मैंने हिन्दुत्व की रक्षा के लिए गाँधी का वध किया

हम सभी देशवासियों को मिलकर नाथूराम के ‘हिन्दुत्व’ से देश की रक्षा का प्रण लेना होगा

एशिया टाइम्स

नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की हत्या के बाद अपने ऊपर चलाए जा रहे मुक़दमें के दौरान कहा था कि मैंने हिन्दुत्व की रक्षा के लिए गाँधी का वध किया।

मैं एक छात्र होने के नाते आज तक ये समझने का प्रयास कर रहा हूँ कि आख़िर वो कैसा ‘हिन्दुत्व’ था जिसके लिए एक महापुरुष की हत्या की गयी। क्योंकि मैं हिन्दू धर्म, आस्था, विश्वाष और दर्शन से अवगत हूँ, चाहे वो हिन्दू दर्शन स्वामी विवेकानन्द के द्वारा परिभाषित किया गया हो या फिर एस० राधा क्रिशनन द्वारा।

मुझे कहीं भी वो हिन्दुत्व नहीं मिला जिसकी रक्षा के लिए किसी महापुरुष को मारना जाएज़ ठहराया गया हो। मैं हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र में रहता हूँ, मेरे ज़्यादातर दोस्त हिन्दू ही हैं, मैं उनके ही बीच बड़ा हुआ हूँ, मेरे घर वालों का हिन्दू परिवारों से बहुत घनिष्ठ सम्बंध है, यहाँ तक कि उनसे गले मिले बग़ैर हमारी ईद पूरी नहीं होती।

बड़े धार्मिक और मृदभाषी लोग हैं इसलिए मैंने हिन्दू धर्म को और उसके मानने वालों को वैसा ही समझा है जैसा कि उन्हें देखा है।

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मगर वो ‘हिन्दुत्व’ कैसा है जिसकी रक्षा के लिए गाँधी को मारा गया? क्या उस ‘हिन्दुत्व’ का अंश आज भी हमारे समाज में पाया जाता है? क्या नाथूराम का हिन्दुत्व आज भी ज़िंदा है? अगर हाँ तो इस बात में कोई संदेह नहीं कि और न जाने कितने महापुरुषों का जीवन ख़तरे में है।

हम सभी देशवासियों को मिलकर नाथूराम के ‘हिन्दुत्व’ से देश की रक्षा का प्रण लेना होगा ताकि अभी या आने वाले समय में कोई महापुरुष नाथूराम के संकीर्ण हिंदुत्व की विचारधारा से महफ़ूज़ रहे।

(ये लेखक के निज़ी विचार हैं)

मसिहुज़मा अंसारी

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