मानसून सत्र आज से: तीन तलाक समेत 67 बिल पास कराने के लिए सरकार करेगी कोशिश

इस सत्र में सरकार के पास 198 घंटे , बजट सत्र के दौरान लोकसभा में सिर्फ 34.5 घंटे काम हुआ, 128 घंटे हंगामे की भेंट चढ़े

Ashraf Ali Bastavi

नई दिल्ली.  संसद के मानसून सत्र की शुरुआत आज से हो रही है। दोनों सदनों में 67 बिल अटके हैं। इनमें ट्रिपल तलाक, भगोड़ा कानून और मुस्लिम विवाह संरक्षण बिल सरकार के टॉप एजेंडा में हैं। 18 जुलाई से 10 अगस्त तक सत्र चलेगा। इनमें 6 दिन छुट्टी के हैं। सरकार के पास अहम बिल पास कराने के लिए 18 दिन, यानी 198 घंटे हैं।
उधर, मंगलवार को कांग्रेस के दफ्तर में विपक्षी दलों की बैठक हुई, जिसमें सरकार को घेरने की तैयारी की गई। इसमें अविश्वास प्रस्ताव पर 12 दलों ने सहमति भी जताई। मानसून सत्र के दौरान ही राज्यसभा में उप-सभापति का चुनाव होगा। पीजे कुरियन का कार्यकाल पूरा हो रहा है।

सरकार का एजेंडा : सरकार भगोड़ा आपराधिक अध्यादेश, वाणिज्यिक अदालत से जुड़ा अध्यादेश, आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश, होम्योपैथिक केन्द्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश, दिवालियापन और दिवाला संहिता (संशोधन) अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है। उधर, ट्रिपल तलाक विधेयक राज्यसभा में लंबित है। इसे पास कराना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। सोमवार को ही केंद्र सरकार इसके संकेत दे चुकी है।

विपक्ष की रणनीति : महिला आरक्षण, मॉब लिंचिंग, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत, एससी-एसटी एक्ट में बदलाव, अविश्वास प्रस्ताव और जम्मू-कश्मीर के हालात पर हंगामे के आसार हैं। उधर, महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सरकार के बीच सोमवार को ही सवाल-जवाब का दौर शुरू हो गया है।

18 साल में सबसे खराब रहा था इस साल का बजट सत्र : लोकसभा में कुल 23% और राज्यसभा में 28% कामकाज हुआ। लगातार हंगामे की वजह से दोनों सदनों के 250 घंटे बर्बाद हो गए। काम के लिहाज से यह सत्र 18 साल में सबसे खराब रहा। इसमें आंध्रप्रदेश के लिए विशेष राज्य के दर्जा की मांग, कावेरी जल विवाद, नीरव मोदी और एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मूर्तियां तोड़ने जैसे मुद्दों पर कांग्रेस, टीडीपी और एआईएडीएमके समेत विपक्षी पार्टियों ने हंगामा किया। इससे पहले 2000 में लोकसभा में प्रोडक्टिविटी 21% और राज्यसभा की 27% रही थी।

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