भारत के ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की कुंजी है स्थानीय भाषाओं में इंटरनेट

सभी के लिए इंटरनेट : अगले आधे अरब उपयोगकर्ताओं  तक पहुंच बनाने के लिए भारतीय भाषाओं की क्षमता का इस्तेमाल" विषय पर सिम्पोजियम

Asia Times Desk

नई दिल्ली, 18 नवंबर, 2019: इंटरनेट के माध्यम से भारतीय भाषाओं के संरक्षण, अगले आधे अरब यूजर्स के नई तकनीक के उपयोग पैटर्न को समझने और ‘डिजिटल भारत’ के लिए मार्ग प्रशस्त करने में इंडिक प्रकाशन के महत्व को लेकर देश भर के इंडस्ट्रियलिस्ट और विशेषज्ञों ने आज फिक्की  और  इंडियन लैंग्वेज इंटरनेट एलायंस ने गहन चर्चा की और ऐसी केस स्टडी के प्रजेंटेशन दिए, जो न सिर्फ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि अपने परिचालन के क्षेत्रों में व्यापक सामाजिक असर भी डाल रहे हैं, क्योंकि उनके उत्पाद और सेवाएं स्थानीय समुदायों की जरूरतों से गहराई से जुड़ी हैं।

फिक्की-इंडियन लैंग्वेज इंटरनेट एलायंस (FICCI-ILIA) एक उद्योग संबंधी गठबंधन है जो मजबूत भारतीय भाषा परितंत्र के विकास की दिशा में काम कर रहा है। इसी उद्देश्य के साथ FICCI-ILIA ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय, माय गवर्नमेंट और TDIL के सहयोग से आज यहां भारतीय भाषा तकनीक उद्योग के लिए अपने सालाना प्रमुख परिसंवाद – ‘भाषांतर 2019’ का आयोजन किया। इसके तहत शासकीय निकायों, तकनीकी कंपनियों, मीडिया व प्रकाशन गृहों, भाषा सेवा कंपनियों, शिक्षा जगत, वित्तीय सेक्टर, थिंक टैंक आदि सहित विभिन्न श्रेणियों से 250 से अधिक संस्थान एकजुट हुए। इन सभी ने डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में भारत के रूपांतरण को गति देने वाले एक समावेशी और बहुभाषी इंटरनेट की अत्यावश्यकता के संबंध में प्रचार के बारे में विचार-विमर्श किया। इस वर्ष के सम्मेलन का विषय था- “सभी के लिए इंटरनेट : अगले आधे अरब उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बनाने के लिए भारतीय भाषाओं की क्षमता का इस्तेमाल करना“।

भारत की लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण, अगले आधे अरब यूजर्स के नई तकनीक के उपयोग पैटर्न को समझने और ‘डिजिटल भारत’ के लिए मार्ग प्रशस्त करने में इंडिक प्रकाशन के महत्व को लेकर देश भर के उद्योग अग्रणियों और विशेषज्ञों ने गहन चर्चा की। खोजपरक और अपने क्षेत्र में अग्रणी संगठनों ने ऐसी केस स्टडी के प्रजेंटेशन दिए, जो न सिर्फ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि अपने परिचालन के क्षेत्रों में व्यापक सामाजिक असर भी डाल रहे हैं, क्योंकि उनके उत्पाद और सेवाएं स्थानीय समुदायों की जरूरतों से गहराई से जुड़ी हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भारतीय भाषाओं के प्रभाव के बारे में बोलते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव  अजय प्रकाश साहनी ने कहा, “भारतीय भाषा के उपयोक्‍ताओं में बेतहाशा वृद्धि हो रही है जोकि इंटरनेट के खजाने के माध्‍यम से भारतीय भाषा के कंटेंट का इस्‍तेमाल अपनी सुविधानुसार करने के लिए उत्‍सुक हैं। इंटरनेट पर इंडिक कंटेंट उपयोक्‍ताओं की बढ़ती संख्‍या को सहयोग करने के लिए उस अनुपात से नहीं बढ़ा है। ज्‍यादातर भारतीयों  के पास अपनी संबंधित भाषाओं में इंटरनेट पर उपयोगी कंटेंट तक पहुंच का अवसर नहीं है। इस तरह के अंतर से न सिर्फ अर्थव्‍यवस्‍था के भारी अवसर हैं बल्कि भारतऔर शेष दुनिया के लिए नई खोजपरक तकनीकों का निर्माण करने के भी विशाल अवसर हैं। सामाजिक-आर्थिक लाभ काफी बड़े हैं और यह इकोसिस्‍टम के लिए पर्याप्‍त हैं ताकि वे पेशेवर एवं स्‍थायी उद्योग को बनाने में सहयोग एवं संचार का लाभ उठा सकें। हितधारकों को पता है कि साथ मिलकर वे उद्योग पर अकेले काम करने की तुलना में अधिक असर डाल सकते हैं। मैं FICCI-ILIA द्वारा उठाई गई पहलों का स्‍वागत करता हूं जोकि देशभर के प्रमुख हितधारकों को एकसाथ लेकर आई है। ये सभी साथ मिलकर एक मजबूत इंडिक इकोसिस्‍टम बनाएंगे जोकि इंडिक में पेश की जाने वाली अधिक इंटरनेट सेवायें मुहैया करायेगा और वासतव में भारत के डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा।”

गृह मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा विभाग में सचिव,  अनुराधा मित्रा ने भी परिसंवाद के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “यह देखकर अच्‍छा लग रहा है कि FICCI और MeitY ने सभी भारतीयों के लिए ऑनलाइन कंटेंट एवं जानकारी उपलब्‍ध कराने की तात्‍कालिक जरूरत को संबोधित करने के लिए पहलों को शुरू किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना महत्‍वपूर्ण है कि सूचना एवं संचार उपकरणों पर इस्‍तेमाल की जाने वाली सभी 22 आधिकारिक भाषाओं का उपयोग करने के लिए आधुनिक तकनीक की सेवा का लाभ उठाया जा रहा है। भारत में देश के अलग-अलग हिस्‍सों में बोली और लिखी जाने वाली भाषाओं के लिहाज से काफी विविधता है। यह भारत को दुनिया में अनूठा देश बनाता है।मैं FICCI-ILIA को पेशेवर एवं स्‍थायी भाषा उद्योग का निर्माण करने के लिए भाषांतर का आयोजन करने के लिए बधाईयां देती हूं। एक मजबूत एवं बहुभाषाई इंडिक इंटरनेट से भारत में लगभग आधे अरब लोग इंटरनेट का प्रभावी ढंग से इस्‍तेमाल करने में सक्षम होंगे।”

फिक्की के वार्षिक राष्ट्रीय परिसंवाद के बारे में डॉ. अजय दाता, सहअध्यक्ष, ICT और डिजिटल इकोनॉमी कमेटी, फिक्की ने कहा, सभी के लिए इंटरनेट के डिजिटल इंडिया मिशन को पूरा करने के लिए इंटरनेट पर देशी भाषा सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने और गांवों ग्रामीण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी समाधान की प्रयोज्यता बेहतर बनाने की आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य सामग्री रचनाकारों, सामग्री की उपलब्धता मुमकिन बनाने वालों, विज्ञापन करने वालों और भारतीय परितंत्र के अन्य हितधारकों के विकास की अगली लहर को बढ़ावा देने और भारत में निहित 1 ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता को साकार करने की राह सुगम बनाने के लिए सरकारों केडिजिटल इंडियाविजन के समर्थन  के अपने प्रयासों का निरंतर विस्तार करना है।

FICCI-ILIA के सीनियर मेंबर श्री संदीप नुलकर ने उद्घाटन सत्र में सभी को धन्‍यवाद दिया और भाषांतर के सभी भागीदारों की प्रशंसा की जिन्‍होंने इस पहल को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

FICCI-ILIA ने ‘भाषा अनुवाद प्रतियोगिता’ के विजेताओं की भी घोषणा की। प्रतिभागियों को अंग्रेजी से हिंदी, मराठी, गुजराती, तमिल और बांग्ला जैसी पांच भारतीय भाषाओं में 1,000 शब्दों के लेखों का अनुवाद करने के लिए कहा गया था। जन-सहयोग के तरीके से भारतीय भाषाओं की सामग्री के विकास और विस्तार के उद्देश्य के साथ ‘भाषा अनुवाद’ में 400 से ज्यादा भाषा विशेषज्ञों ने सहभागिता की। यह अनूदित भाषायी डाटा सेट सभी हितधारकों के लिए एक ओपन रिसोर्स के रूप में उपलब्ध होगा, ताकि भारतीय परितंत्र पर आधारित और उसके लिए अधिक मूल्यवान उत्पाद निर्मित किए जा सकें। भाषा अनुवाद के विजेताओं को श्री अजय प्रकाश साहनी, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और सुश्री अनुराधा मित्रा, सचिव, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने पुरस्कृत किया।

FICCI-ILIA के बारे में

फिक्की-इंडियन लैंग्वेजेस इंटरनेट एलायंस (FICCI-ILIA) एक उद्योग संबंधी गठबंधन है जो इंटरनेट पर क्षेत्रीय भाषाओं की सामग्री की व्यापक सुलभता को मुमकिन बनाकर देश में इंटरनेट अपनाए जाने को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। इसके अलावा वह सामग्री निर्माताओं, सामग्री सुलभ कराने वालों, विज्ञापन करने वालों और भारतीय परितंत्र के अन्य हितधारकों के विकास के अगले चरण को प्रेरित करके ज्ञान की उपलब्धता में विसंगति दूर करने में जुटा है। अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें www.ficci-ilia.in

फिक्की (FICCI) के बारे में

फिक्की भारत के व्यापार और उद्योग जगत का स्वर है। 1927 में स्थापित, यह भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा शीर्ष कारोबारी संगठन है। यह भारतीय निजी और सार्वजनिक कॉर्पोरेट सेक्टर्स और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अपने सदस्यों के लिए काम करता है। इसे विभिन्न राज्यों के विविधतापूर्ण क्षेत्रीय वाणिज्य और उद्योग प्रकोष्ठों से अपनी ताकत मिलती है और इसकी पहुंच 2,50,000 से अधिक कंपनियों तक है।

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