PM मोदी ने कहा- अदालती प्रक्रिया के बाद ही राम मंदिर पर अध्यादेश

PM Modi Interview with ANI

Asia Times Desk

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाने के बारे में अदालती प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही विचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन तलाक पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही सरकार अध्यादेश लाई थी। सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर पर 4 जनवरी को सुनवाई करेगा।

न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में मोदी ने कहा कि कांग्रेस के वकील खलल पैदा कर रहे हैं, इसलिए अदालती कार्यवाही धीमी हो गई है। प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि क्या भाजपा राम मंदिर मुद्दे को भावनात्मक मुद्दे के तौर पर उठाती है, इस पर मोदी ने कहा- हमने भाजपा के घोषणा-पत्र में भी कहा है कि इस मुद्दे का हल संविधान के दायरे में रहकर ही निकल सकता है। मोदी ने कहा कि अदालती प्रक्रिया खत्म होने दीजिए। जब अदालती प्रक्रिया खत्म हो जाएगी, उसके बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी जवाबदारी होगी, हम उस दिशा में सारी कोशिशें करेंगे। अगले लोकसभा चुनाव को लेकर मोदी ने कहा- 2019 का चुनाव जनता बनाम महागठबंधन होगा। मोदी तो केवल जनता के प्यार और आशीर्वाद का नाम है।

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कांग्रेस ने हल निकालने में खलल पैदा किया: मोदी
मोदी ने कहा कि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि जो लोग 70 साल सत्ता में रहे, उन्होंने अयोध्या मुद्दे का हल निकालने के रास्ते में खलल पैदा करने की पूरी कोशिशें कीं। मैं कांग्रेस से अनुरोध करता हूं कि देश में शांति और एकता के लिए उन्हें अपने वकीलों को अयोध्या विवाद पर खलल पैदा करने से रोकना चाहिए। अदालती प्रक्रिया को अपना रास्ता तय करने देना चाहिए। इस मुद्दे को राजनीतिक तराजू में नहीं तौलना चाहिए।

‘सर्जिकल स्ट्राइक में जोखिम था, जवानों से कहा था- सुबह तक वापस आ जाना’
सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में मोदी ने कहा- जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सर्जिकल स्ट्राइक की तारीख दो बार बदली गई थी। उड़ी हमले में जवानों को जिंदा जलाए जाने के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई गई थी। मेरे और सेना के भीतर ही भीतर एक गुस्सा पनप रहा था। मैंने जवानों को भेजे संदेश में कहा था कि मिशन की कामयाबी या नाकामी के बारे में मत सोचना। किसी भी प्रलोभन में मत आना और इसे जारी मत रखना। सुबह होने से पहले हर हाल में वापस आना। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान सीमा पार से हमले क्यों करता है, इस पर मोदी ने कहा- एक लड़ाई से पाकिस्तान सुधर जाएगा, यह सोचना बहुत बड़ी गलती होगी। पाकिस्तान को सुधरने में अभी और समय लगेगा।

‘उर्जित पटेल के इस्तीफे में राजनीतिक दबाव नहीं था’
आरबीआई के गवर्नर रहे उर्जित पटेल के इस्तीफे पर प्रधानमंत्री ने कहा- निजी कारणों के चलते पटेल खुद पद छोड़ना चाहते थे। मैं इस बारे में पहली बार यह खुलासा कर रहा हूं। उन्होंने इस्तीफे से छह-सात महीने पहले ही मुझे इस बारे में बताया था। उन्होंने लिखित में भी अपनी इच्छा जताई थी। उन पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव होने का कोई सवाल ही नहीं है। बतौर आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने अच्छा काम किया।

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तीन राज्यों में भाजपा क्यों हारी? 
तीन राज्यों में भाजपा की चुनावी हार पर मोदी ने कहा कि तेलंगाना और मिजोरम में भाजपा सत्ता में आएगी, ऐसी बात कोई नहीं कह रहा था। छत्तीसगढ़ में साफ-साफ नतीजे आए। हमारी हार हुई। बाकी दो राज्यों में हंग असेंबली है। 15 साल की एंटी इन्कम्बेंसी को लेकर हम चुनाव में उतरे थे। लेकिन पिछले दिनों हरियाणा में स्थानीय निकायों में हम जीते। जम्मू-कश्मीर के निकाय चुनाव में भाजपा से जुड़े लोग जीते। जीत और हार, यही एक मानदंड नहीं होता है।

लोग कहते हैं आपने किसानों के लिए कुछ नहीं किया, राहुल के कर्ज माफी के वादे को लॉलीपॉप कहा?
मोदी ने कहा- सभी किसानों का कर्ज माफ करने के झूठे वादे को मैंने लॉलीपॉप कहा था। भारत सरकार ने बैंकों से रुपए लूटकर मौज करने वालों के खिलाफ कानून बनाया। तीन लाख करोड़ रुपए हम वापस लेकर आए हैं। अगर कर्जमाफी से किसानों के जीवन के सारे दर्द दूर होते हैं, तो बिल्कुल करना चाहिए। 2008 में भी चुनाव जीतने के लिए कर्ज माफी हुई। लेकिन, क्या किसानों के दुख दूर हुए? उपाय यही है कि बीज से बाजार तक किसानों को मजबूत किया जाए। किसान कर्जदार होता क्यों है, इस पर सोचने की जरूरत है। किसानों की कई सालों से मांग थी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना दिया जाए। हमने 21 फसलों में इसे लागू किया। कर्ज माफी से कितने किसानों को फायदा होता है? ज्यादातर किसान साहूकारों से लोन लेता है, कर्ज माफी की सरकार की योजना में वह नहीं आता।

कांग्रेस मुक्त भारत का सपना पूरा हो पाया?
मोदी ने कहा- कांग्रेस एक कल्चर लाई थी- परिवारवाद, जातिवाद, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावादी। मैं जब कांग्रेस मुक्त भारत की बात करता हूं, तब मैं इस तरह की संस्कृति से मुक्त होने की बात करता हूं। कांग्रेस को भी इस कल्चर से मुक्त होना पड़ेगा। दुर्भाग्य है कि देश में आज एक मजबूत विपक्ष नहीं है।

मोदी मैजिक कम हुआ है?

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मोदी ने इस सवाल पर कहा कि जो लोग कहते हैं कि अब मोदी लहर काम नहीं करेगी, वे एक तरह से मोदी मैजिक या मोदी लहर की बात को स्वीकार करते हैं। जहां तक

मेरा सवाल है, लहर सिर्फ जनता की आशा-आकांक्षाओं की होती है। लहर सिर्फ जनता के विश्वास की होती है। आज हिंदुस्तान में विश्वास पनपा है। आज युवा पीढ़ी की आकांक्षाएं हैं।  मोदी ने राजनीतिक विश्लेषकों के इस आकलन को खारिज कर दिया कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में 543 में से 180 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी। मोदी ने कहा- जब तक वे लोग ऐसी बड़ी-बड़ी बातें नहीं करेंगे, तब तक उनके गठबंधन से लोग कैसे जुड़ेंगे। क्या इसका कोई साइंटिफिक अनुमान है? 2013 में भी यही लॉजिक दिया जाता था।

2014 का मोदी-शाह कॉम्बिनेशन 2019 में काम कर पाएगा? 
प्रधानमंत्री ने कहा- जो लोग कहते हैं कि भाजपा नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कारण चलती है, वे हमारी पार्टी को नहीं जानते। भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है। हम पोलिंग बूथ की मजबूती पर चलते हैं। एक या दो लोग भाजपा नहीं चलाते। जो लाेग कहते हैं कि भाजपा हार रही है, उन्हें असम, त्रिपुरा, हरियाणा के नतीजे देख लेने चाहिए। मनोबल कम होने का कोई कारण ही नहीं है। 2019 में भी जनता की भरोसा हम पर ही भरोसा करेगी।

क्या नोटबंदी झटका नहीं थी?
मोदी ने कहा- ये झटका नहीं था। एक सफाई की जरूरत थी। एक साल पहले तक हमने देश को कहा था कि यह एक व्यवस्था है। आपके पास कालाधन है तो आप जमा कराइए। पहले की सरकारों की तरह उन्होंने सोचा कि मोदी भी वैसा ही होगा। काफी कम लोग आगे आए। एक साल प्रक्रिया चली। बार-बार कहा गया। इसके बाद यह कदम उठाया गया। यह देश के आर्थिक व्यवस्था के लिए जरूरी था। जब ट्रेन भी पटरी बदलती है तो उसकी रफ्तार कम होती है। मनमोहन सिंह जी जब आर्थिक सुधार लाए, तब भी जीडीपी घटी थी। देश में पैरेलल इकोनॉमी चल रही थी। उद्योगपतियों, व्यापारियों, बाबुओं के घर से बोरे भर-भरकर नोट निकलते थे। नोटबंदी ने इसे खत्म किया। पैसा बैंकिंग व्यवस्था में आया। एक ईमानदारी का माहौल बना है। टैक्स कलेक्शन बढ़ने को क्या आप नोटबंदी की सफलता नहीं मानेंगे?

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विजय माल्या और नीरव मोदी को तो आपकी सरकार वापस नहीं ला पाई?
प्रधानमंत्री ने कहा- आखिर उन्हें भागना क्यों पड़ा? उन लोगों को इसलिए भागना पड़ा, क्योंकि यहां उन्हें पाई-पाई चुकानी पड़ेगी। जो लोग भागे हैं, उनके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून होते हैं। ऐसे भगोड़ों की संपत्ति जब्त करने का हमने कानून बनाया। एक दिन हम ऐसे लोगों को वापस ले आएंगे।

जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहा जाता है?
प्रधानमंत्री ने कहा- जिसकी जैसी सोच होती है, उसकी वैसी राय होती है। इसमें मेरा उलझना ठीक नहीं होगा। जीएसटी पर क्या सभी दलों की सर्वसम्मति नहीं थी? सभी राजनीतिक दलों ने अच्छी व्यवस्था का समर्थन किया था। संसद ने आम सहमति से इसे पारित किया था। जीएसटी से पहले टैक्स रेट क्या था? 30 से 40 प्रतिशत टैक्स वाली चीजें थीं। बार-बार टैक्स लगता था। जीएसटी के कारण यह सरल हुआ। 500 से ज्यादा चीजें जीरो टैक्स रेट में आईं। जीएसटी काउंसिल में कांंग्रेस के भी मंत्री हैं। क्या वे अपनी ही पार्टी के लोगों को गाली दे रहे हैं?

मिडिल क्लास, बिजनेस क्लास लोग आपके प्रतिबद्ध वोटर हैं, उनकी राहत के लिए क्या है?
मोदी ने कहा- हमें मिडिल क्लास के बारे में हमें सोच बदलनी होगी। यह स्वाभिमान से जीने वाला वर्ग है। देश चलाने में उसका सबसे बड़ा योगदान है। मिडिल क्लास की चिंता हमारा दायित्व है। महंगाई काबू होती है तो मध्यमवर्ग को सबसे पहले राहत मिलती है। एजुकेशन में हम सीटें बढ़ाते हैं ताे इसी वर्ग को सबसे ज्यादा फायदा मिलता है। रेलवे के एसी कोच से ज्यादा लोग सस्ती हवाई सेवा में ट्रेवल कर रहे हैं।

2जी, सीडब्ल्यूजी का आप जिक्र करते थे, उनके आरोपी तो आज भी खुले आम घूम रहे हैं?
मोदी ने कहा- कुछ लोग जमानत पर भी हैं। इस देश में जिसे प्रथम परिवार कहा जाता था, वह भी आज पैसों की हेराफेरी के मामले में जमानत पर है। इस देश के पूर्व वित्त मंत्री को अदालत के चक्कर काटने पड़ते हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। हालांकि, कोई भाजपा का विरोधी है, इसलिए उसे तकलीफ हो, हम इस सोच के पक्षधर नहीं हैं। अगर मोदी कल गलत करे तो मोदी को भी भुगतना होगा।

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मॉब लिंचिंग और इमरान के बयान पर क्या कहेंगे? मुसलमानों में असुरक्षा क्यों है?
मॉब लिंचिंग पर मोदी ने कहा- ऐसी कोई भी घटना सभ्य समाज को शोभा नहीं देती है। ऐसी घटनाओं के पक्ष में कभी भी आवाज नहीं उठनी चाहिए। क्या यह 2014 के बाद शुरू हुआ है। यह समाज के अंदर आई हुई एक कमी का फैलाव है। इस स्थिति को सुधारने के लिए हमें मिलकर प्रयास करना चाहिए। अरब देश के एक बहुत बड़े विद्वान हैं। उन्होंने कहा- हिंदुस्तान में कई संप्रदायों के लोग हैं, लेकिन वहां सभी लोग मिल-जुलकर रहते हैं। हम लोग एक ही समुदाय हैं, तब भी यहां लड़ाइयां होती हैं। हर चुनाव के पहले लोगों को असहिष्णुता दिखने लग जाती है तो यह लोगों का एजेंडा है। 18 हजार गांवों में बिजली पहुंची, सौभाग्य योजना पहुंची.. हमने यह तो नहीं पूछा कि किस समुदाय के लोग हैं।

महागठबंधन बढ़ता जा रहा है? चंद्रबाबू नायडू कहते हैं कि केसीआर के गठबंधन को मोदीजी समर्थन दे रहे हैं?
मोदी ने कहा- केसीआर गठबंधन बना रहे हैं यह मेरे सामने अभी नहीं आया। तेलंगाना में जिस तरह से महागठबंधन का हाल बेहाल हुआ, उससे उनकी पीड़ा झलकती है। आखिर महागठबंधन क्यों बन रहा है? 5 साल हो गए इस महागठबंधन ने देश के सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर कुछ कहा है क्या? अभी भी उनके यहां पर दो-दो सुर निकलते हैं। ये लोग एक-दूसरे को सहारा देकर बचने की कोशिश कर रहे हैं। उनका एकमात्र एजेंडा मोदी है।

एनडीए क्या और साथियों को जोड़ सकती है?
उन्होंने कहा- 2014 में जितने दल थे, उससे ज्यादा दल अब हमारे साथ जुड़ रहे हैं। (मायावती के सवाल पर कहा) कौन जुड़ रहा है और कौन नहीं इसका जिक्र कोई समझदार आदमी टीवी के सामने नहीं करेगा। तेलंगाना में महागठबंधन का बुरा हाल हुआ। जम्मू-कश्मीर में गठबंधन के लोगों ने तय किया चुनाव का बहिष्कार करेंगे। जनता ने रिकॉर्ड वोट दिए। त्रिपुरा में भी भाजपा जीती, गठबंधन हारा। (उद्धव के चौकीदार चोर है जुमले पर कहा) देखिए, हमें पूर्ण बहुमत मिला। गठबंधन का धर्म है। सबके साथ विचार-विमर्श करके हम निर्णय लेते हैं। साथी दल भी तरक्की करें यह उनकी इच्छा है। हम भी यही चाहेंगे। महागठबंधन में जो लोग हैं, वे कांग्रेस से कभी ना कभी निकले थे और उनके विरोध से पैदा हुए।

संस्थानों की बात करें तो विपक्षी कह रहे हैं कि भाजपा सरकार हस्तक्षेप कर रही है?
मोदी ने कहा- कांग्रेस को यह बोलने का कोई हक नहीं है। कैबिनेट इतना बड़ा निर्णय करे और पार्टी का नेता कॉन्फ्रेंस में फैसले के पर्चे फाड़ दे। यह किस इंस्टिट्यूशन का सम्मान करते हैं? आरबीआई में कई बार गवर्नरों को बाहर निकलना पड़ा, आपने प्लानिंग कमीशन का असम्मान किया था। हमने सीबीआई का आंतरिक मामला आने पर दोनों अफसरों को छुट्टी पर जाने को कहा ताकि जांच हो सके। आरबीआई का मामला आया तो गवर्नर ने निजी कारणों से इस्तीफा दिया। वह 6 महीने से मुझसे कह रहे थे। इसमें कोई राजनीतिक दबाव होने का सवाल ही नहीं उठता। सोहराबुद्दीन केस का फैसला आया। किस तरह से इन लोगों ने संस्थानों का दुरुपयोग किया है, वह सब इसमें लिखा है। ईडी की बात करें तो वह प्रोफेशनली अपना काम कर रहा है। विदेश से कोई राजदार भारत में आता है तो इस पर गर्व होना चाहिए। आप अपनी पार्टी के वकील को भेजकर उसकी मदद को पहुंच जाते हैं।

Courtesy : Dainik Bhaskar

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