अमेरिका की नई पॉलिसी : दो लाख भारतीय छात्रों को होगी परेशानी

Ashraf Ali Bastavi

नई दिल्ली.  अमेरिकी कॉलेजों में अब भारतीय छात्रों को पढ़ाई करने में दिक्कत आ सकती है। हाल ही में अमेरिकी प्रशासन के यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विस (यूएससीआईएस) विभाग ने स्टूटेंड स्टेटस से संबंधी नियम और कड़े कर दिए हैं। जिस कारण वहां पढ़ रहे करीब दो लाख भारतीय छात्रों को दिक्कत हो सकती है। अमित कुमार निरंजन की रिपोर्ट :

दरअसल, नए प्रावधानों के मुताबिक किसी छात्र का ‘स्टूडेंट स्टेटस’ किसी भी वजह से हटता है तो अमेरिका में उनका रहना गैरकानूनी माना जाएगा। उसके अवैध प्रवास के दिनों की गिनती उसी समय से शुरू हो जाएगी। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि वहां तीन हजार भारतीय छात्र ओवर स्टे हैं। यानी इनकी वापसी करीब-करीब तय है। ऐसा अमेरिकी रिपोर्ट से पता चलता है। अमेरिकी प्रशासन की होमलैंड सिक्यूरिटी विभाग (डीएचएस) की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में कुल 7 लाख 39 हजार 478 (1.47%) लोग अमेरिका में जरूरत से ज्यादा रुके (ओवर स्टे) हुए हैं। इनमें से करीब 35 हजार (पांच प्रतिशत) विदेशी छात्र हैं।

जरूरी औपचारिकता पूरी न करने पर कार्यवाही होगी:  रिपोर्ट के मुताबिक 98 हजार 970 भारतीय छात्र अपनी डिग्री पूरी करने के बाद वापस भारत लौट गए हैं। लेकिन करीब तीन प्रतिशत यानी तीन हजार 14 छात्र अमेरिका में ओवर स्टे हैं। इन्हें अमेरिका की कानूनी भाषा में सस्पेक्ट कहा जाता है। अगर इन्होंने जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं की तो करवाई होगी। अमेरिकी कानून के मुताबिक ओवर स्टे उन्हें माना जाता है जो पढ़ने के लिए एफ, एम, और जे वीजा टाइप के साथ अमेरिका में आ गए लेकिन पढ़ाई पूरी होने या बीच में पढ़ाई रुकने या पूरी ना कर पाने के बाद तय समय में वापस नहीं लौटते हैं।

9 अगस्त से स्टूडेंट से संबंधित वीजा गाइडलाइन जारी:  गौरतलब है कि यू एस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विस (यूएससीआईएस) ने स्टूटेंड स्टेटस से संबंधित वीजा गाइडलाइन जारी करने के पहले 10 मई 2018 को मेमोरेंडम जारी किया था। इसके बाद यह नौ अगस्त 2018 को पूरे अमेरिका में लागू हो गया। अमेरिका की शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक देश में कुल 10 लाख विदेशी छात्र शिक्षा ले रहे हैं। अमेरिका में उच्च शिक्षा लेने वाले छात्रों में कुल पांच प्रतिशत उच्च शिक्षा में विदेशी छात्र हैं। अमेरिका के सिराक्यूज़ विश्वविद्यालय में छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि इस तरह के नियम पहले से थे। इस बार अमेरिकी प्रशासन गैर कानूनी तरीकों से रह रहे छात्रों को वापस भेज (डिपोर्ट) सकता है। वापस भेजने के लिए इस नियम को सख्ती से लागू करने का प्रावधान किया है। राजेश बताते हैं कि अगर आपके पास कानूनी तौर पर रुकने और रहने के लिए पेपर हैं तो छात्र संबंधी वीजा को लेकर अमेरिका में तब तक कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन कई बार अनभिज्ञता, लापरवाही, या असावधानी की वजह से छात्र कागज-पत्र, जैसे कि वीजा, खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रहते हैं। उन्हें दिक्कत तब होती है जब वे अमेरिका से बाहर कोई रिसर्च पेपर प्रेजेंट करने या अपने घर भारत चले जाते हैं। और जब आप अमेरिका में लौंटेंगे तब आपकी गलती पकड़ में आती थी। इसी चीज को सुधारने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने बहु-स्तरीय निगरानी शुरू कर दी है।

भारतीय विदेश मंत्रालय की अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं: 9 अगस्त को नियम लागू होने के बाद इस मामले में विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार और मंत्रालय में अमेरिकी डिविजन में कार्यरत संयुक्त सचिव गौरंग से प्रतिक्रिया लेनी की कोशिश की गई। उनसे पूछा था कि इस मामले में भारत सरकार क्या कदम उठाने वाली है और क्या भारत सरकार ने इस बारे में अमेरिकी प्रशासन के सामने कोई शिकायत दर्ज करवाई है। खबर लिखे जाने तक उनकी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

क्या है फाइनल पॉलिसी गाइडलाइन: अमेरिकी सरकार ने दूसरे देशों से आए हुए छात्रों के लिए फाइनल पॉलिसी गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके मुताबिक उनके अमेरिका में रहने की समय-सीमा खत्म न हुई हो तो भी वे अवैध प्रवास के दोषी माने जा सकते हैं। अब तक लागू व्यवस्था के मुताबिक उन्हें अवैध तब माना जाता था जब उल्लंघन साबित होता था, या इमीग्रेशन जज ऐसा आदेश पारित करता था। यह गिनती इस लिहाज से अहम है कि अगर किसी व्यक्ति की 180 दिनों की अवैध मौजूदगी दर्ज हो जाती है तो अमेरिका में उसके दोबारा प्रवेश पर तीन से दस साल तक का बैन लग जाता है।

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