मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चांसलर का हुआ विरोध

गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा ने कहा कि उसको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। वह इस समय बहुत तनाव महसूस कर रही है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैंने ऐसा पीएचडी में दाखिले के किया है जो कि पूरी तरह ग़लत है। मैंने चांसलर का विरोध सिर्फ इंसाफ के लिए किया।

Awais Ahmad

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी में पिछले दिनों 7वां दीक्षांत समारोह हुआ। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त शाहबुद्दीन याकूब कुरैशी ने शिरकत की। 7वां दीक्षांत समारोह दो बातों की वजह से विवादित रहा। पहली वजह यह रही कि यूनिवर्सिटी के चांसलर ने दीक्षांत समारोह में शामिल नही हुए और दूसरा इस वजह से कि यूनिवर्सिटी की एक गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा ने दीक्षांत समारोह में चांसलर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

जनसंपर्क विभाग की छात्रा ने दीक्षांत समारोह के दौरान स्टेज पर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और मुख्य अतिथि के सामने चासंलर के विरोध में इंग्लिश में लिखी हुई पर्ची दिखाई जिसपर “शेम ऑन चांसलर” (Shame on Chancellor) लिखा हुआ था। पहले तो किसी को कुछ समझ नही आया थोड़ी ही देर बाद वाइस चांसलर ने छात्रा के हाथ से वह पर्ची ले ली और किसी और व्यक्ति को पकड़ा दी। उसके बाद छात्रा गोल्ड मेडल और डिग्री लेकर स्टेज से उतार गई। गोल्ड मेडल छात्रा के समर्थन में दर्शकों में बैठे छात्र, छात्राओं ने ताली भी बजाई।

इस पूरी घटना का जहां यूनिवर्सिटी में समर्थन हो रहा है और कुछ छात्र इसका विरोध भी कर रहे है। हमने छात्रा से बात कर इस पूरी घटना के बारे में जानने की कोशिश की तो छात्रा ने बताया कि उसने ऐसा इस लिए किया क्योंकि जनसंपर्क विभाग के प्रोफेसर पर उसी विभाग की दो पूर्व छात्राओं ने शोषण का आरोप लगाया है जो पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठा है। गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा ने बताया कि वह प्रोफेसर को बहुत अच्छे से जानती है और प्रोफेसर का बरताव अपने छात्र छात्राओं के प्रति एक पेरेंट्स जैसा है वह अपने विभाग और यूनिवर्सिटी के छात्रों के उज्वल भविष्य के लिए काम करते है और वह सभी छात्रों के पिता के समान है। मुझको पूरा विश्वास है कि प्रोफेसर पर लगा आरोप झूठा है और यह आरोप चांसलर की एक सोची समझी साजिश के तहत लगाया गया है। जिसका मैं विरोध करती हूँ। अगर आपके सामने कुछ गलत हो रहा है तो आपको उसको विरोध करना चाहिए।

छात्रा ने बताया कि प्रोफेसर ने उनको इस घटना के बाद बुलाया और छात्रा से कहा कि इस तरह का बरताव दीक्षांत समारोह में नही करना चाहिए था। आप सोचिए जिस प्रोफेसर के लिए मैंने आवाज़ उठाई वही मुझसे कह रहा है कि मुझको इस तरह का बरताव नही करना चाहिए था क्योंकि इससे मेरा मीडिया ट्रायल हो सकता है और मुझको ट्रोल किया जा सकता है और यूनिवर्सिटी की बदनामी होगी। जो प्रोफेसर आपनी छात्रा के ट्रोल होने के लेकर इतना परेशान हो वह किसी अन्य छात्रा के साथ कैसे कुछ गलत कर सकता है। प्रोफेसर पर लगेआरोप बहुत ही गंदी राजनीति के तहत चांसलर ने लगवाया है और मैंने इसी लिए दीक्षांत समारोह में चांसलर का विरोध किया।

गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा ने कहा कि उसको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। वह इस समय बहुत तनाव महसूस कर रही है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैंने ऐसा पीएचडी में दाखिले के किया है जो कि पूरी तरह ग़लत है। मैंने चांसलर का विरोध सिर्फ इंसाफ के लिए किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *