गौ आतंक के खिलाफ गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नाम खुला ख़त

एशिया टाइम्स

आदरणीय राजनाथ सिंह

(गृह मंत्री, भारत सरकार)

महोदय

बुद्धवार 15 नवम्बर 2017 को एक बड़े अखबार में आपका इंटरव्यू प्रकाशित हुआ था, उस इंटरव्यू में बहुत सी बातें एसी थीं जिन्हें रौशनी में लाकर मेरा चिंता को थोड़ कम कर दिया। आपने उस इंटरव्यू में बताया कि देश से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है, सिर्फ पच्चीस, तीस जिलो में ही नक्सलवाद रह गया है। अगर आपके इस दावे में दम है तो मेरे लिये ये खुशी की बात है, और मेरे लिये ही क्या हर एक भारतीय के लिये खुशी की बात है कि देश से नक्सल जैसी खत्म होने के कगार पर है। क्योंकि देश में हिंसा के रास्ते पर चलकर किसी भी आंदोलन को फलने फूलने की इजाजत नही दी जा सकती है।

गृह मंत्री जी हिंसा से याद आया कि जबसे आप गृह मंत्री बने हैं, या यूं कहें कि जबसे आपकी पार्टी की सरकार सत्ता में आई है, तभी से उस समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जिस समुदाय को मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने यह कहकर पाकिस्तान जाने से रोक लिया था कि आप पाकिस्तान नहीं बल्कि इस देश में ज्यादा महफूज रहोगे। लेकिन महोदय आये दिन हिन्दूवादी तत्व मुसलमानों को गाय के नाम पर कत्ल कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन साल में गाय के नाम पर जो घटनाऐं हुई हैं, जिन लोगों की मौत हुई है, उसमें मरने वालों, और पिटने वालों में 90 प्रतिशत मुसलमान ही हैं।

राजनाथ सिंह साहब आपने एक रोज कहा था कि आतंकवादी संगठन आईसिस से लड़ने में सबसे ज्यादा जो भारत का साथ देगा वह भारत का मुसलमान ही है। आपने बिल्कुल सही कहा क्योंकि इस्लाम में आतंकवाद की कोई गुंजाईश ही नही है, इस्लाम किसी निर्दोष इंसान की जान लेने को पूरी इंसानियत का कत्ल करार देता है, इस हिसाब से जो इस्लाम को न माने वह मुसलमान नहीं हो सकता। महोदय आप भी, आपकी पार्टी के नेता भी, आईसिस की बातें बहुत करते हैं, लेकिन कभी आपने गौआतंक की बातें नहीं कीं ऐसा  क्यों है सर ? जब अल्लाहु अकबर कहकर इंसान की जान लेना आतंकवाद है तो फिर जय श्री राम कहकर किसी इंसान की जान लेना आतंकवाद क्यों नहीं ?

जब आतंकी संगठन आईसिस इंसानियत के लिये खतरा है तो फिर गाय के नाम पर इंसानों की जान लेने वाले ये तथाकथित गौरक्षक दल आतंकी क्यों नहीं ? आप जानते भी हैं सर राजस्थान में आपकी पार्टी की सरकार है, और इत्तेफाक देखिये राजस्थान की मुख्यमंत्री भी ठाकुर हैं, ठाकुर यानी क्षत्रिय, और क्षत्रीय यानी लोगों की जान की रक्षा करने वाला, उसके बावजूद गौआतंकी इंसानों को कत्ल कर रहे हैं। आखिर यह क्षत्रियता कहां है हुई साहब ? उसी राजस्थान में पुलिस ने एक कथित फर्जी एनकाउंटर कर दिया था तो ठाकुरों ने आसमान सर पर उठा लिया था, क्योंकि किसी की जान लेने का अधिकार अदालत से पहले किसी को भी नही है। मगर उसी राजस्थान में गाय के नाम पर पिछले सात महीने में दो लोगों का कत्ल किया गया है, छ लोगों पर कत्ल के इरादे से वार किया गया है लेकिन न कोई जांच है और न कोई सजा, ऐसा क्यों है सर ?

अभी पांच दिन पहले जिस मोहम्मद उमर का कत्ल गौआतंकियों द्वारा किया गया है, उसके परिवार की आर्थिक इतनी खराब है कि आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। मोहम्मद उमर के आठ बच्चे थे, और नोवें बच्चे जन्म उसके कत्ल के पांच दिन बाद हुआ है। लेकिन महोदय उस परिवार की हालत ऐसी है कि दो जून की रोटी के भी लाले हैं। मोहम्मद उमर दिहाड़ी मजदूर था, घर पर दो बकरियां थीं, बकरियों का दूध घर वालों की पूर्ती नहीं कर पाता था, तो वह गाय खरीदने के लिये चला गया, लेकिन वह गाय लेकर वापस नहीं बल्कि चार दिन बाद उसकी लाश आई है।

मोहम्मद उम्र की मां की उम्र भी सत्तर साल के करीब है, ऐसी बुढ़ापे में उसने अपने बेटे का जनाजा देखा है, जानते भी हो गृहमंत्री जी बेटे की हत्या की खबर सुनकर उसकी बूढी मां ने सबसे पहले तो इस खबर को झुठलाया, लेकिन जब उसे यकीन हो गया कि उसका बेटा इस दुनिया मे नहीं रहा तो उसने कहा कि अच्छा होता कि उसके बेटे के कातिल उसकी मां की हत्या कर देते, कमसे कम उसका बेटा इस परिवार को तो संभाल लेता।

सर आईसिस के आतंकवादी जब किसी इंसान की हत्या करते हैं तो वे ये नहीं देखते कि इसके परिवार वालों का क्या होगा, वे ये भी नहीं देखते कि मरने वाला किस धर्म और जाति, कबीले, संप्रदाय से ताअल्लुक रखता है, उनके लिये इतना ही काफी होता है कि मरने वाला इंसान है, लेकिन गौआतंकी तो आईसिस से भी दस हाथ आगे हैं, ये पहले धर्म देखते हैं, जाति देखते हैं, और उसके बाद उसकी हत्या करते हैं। सर क्या आप इन गौआतंकियों पर भी जुबान खोलेंगे ? क्या आप भारत के मुसलमानों को सुरक्षा की गारंटी दिलायेंगे ? क्या आप इन गौआतंकियों पर प्रतिबंध लगाकर इन्हें जेल में उसी तरह सड़ायेंगे, जिस तरह दूसरे आतंकी संगठनों के लोग जेल मे पड़े हैं ? सर सवाल तो बहुत हैं, लेकिन बात जरा लंबी हो जायेगी। आपको अखलाक याद होगा, अखलाक का बेटा सीमा पर देश की रक्षा कर रहा था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि जिन लोगों की वह रक्षा कर रहा है वही लोग उसे अनाथ बना देंगे।

सर जब उस सैनिक से उसके पिता की हत्यारों के बारे में पूछा गया कि आपको कैसा महसूस हो रहा है तो उसने कहा कि ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ ये शब्द उस बेटे के थे जिसके पिता की हत्या उसके ही गांव वालों ने कर दी थी। लेकिन गृह मंत्री जी उसके बाद कैसा मजाक हुआ उसने तो तिरंगे को और इस देश के संविधान को तार तार करके रख दिया। अखलाक की हत्या में शामिल उस एक शख्स की मौत हो गई जिस पर आपके ही सहयोगी मंत्री महेश शर्मा ने तिरंगा डाल दिया। सर एक हत्यारोपी, जिस पर देश में अफरा तफरी फैलाकर, दंगा भड़काने हत्या करने का आरोप हो उसकी लाश पर तिरंगा डालना आखिर संविधान और राष्ट्रध्वज का अपमान नहीं तो और क्या था ?

सर एक तरफ आप आईसिस और नक्सल के खात्मे की बात करते हैं दूसरी तरफ आप गौआतंकी संगठनों  पर खामोशी अख्तियार कर लेते हैं, हत्यारोपियों को आपकी पार्टी का विधायक नौकरी दिलाता है, ये सब क्या है सर ? क्या आप मुसलमानों की हत्या का इनाम दे रहे हैं ? क्या आप सिर्फ एक विशेष समुदाय के ही गृहमंत्री हैं ? मंत्री जी अखलाक से लेकर मोहम्मद उमर तक के परिवार इंसाफ के लिये लाईन में लगे हैं अगर हो सके तो उन पर जुबां खोलिये, उन्हें इंसाफ दिलाईये ? और ये जो गौआतंकी इस देश की छवी की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बट्टा लगाने पर तुले हैं इन्हें सबक सिखाईये। और अगर आप इतना नहीं कर सकते तो फिर आप खुलकर कहिये कि आप गौआतंकियों को उसी तरह पाल रहे हैं जिस तरह पाकिस्तान की सरकारों ने आतंकवादियों को पाल पोस कर बड़ा क्या है।

आपका शुभाकांक्षी

(लेखक वसीम अकरम त्यागी मुस्लिम टूडे मैग्जीन के सहसंपादक हैं)

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