बाबरी मस्जिद विवाद: विवादित जमीन बौद्ध समुदाय की है, वहां किसी भी मंदिर या हिंदू ढांचे के अवशेष नहीं मिले

बौद्ध समुदाय के कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि अयोध्या में विवादित जमीन बौद्धों की है और यह पहले एक बौद्ध स्थल था।

Awais Ahmad

बाबरी मस्जिद अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में अब एक तीसरे पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की है। बौद्ध समुदाय के कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि अयोध्या में विवादित जमीन बौद्धों की है और यह पहले एक बौद्ध स्थल था।

सुप्रीम कोर्ट ने अर्ज़ी पर सुनवाई से इनकार कर दिया है और कहा कि मुख्य मुद्दे की सुनवाई वाली बेंच ही मामले की सुनवाई कर सकती है।

अयोध्या के विनीत कुमार मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्ज़ी दाखिल की है। उन्होंने विवादित स्थल पर भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा की जाने वाली खुदाई के आधार पर यह दावा किया है। अर्ज़ी में कहा है, एएसआई की खुदाई से पता चला है कि वहां स्तूप, गोलाकार स्तूप, दीवार और खंभे थे जो किसी बौद्ध विहार की विशेषता होते हैं। मौर्य ने दावा किया है कि जिन 50 गड्ढों की खुदाई हुई है, वहां किसी भी मंदिर या हिंदू ढांचे के अवशेष नहीं मिले हैं।

बता दें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर ऐसी अंतिम खुदाई साल 2002-03 में हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अर्ज़ी में इसे संविधान के अनुच्छेद 32 (अनुच्छेद 25, 26 और 29 के साथ) के तहत एक दीवानी मामले के रूप में दर्ज किया गया है। अर्ज़ी में कहा गया है कि यह याचिका बौद्ध समुदाय के उन सदस्यों की तरफ से दायर की गई है जो भगवान बुद्ध के सिद्धांतों के आधार पर जीवन जी रहे हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण से पहले उस जगह पर बौद्ध धर्म से जुड़ा ढांचा था।

 

 

 

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