप्‍पणी की. बैंच को बताया गया था कि रैन बसेरों में प्रवेश के लिए आधार कार्ड मांगा गया है. कोर्ट में उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि रैन बसेरों में रात गुजारने के लिए लोगों को पहचान पत्र तो रखना होगा और और सामान्‍य तौर पर उन्‍हें आधार कार्ड दिखाने को कहा जाता है.

इस पर कोर्ट ने मुख्‍य सचिव और एडिशिनल सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, ‘उनका क्‍या जिनके पास आधार नहीं, क्‍या वे भारत सरकार के लिए मायने नहीं रखते.’ तुषार मेहता ने सफाई दी कि वह यूआईएडीआई की ओर से पेश नहीं हुए हैं. वे इस मामले में कुछ राज्‍य सरकारों की ओर से पेश हुए हैं इसलिए आधार पर नहीं बोल सकते. इस पर बैंच ने मुख्‍य सचिव से सवाल किया कि क्‍या उन्‍हें पता है अभी तक आधार के लिए कितने एनरॉलमेंट हुए हैं.

कोर्ट में उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि रैन बसेरों में रात गुजारने के लिए लोगों को पहचान पत्र तो रखना होगा और और सामान्‍य तौर पर उन्‍हें आधार कार्ड दिखाने को कहा जाता है.

प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र सरकार के दावे के अनुसार 90 करोड़ से ज्‍यादा लोग आधार कार्ड बना चुके हैं. इस पर बैंच ने पूछा, ‘तो ये लोग (रैन बसेरे में रहने वाले) बिना पते के आधार कैसे बनवा पाएंगे. अभी सर्दियां हैं, सोचिए किसी को घर से निकाल दिया जाए. क्‍या आप आधार के लिए जोर डालेंगे.’ मुख्‍य सचिव ने जवाब दिया कि आधार एक सबूत है लेकिन कोई ना कोई सबूत तो मांगा जाएगा. यह जवाब भी बैंच को ठीक नहीं लगा और उसने पूछा कि क्‍या राज्‍य बेघर आदमी को रैन बसेरे की सुविधा देने से इनकार कर देगा.नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को याचिकाकर्ता ओर अन्‍य राज्‍य सरकारों से बात कर व्‍यावहारिक स्थिति और बेहतर सुविधा प्रदान करनी चाहिए.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी राज्यों और संघशासित प्रदेशों में कमिटी बनाने का भी फैसला किया, जो बेघर लोगों के लिए शेल्टर होम की निगरानी कर सके। कोर्ट के केंद्र और याचिकाकर्ता से वैसे लोगों की सूची उपलब्ध कराने को कहा जो राज्यों में शेल्टर होम्स की निगरानी कर सकें। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल 17,72,040 बेघर लोग हैं। इनमें 52.9% शहरों में और 47.1% ग्रामीण इलाकों में रहते हैं।

 

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