गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी कब तक?

तारिक हुसैन रिज़वी

Ashraf Ali Bastavi

पिछले सप्ताह लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने देश में बढ़ते माॅब लिंचिंग मामले की कड़ी निंदा की थी और राज्य सरकारों से ऐसी घटनाओं के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने को कहा था। प्रधानमंत्री के कहने का कितना प्रभाव पड़ा इसका अंदाज़ा पिछले दिनों राजस्थान के अलवर में माॅब लिंचिंग की घटना से लगाया जा सकता है। अलवर में भीड़ ने अकबर ख़ान उर्फ़ रकबर खान (28 वर्शीय) की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

अकबर ख़ान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मानें तो उसकी अधिक पिटाई से मौत हुई है। उसके शरीर में 12 जगह चोट के निशान मिले हैं। अधिक पिटाई के चलते अंदरूनी खून बहने से मौत हुई है।

अकबर ख़ान की मौत के लिए वहाँ की पुलिस भी ज़िम्मेदार है।राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सामने आए सबूतों से मालूम होता है की यह पुलिस हिरासत में मौत हुई।

उन्होंने घटना स्थल का मुआयना करने के बाद न्यायिक जाँच के भी आदेश दिए। पुलिस अगर अकबर को समय पर अस्पताल ले जाती तो उसकी (अकबर ख़ान) की जान बच सकती थी।

इस मामले में पुलिस की लापरवाही बड़े पैमाने पर दिख रही है। कुछ पुलिस कर्मी को सस्पेंड कर देने से इस प्रकार की समस्या कम नहीं होंगी।
संविधान के आर्टिकल 21के तहत जो ‘जीवन का अधिकार’ दिया गया है वो किसी पशु के लिए नहीं है। बल्कि मनुश्य के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि माॅब लिंचिंग की मामलों में सजा देने से संबंधित कानून बनाए। क्या वर्तमान कानून के तहत ऐसे मामलों में सज़ा नहीं दी जा सकती?

भारतीय दंड संहिता में माॅब लिंचिग की परिभाशा नहीं दी गई है, परन्तु इसके बावजूद कानून की धारा 302, 304, और 153 है। जिसके तहत ऐसे मामलों से निपटा जा सकता है। माॅब लिंचिंग के मामले अधिक उन्हीं राज्यों में है जहाँ भाजपा की सरकारें हैं।

बहुत दुःख की बात है कि माॅब लिंचिंग के मामलों में जिनको सज़ा मिली है उनका भाजपा नेता समर्थन दे रहे हैं एवं सम्मान कर रहे हैं। जिसका उदाहरण जयंत सिन्हा हैं। ज्ञात रहे की 30 जून 2017 को झारखंड राज्य के रामगढ़ जिला में 55 वर्शीय निर्दोश स्वर्गीय अलीमुद्दीन अंसारी की निर्गम हत्या माॅब लिंचिंग के द्वारा तथाकथित गौरक्षों ने कर दी थी।

पुलिस और प्रशासन ने मामले को काफी गंभीरता से लिया। फास्ट ट्रैक में मामला चला तथा 9 महीने में मार्च 2018 में सभी अभियुक्तों को हत्या का दोशी माना गया। माननीय न्यायालय ने उन सभी 11 को उम्र कै़द की सज़ा सुनाई। अभी कुछ दिन कबल माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने उन्हें बेल दे दी।

उसके बाद केंद्र में मंत्री तथा भाजपा नेता जयंत सिन्हा ने हज़ारीबाग़ स्थित अपने निवास पर 8 दोशियों को माला पहनाकर उनका स्वागत किया। भाजपा अपने मंत्री द्वारा क्या संदेश देना चाह रही है?आखि़र गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी कब तक चलेगी ?

यह स्तम्भ कार के अपने विचार हैं  स्तम्भकार  तारिक टाइम्स  हिंदी वीकली के चीफ एडिटर हैं , उन से tariquetimes@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है 

 

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