लॉकडाउन से फैली अव्यवस्था को छिपाने के लिए गोदी मीडिया को मिल गया नया शिकार

अब मीडिया फुल फॉर्म में आ गया है, उसे अपना टारगेट मिल चुका है।

नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स ) अब मीडिया फुल फॉर्म में आ गया है, उसे अपना टारगेट मिल चुका है। संभावित शिकार को देख कर जैसे भेड़िये की आँखों मे जो चमक आ जाती है वही चमक कल शाम से न्यूज़ एंकर्स की आँखों में देखी जा रही है।

मीडिया में निज़ामुद्दीन दिल्ली में तबलीगी जमात के मरकज (धर्मशाला) में मिले 1000 देशी विदेशी मुस्लिमों को कोरोना के संदिग्ध रोगी बताया जा रहा है, कल शाम से ही मीडिया अपना नैरेटिव सेट करने में लगा है। सोशल मीडिया में फेसबुक हाट्सएप आदि पर मुस्लिम इलाकों के वीडियो खूब फैलाए जा रहे है ताकि कुछ ही दिनों बाद जो, लॉक डाउन से फैली अव्यवस्था से असंतोष उपज रहा है उसकी परिणीति जो हिंसा में होती स्पष्ट दिख रही है उसके संभावित आरोपी अभी से तय कर दिये जाए।


घर मे बैठे हुए आदमी के पास सूचना का कोई अन्य सोर्स नही है, वैसे भी उसकी बुद्धि को पहले हर लिया गया है। ऐसी स्थिति में उसे बरगलाना बहुत आसान है।

खेल जारी है। मुझे याद है कि कुछ दिनों पहले जब सबसे पहले कोरोना का हल्ला मचाया गया तो बार बार इटली का नाम लिया गया था, इटली का नाम क्यो इतना हाइलाइट किया गया समझना मुश्किल नही है। अब ये इस खेल का सेकण्ड राउंड है, इस बार मीडिया अपने टारगेट को छोड़ने वाला नही है। खेल वही पुराना है बस संदर्भ नए हैं।

कोरोना के इलाज में डॉक्टरों को आ रही समस्याओं, वेंटिलेटर की कमी, PPE किट की कमी, लॉक डाउन से पैदा देशव्यापी समस्याओं पर चल रही बहस का रुख मोड़ देने का रामबाण रूपी नुस्खा मिल चुका है। यह सरकार को भी बहुत रास आ रहा है। उसी के इशारे पर यह सब रचा गया है।

देश भर में स्थानीय प्रशासन विदेशी नागरिकों को चेक कर रहा है कल इसी सिलसिले में वह निजामुद्दीन भी पुहंच गया जहाँ उसे अनेक लोगो की तबियत खराब मिली। बात इतनी सी है उनकी ट्रैवल हिस्ट्री संदेहास्पद है वो जहाँ-जहाँ गए है वहाँ कोरोना से मौतें हुई है यह बात सच है लेकिन, इसे जिस तरह से पेश किया जा रहा है उससे यह निष्कर्ष निकाला जाएगा कि ये लोग देश भर में कोरोना फैलाने के जिम्मेदार है जो कि बिल्कुल गलत है। मीडिया के पास रॉ डाटा है वह खुद देख सकता है कि देश में आज अभी तक जितने कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं है उसमे कितने हिन्दू है कितने मुसलमान। लेकिन उसे सच्चाई नही बताना है बल्कि सच्चाई छुपा कर एक तरफा नैरेटिव सेट करना है।

मीडिया एक भयानक षणयंत्र रच रहा है कल को इस कारण बड़े पैमाने पर मोब लिंचीग हो सकती है वह जानता है फिर भी यह खेल खेल रहा है। सच कह रहा हूँ देश का जितना बड़ा दुश्मन ये बिका हुआ मीडिया है न, उतना बड़ा कोई नही है।

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