क्या संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रो. रजनीश शुक्ला की पीएच.डी की थीसिस फर्जी है?

वाराणसी निवासी पवन कुमार सिंह ने राष्ट्रपति और केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर को पत्र लिखकर डॉ रजनीश कुमार शुक्ला के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करने की मांग की है

Asia Times Desk

नई दिल्ली, 02 मार्च।  (प्रेस विज्ञप्ति ) संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रोफ़ेसर एवं भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद (ICPR) के सदस्य सचिव डॉ रजनीश कुमार शुक्ला पर पीएच.डी की थीसिस के किसी दूसरे की थीसिस को नकल करके डिग्री प्राप्त करने का गंभीर आरोप लगा है।

वाराणसी निवासी पवन कुमार सिंह ने राष्ट्रपति और केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर को पत्र लिखकर डॉ रजनीश कुमार शुक्ला के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

पवन सिंह ने अपने पत्र के माध्यम से डॉ रजनीश शुक्ला को तत्काल प्रभाव से भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव पद से हटाने और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से निलंबित कर तुरंत जांच शुरू करने की मांग की है।  

 पवन सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि डॉ रजनीश शुक्ला ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से 1995 में “ कान्ट का सौन्दर्य शास्त्र एक समीक्षात्मक अध्ययन  विषय पर पीएच.डी की डिग्री प्राप्त की। डॉ शुक्ला की ये थीसिस 1991 में डॉ सुधा पाण्डेय की थीसिस की नकल है।

डॉ रजनीश शुक्ला का ये कृत्य एक शैक्षणिक अपराध है। जो शिक्षक स्वयं अनैतिक कार्य करता हो वो देश के भविष्य को नैतिकता की कैसी शिक्षा देगा। डॉ रजनीश कुमार शुक्ला तोड़-जोड़ के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं।

अपने इसी गुण के कारण वो संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षक के रूप में नियुक्ति पा गए। इन दिनों भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद में सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं। सुत्रों का मानना है कि अब वो किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में कुलपति के लिए लॉबी कर रहे हैं।

 अपनी चिठ्ठी में श्री पवन कुमार सिंह ने राष्ट्रपति और मानव संसाधन विकास मंत्री से डॉ रजनीश शुक्ला को अविलंब निलंबित कर जांच की मांग की है।  

 

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