यकीं महकम,अमल पेहम, मुहब्बत फातेह आलम

मुहब्बत के फ़रिश्ते

एशिया टाइम्स

IRCG की तरफ से समी मे 35 मकानो के लोका्रपण के बाद उस गांव मे जाने का मोका मिला, कहते है यहां पोलिस जाने से डरती थी। पाटण जिल्ला के समी तालुका से 35 कि.मी. दुर छोटा रण मे इक गांव ,इसका नाम है पाटी। 100 मकानो की बसती,लकडी गाड़ कर बनाइ गई दिवारे,पलासटिक की पननि से बनाई हुई छत.बस यही उनका नशेमन.न पानी की योग्य वयवस्था। ना तालीम. ,ना पैसा। ना चाय की केटली, ना और किसी सामान की दुकान, 3 महीने खेत मजदूरी से पुरा साल गुजर बसर करने पर मजबुर. इस मजबुरी और बेरोजगारी ने कई लोगो को गलत रसते डाल दिया. बिहार बंगाल नही गुजरात का ही ये मोडल है।

धरपकड के डर, भोलेपन और जहालत की वजह से सरकारी ओफिसो से दूर। इसी कारण न डोकयुमेनट है न कीसी स्कीम से फायदा उठा पाते है।अन्दर के रास्ते भी कच्चे,होश सभालते ही बच्चे मजदुरी पर लगा दिये जाते है। नमाज के लिए मस्जिद गये तो चंद बच्चो के सिवा कोई नमाजी नही,.ये उनकी दिनियात का हाल।लोगो ने बताया आसपास के गांवो की भी एसी ही हालत है।
पाटी की कायापलट के होसले से इस गांव मे कदम रखा था।हमारी टीम की(खास तौर से अ.कादर मेमन,युसुफ भाई,जाफर भाई) कोशिशो से लगभग सभी लोगो के डोक्यूमेंट तैयार करवाये, सरकारी टोयलेट बनवाये, 10 मकानो की तामीर करवाई।दीनी, तालीमी, मआशी, दावती,बेदारी की बाते की.

मकान लोका्रपण और कमबल वितरण का काम भी किया। परिव्रतन की हवा महसूस हुई कायापलट भी जरुर होगी। उनकी मेहमान नवाजी और सादगी ने दिल जीत लिए।
शहरो की चकाचौंध ने हमे हकीकत से कितना दुर कर दिया है।लेकीन होसला बुल्नद है,
यकीं महकम,अमल पेहम, मुहब्बत फातेह आलम।

Shakeel Rajpoot (President, Jamaat e Islami Hind Gujarat)

 

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