तो क्या राम मंदिर अध्यादेश पर बटा हुआ है संत समाज !!!

Awais Ahmad

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दिल्ली में साधु-संतों की बैठक जारी है। दो दिनों तक दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होने वाली इस बैठक को धर्मादेश नाम दिया गया है। इस बैठक में देशभर के प्रमुख संत राम मंदिर निर्माण के लिए बड़ा फैसला लेंगे। जिसकी घोषणा रविवार को शाम 4 बजे तक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कोई बड़ी घोषणा भी कर सकता है।

संतों की बैठक में संत राम मंदिर निर्माण पर अध्यादेश लाने पर बटे हुए दिखे आए। जब संत सम्मेलन में राम मंदिर के पक्षकार राम विलास वेदांती ने कहा कि दिसंबर में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। यह अध्यादेश के बिना और पारस्परिक समझौते के आधार पर शुरू होगा। राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में किया जाएगा और लखनऊ में एक मस्जिद का निर्माण किया जाएगा। इस पर मंच पर ही बैठे कई सन्तों ने इनका विरोध किया और कहा कि अब बात चीत का कोई मतलब नही होता है। सरकार को ही राम मंदिर निर्माण के लिए कदम उठाना पड़ेगा।

आइये पहले जानते ही कि राम विलास वेदांती ने क्या कहा। वेदांती ने कहा कि संतो के आह्वान पर बीजेपी राम मंदिर काशी और मथुरा मंदिर के नाम पर आगे बढ़ती रही। संतो ने एक स्वर में कहा था कि अगर मोदी जी भारत के पीएम बने तो राम मंदिर का सपना पूरा होगा। मोदी जी बड़ी बहुमत से पीएम बने, 6 राज्य से अब 19 राज्यों में सरकार बन गई। अमित शाह जी ने कहा कि यूपी में सरकार नहीं है तो संतो ने वहां भी सरकार बनवाई। 13 राज्य के सीएम केंद्र को लिखकर देंगे तो केंद्र सरकार कानून बना सकता है। आज निवेदन है, अब बीजेपी की सरकार 20 राज्यों में है, अब नहीं कह सकते। बीजेपी का बहुमत नहीं है।

उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल जी ने कहा था कि बीजेपी की सरकार बहुमत से आई तो कानून बनाकर मंदिर बनेगा। बीजेपी के नाम पर साम्प्रदायिक माहौल लोग बिगड़ना चाहते है। मंदिर पर कानून पास होगा तो देश मे दंगे होंगे। सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर का मामला आया तो सिब्बल साहब ने चुनाव तक टालने को कहा। नए जज ने 3 महीने के लिए टाल दिया, लेकिन अब कोई इसे नहीं टाल सकता। ये मंदिर अध्यादेश या कानून से नहीं आपसी सहमति से बनेगा और इस दिसंबर में मैं मंदिर निर्माण का काम शुरू करवा दूंगा।

इसी के साथ वेदांती ने कहा कि मंदिर रामलला के नाम पर बनेगा, लेकिन मस्जिद लुटेरे बाबर के नाम पर नहीं बल्कि अल्लाह के नाम पर बनेगी। 6 दिसम्बर 1992 से पहले भी अशोक सिंघल के आह्वान पर इसी तालकटोरा स्टेडियम में बैठक हुई थी और उसके बाद वो ढांचा गिरा दिया गया। आज हम एक बार फिर जुटे हैं। हमारे पीएम मोदी जी को भगवान सद्बुद्धि दे कि मंदिर बनाए।

वेदांती के संबोधन के दौरान की मंच पर बैठे के लोगो ने उनका विरोध किया तो वही कई लोगो ने इसका समर्थन भी किया।

जगतगुरु रामानन्द शंकराचार्य जी महाराज ने संत सम्मेलन की शुरुआत किया और अपने सम्बोधन में कहा कि सनातन धर्म ही राष्ट्रीय वाद है। औरंगज़ेब ने  अत्याचार किया।लोकतंत्र में वोट का महत्व है। पाकिस्तान, बंगाल, अफगानिस्तान, म्यांमार हिंदुस्तान का अखंड हिस्सा था। जहां हिन्दू कम होगा वही से अलगाव की आवाज़ आती है। हिन्दू घटा देश बटा। हिंदुस्तान में हिन्दू लिखोगे तो बचोगे वरना अल्पसंख्यक बोल के बाट दिया जाएगा।

राम मंदिर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि  रामजन्म भूमि पर भव्य बनाने के लिए 3 लाख हिंदुओं ने जान दी।  न्यायालय ने मामले को टाले रखा। सेक्युलर जमात कांग्रेस, कम्युनिस्ट, और मुसलमानों ने न्यायालय में मामले की सुनवाई को 2019 में टालने की कोशिश की। पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अक्टूबर में मामले की सुनवाई की तारीख तय की लेकिन नए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बिना सुनवाई कर मामले को 2019 के लिए टाल दिया। राम मंदिर राम के जन्म स्थान पर ही बन कर रहेगा। सरकार को अध्यादेश लाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण राम के जन्म स्थान पर ही करना होगा।
देश मे बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या जन्म ले रही है।

वहीं स्वामी कौशल किशोर दासजी महाराज ने कहा कि संत समाज चाहता ही कि मंदिर का निर्माण हो और सर्वसम्मति से इसका हल निकलने वाला है, आयोध्या राम जी है राम मंदिर वही बनना चहिए। उन्होंने राम विलास वेदांती के सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि अगर वेदांती के पास ऐसा कोई फॉर्मूला है तो वो सन्तों को दिखाए संत समाज उसका स्वागत करेगा। सभी संत राम जन्म स्थान पर राम मंदिर चाहते है चाहे वह अध्यादेश से बने या फिर आपसे सहमति से बने।

वही साध्वी प्राची ने संत सम्मेलन में कहा कि राम जी का मंदिर बनेगा धूमधाम से, 6 दिसंबर को ही हमें शिलान्यास करना है। अयोध्या के अंदर हिंदुस्तान के हिंदुओं को बुलाओ। राम मंदिर की घोषणा करो। किसी की जरूरत नहीं, राम मंदिर बन जाएगा।

बहरहाल लगातार जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राम मंदिर पर सियासत और बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है। सन्तों ने संत सम्मेलन करके सरकार पर दबाव बनाने को भी कोशिश तेज़ कर दी है। हालांकि संत सम्मेलन में अध्यादेश को लेकर दो राय देखने को मिली। वहीं संत सम्मेलन से पहले शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात को 2 बजे मुंबई में अमित शाह और संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात भी है। अब देखना यह है क्या सरकार राम मंदिर पर कोई कानून बनाती है और संघ विचारक और राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने राम मंदिर पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने की जो बात कही है उसको कितना आगे तक ले जा पाती है।

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