कानून की गर्दन पर मॉब-लिनचिंग का दबाव

इन गैर कानूनी असंवैधानिक हत्याओं के पीछे सिर्फ और सिर्फ एक हमारे जहरीली सोच यह होती है, कि हम होती मसलमान की हत्या कर के अपनी राजनीतिक रोटियाँ आसानी से सेक लेंगे

Asia Times Desk

” alt=”” aria-hidden=”true” />कानून मुल्जिम को अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका देता है। जुर्म साबित होने पर मुल्जिम ; मुजरिम बन जाता है, और कानून मुजरिम को सजा देता है। ‘मॉब लिनचिंग’ अंग्रेजी भाषा का शब्द है, मॉब का अर्थ ‘भीड़ और लिनचिंग का अर्थ असंवैधानिक रूप से की गई हत्या। यानी नाजायज सजाए मौत अर्थात जब किसी को दोषी मान कर उस पर मुकदमा ना चलाया जाए, उसे अपने निर्दोष होने का अवसर ना दिया जाए, बल्कि भीड़ जमा होकर कानून को हाथ में लेते हुए किसी की हत्या कर दे, तो वह असंवैधानिक हत्या मॉब लिनचिंग कहलाती है। हमारे देश में इस प्रकार की हत्याएं अक्सर होती रहती हैं। जात-पात के ताने बाने में उलझे दलित अक्सर इस के शिकार होते रहते हैं। आनर किलिंग के नाम पर प्रेमी जोडों को गांव की भीड़ मौत के घाट उतार दिया करती है।

जिस के सामने कानुन बे-बस और समाज मूक खडा तमाशा देखा करता है, क्योंकि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता, इसलिए हत्यारे गुमनाम होते हैं। और हत्यारों पर मुकदमा चलाने के लिए कानून को एक नाम दरकार होता है, सबूत की जरूरत होती है। मरने वाले के साथ सारे सबूत दफन हो जाते हैं। हत्यारी भीड़ होती है, जिस का कोई नाम नहीं होता। पिछले कुछ दिनों से मॉब लिनचिंग के द्वारा मुस्लिम समाज के उन गरीब बेसहारा लोगों की हत्याएं भी की जाने लगी हैं, जो धर्म से मुस्लिम हैं , आर्थिक स्थित मजबूत नहीं है, जिन की हत्या पर कानूनी लड़ाई लड़ने वाले कोई बाहुबली परिवार में नहीं है, वह मेहनत मजदूरी कर के अपना और परिवार का पेट पाल रहे हैं, और पीढ़ियों से उनके परिवार हिंदुओं के बीच में रह रहे हैं।

इन गैर कानूनी असंवैधानिक हत्याओं के पीछे सिर्फ और सिर्फ एक हमारे जहरीली सोच यह होती है, कि हम होती मसलमान की हत्या कर के अपनी राजनीतिक रोटियाँ आसानी से सेक लेंगे, होते पार्टी की नजर में हीरो बन जाएंगे, हिन्दू प्रेमी समाज हमें शरीर का दर्जा देगा, और घाट गरीब मुस्लिम की मौत के दिन को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

आजादी  के समय सत्ता के दो प्रबल दावेदार थे, कांग्रेस और जनसंघ। जिन सिद्धांतों पर हत्यारे चलकर कांग्रेस ने सत्ता पाई थी, उन पर सिद्धांतों के विपरीत सिद्धांत बना कर एक जनसंघ ने सत्ता हथियाने का सपना देखा जरूरत था।

उस में एक सिद्धांत था पाकिस्तानका विरोध: यह पाकिस्तान का विरोध , कालांतर में चल कर भारतीय मुसलमानों  के विरोध के रूप में उजागर हो गया। आज वह मुस्लिम विरोधी जहरीली सोच गांव गांव शहर शहर अपनी चरम सीमा , पर है। कभी गाय के व्यापार और हत्या  के नाम पर, कभी चोरी के नाम पर कभी  मंदिर निर्माण के नाम पर निहत्थे परिवार मुसलमानों की हत्याएँ की जा रही हैं। मीडिया इन खबरों को मॉब लिनचिंग , के नाम से परोस रहा है।

यह हत्याएँ भारत के मुसलमानों की हत्याएं नही अपितु भारतीय संविधान पर घातक हमले हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 सभी को जीवन जीने का अधिकार देता है। यहां तक कि आत्महत्या को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है। जिस देश में मस किलिंग की इजाजत भी आसानी से नहीं मिलती। उस देश में भीड़ अपनी अस्मिता की रक्षI, और धर्म की रक्षा के नाम पर लोगों की हत्या दिन दहाड़े खुले आम कर रही है। शुक्रवार को दिल्ली में जुमे की नमाज के बाद गैर सरकारी संस्था खादिम ने मॉब लिनचिंग का विरोध करते हुए सरकार से इस बाबत कड़े कानून बनाने की जबरदस्त तरीके से मांग रखी। संस्था ने कहा, भीड़ तंत्र को विफल करने के लिए पुलिस तत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसे विकट समय में संविधान की गरिमा को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है। इसके लिए दृढ़ राजनीतिक निर्णय ही समाजी पृष्ठभूमि पर कानून की गर्दन पर से मॉब लिनचिंग के दबाव को हटाने में सफल हो सकते हैं।

लेखक: तारिक़ हुसैन रिज़वी  साप्ताहिक तारिक़ टाइम्स के एडिटर हैं

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