जहां चाह वहाँ राह: रोहिंग्या रिफ्यूजी लोगों ने केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बढाया हाथ ; तक़रीबन 40000 रुपए इकठ्ठा कर ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन के सुपुर्द किया

रोहिंग्या के लिये केरल के लोग हमेशा शीशा पिलाई दीवार की तरह साथ खड़े रहे, आज वही रोहिंग्या केरला के लिये खड़े है

Ashraf Ali Bastavi

नई दिल्ली/ श्रम विहार ( एशिया टाइम्स / इमरान अंसार की रिपोर्ट ) दान करने के लिये इंसान की हैसीयत का कोई रोल होता है क्या? इंसान का माली तौर पर मजबूत होना ही उसके दान देने की गवाही देता है क्या? खुद हजारों तकलीफों में मुब्तला इंसान किसी दुसरे इंसान की मदद कर सकता है क्या?

यक़ीनन आप में से ज्यादातर का जवाब नहीं में होगा|

देश की राजधानी दिल्ली में ओखला में एक बस्ती है श्रम विहार…! जहाँ पर बेहद खस्ता हालत में झुग्गी झोपड़ी बना कर रोहिंग्या रिफ्यूजी के 90 परिवार रहते हैं| कमाई का जरिया है मजदूरी या कूड़ा उठाना.

अब कुछ समय के लिये ज़रा अपने दिल पर हाथ रख कर सोचें और बताएँ कि जुल्मों सितम की इन्तेहाँ बर्दाश्त करने वाले  ये लोग जो खुद अपने परिवार का पेट पालने के लिये दर दर भटकते है वो किसी दुसरे इंसान की क्या मदद करेंगे?

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मगर नहीं मेरे दोस्त! इंसानियत अमीरी गरीबी नहीं  देखती , हमदर्दी का तो दिल से दिल का रिश्ता होता है| जिन मज़लूम रोहिंग्या के लिये केरल के लोग हमेशा शीशा पिलाई दीवार की तरह साथ खड़े रहे हर तरह से इन लोगों की मदद की, अपनी खुशियों  में उनको  शामिल किया आज वही रोहिंग्या केरला के लिये खड़े हुयें है|

दिल्ली के श्रम विहार और फरीदाबाद में रहने वाले तक़रीबन 100 रोहिंग्या परिवारों ने अपनी मजदूरी में से एक एक पैसा निकाल कर  केरल में बाढ़ पीड़ितों की  मदद के लिये चंदा किया है |

ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन के सी ई ओ , पी के नोफेल पहुंचे श्रम विहार कैंप

पैसे से गरीब मगर दिल से अमीर इन लोगों ने तक़रीबन 40000 रुपए इकठ्ठा कर के ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन के  सुपुर्द किया ताकि केरल में मुसीबत में फंसे  लोगों की मदद हो सके|  इंसानियत आज भी जिन्दा है बस उसे देखने की जरुरत है. इसे कहते हैं जहां चाह वहाँ राह .

विडियो रिपोर्ट देखें 

 

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