बहराइच में रासुका के तहत निरुद्ध किए गए लोगों के परिजनों से रिहाई मंच   ने की मुलाकात

रासुका के मनुवादी-सांपद्रायिक षडयंत्र के खिलाफ रिहाई मंच का अभियान

Ashraf Ali Bastavi

लखनऊ । बहराइच के नानपारा में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत निरुद्ध किए गए लोगों के परिजनों से रिहाई मंच प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल में सृजनयोगी आदियोग, लक्ष्मण प्रसाद, वीरेन्द्र गुप्ता, नागेन्द्र यादव, राजीव यादव के साथ बहराइच से वरिष्ठ पत्रकार सलीम सिद्दीकी और नूर आलम शामिल थे।
प्रतिनिधि मंडल ने रासुका के तहत निरुद्ध किए गए मुन्ना, नूर हसन, असलम, मसहूद रजा, मो0 अरषद के परिजनों व ग्राम वासियों से मुलाकात की। 2 दिसंबर को बारावफात के जुलूस के दिन सांप्रदायिक तनाव होने के बाद बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों की गिरफ्तारियां हुईं। जिसमें निचली अदालत से बहुत कम राहत मिली और हाईकोर्ट से लोगों को जमानत मिली। इस मामले में 5 व्यक्तियों पर रासुका के तहत कार्रवाई हुई।
मुन्ना के भाई अब्दुल खालिद ने बताया कि वह उस दिन ईट भट्टे से मजदूरी करके लौटा था कि पुलिस वाले आ धमके और उसके साथ दो भतीजों साजन, राजन और भाई नसीबुल को उठा ले गए। बाद में मुन्ना पर रासुका लगा दिया गया।
रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालने वाले नूर हसन की पत्नी अकीला बानो दो साल की बेटी सैयदा को दिखाते हुए बताती हैं कि ये बीमार थी. इसकी दवा लेने के लिए वो डा0 हुसैन बख्श के यहां गए थे पर बवाल की वजह से दवा नहीं मिली। तभी पुलिस की गाड़ी आई और उन्होंने उनको बैठा लिया। हमने पूछा तो कहा कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं. तब से वो नहीं आए। यह पूछने पर कि क्यों नहीं वो छूट रहे हैं तो वह बोलती हैं कि वो नहीं जानती। वो तो इस बात से ही परेशान हैं कि जेल में मिलाई का ही उनके पास पैसा नहीं है वो क्या केस लड़ेगी। उनके पति के ऊपर रासुका लगी है ये तो वो जानती हैं पर ये है क्या वो नहीं जानती।
असलम की पत्नी शन्नो बताती हैं कि उस दिन वो अपनी चूडियों की दुकान पर थे वहीं से पुलिस ने उन्हें उठाया और अब तक नहीं छोड़ा। हफ्ते में तीन मिलाई होती हैं पर मुष्किल से वो एक या दो बार महीने में जा पाती हैं क्योंकि एक बार जाने में ही डेढ़-दो सौ रुपए लग जाते हैं। रासुका को वह बार-बार असोका कहती हैं और पूछने पर नहीं बता पाती हैं कि क्या है ये। बस यही जानती हैं कि यह कोई बड़ी धारा है जिसको सरकार लगाती है।
मदरसे में पढ़ाकर अपने परिवार को पालने वाले मसहूद रजा के पिता खलील बताते हैं कि वह उस दिन अपनी बहन से मिलने गया था और बाजार में जैसे ही बच्चों के खाने-पीने की चीजें खरीदकर घर आ रहा था कि पुलिस ने उसे उठा लिया। उसका आधार कार्ड, मोबाइल सब जब्त कर लिया। उसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। वो कहते हैं कि मैं चल फिर पाने में लाचार हूं ऐसे में मैं खुद का तो कुछ नहीं कर पाता उसके परिवार का कैसे पालन-पोषण करुं।
अरशद की मां शमा बताती हैं कि वो एक दिन पहले केरल से आया था. वह वहीं पढ़ता था और यह उसका आखिरी साल था। पर पुलिस ने उसे ऐसा फंसाया कि उसका कैरियर ही बर्बाद हो गया। मेरे 19 साल के बेटे पर रासुका लगा दी गई हैं। वहीं अरशद की बहन कनीज फातिमा भी अपने भाई और खासतौर पर उसकी पढ़ाई को लेकर फिक्रमंद हैं। रासुका पर वो कहती हैं कि यह देशद्रोह जैसा है। वो सवाल करती हैं कि आखिर उनके भाई ने ऐसा क्या किया था कि उन पर रासुका थोप दिया गया। अरशद की अम्मी बताती हैं कि उनके पति मो0 शाहिद के साथ त्योहार पर मिलने आए भाई अब्दुल मुहीद, बहनोई मो0 खालिद व उनके साथ आए 14 साल के कलीम को भी पुलिस उठा ले गई।
रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि योगी सरकार दलितों व मुसलमानों पर रासुका लगाकर पूरे समाज को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक घोषित करने का षडयंत्र रच रही है। इसी के तहत उसने भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर पर रासुका लगाया और अब भारत बंद के नेताओं पर भी लगातार लगा रही है। रिहाई मंच ने इस मनुवादी और सांप्रदायिक षडयंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बहराइच के नानपारा का दौरा किया। उन्होंने बताया कि इसके तहत बाराबंकी, कानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ आदि का दौरा किया जाना है जहां रासुका के तहत दलितों-मुसलमानों को निरुद्ध किया गया है।

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