छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण बचाया जा सकता है

लालबिहारी लाल

Asia Times Desk

 इस संसार में कई ग्रह एवं उपग्रह हैं पर पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवनएवं जीव पाये जाते हैं। धरती कभी आग का गोला थाजलवायु ने इसेरहने लायक बनाया और प्रकृति ने मुनष्यों सहित समस्त जीवोंपेड़-पौधों का क्रमिक विकास किया। प्रकृति और जीवएक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति सत्य है बिना प्रकृति के न तो जीवन उत्पन्न हो सकताहै और न ही जीव। इसीलिए प्रकृति मनुष्य को पर्यावरण संरक्षण की सीख देता है। हमाराशरीर प्रकृति के पांच तत्वों से मिलकर बना है-क्षितिजजलपावकगगनसमीरा। पंचतत्व यह अधम शरीरा। इन पंच तत्त्वों के उचित अनुपात से ही चेतना (जीवन) उत्पन्नहोती है। धरतीआकाशहवाआगऔर पानी इसीके संतुलित अनुपात से ही धरती पर जीवन और पर्यावरण निर्मित हुआ हैजो जीवन के मूल तत्व हैं।

आज बढती हुई आबादी के दंश से पर्यावरण कासंतुलन तेजी सेबिगड रहा है। और प्रकृति कूपित हो रही है।प्रकृति के किसी भी एक तत्व का संतुलन बिगड़ता हैतो इसकाप्रभाव हमारे जीवन के ऊपर पड़ता है-मसलन- बाढ़,भूस्खलनभूकंपज्वालामुखीउद्गार,सुमामी जैसी दैवीयआपदा सामने आती हैं। इस को ध्यान में रखकरसन 1972में पर्यावरण के प्रति अमेरिका मे जून को चर्चा हुई औऱ तब से लेकर अब तक हर साल जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रुप में मनाते है।सन 1992 में 174 देशो केप्रतिनिधियों ने पर्यावरण के प्रति चिंता ब्यक्त करते हुए इसके समाधान के लिएब्राजील के शहर रियों दी जनेरियो में पहला पृथ्वी सम्मेलन के तहत एक साथ बैठे।कलान्तर में सन 2002 में दक्षिणी अफ्रीकी शहर जोहान्सवर्ग में दूसरापृथ्वी सम्मेलन हुआ। जिसमें चर्चा हुई कि पर्यावरण बचाने की दिम्मेदारी सभीराष्ट्रों की है पर ज्यादा खर्चा धनी देश करेंगे। पर पिछले 20 साल के सफर में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।समाजएवं सरकारी स्तर पर देश दुनिया में काफी प्रयास हो रहे है। परन्तुयह प्रयास तभी कारगर हो सकती है जब हर जनइसके लिए आगे आये।इसके लिए समाज में जागरुकता की कमी को दूरकरना होगा तभी इसकेसकारात्मक फल मिल सकता है। हम और आपछोटे-छोटे प्रयास कर के इस बिगड़ते हुये पर्यावरण को ठीक कर सकते है। मसलन पानी कीबर्बादी को रोकना,इसके लिए गाड़ी को सीधे नलके के बजायेबाल्टी में पानी भरकर गाड़ी को धोना,अपने घर मेंहो रहे पानी के लिकेज को रोकना गांव- मुहल्लों में बिना टोटी के बहते हुए पानी कोरोकना इसके लिए पडोसी को भी जागरुक करना। ब्यक्तिगत वाहन के बजाये सार्वजनिक वाहनका उपयोग करना या फिर कार आदि को पूल करना।अपने घरों में छोटे-छोटे पौधे को गमलेमें उगाना। कागज के दोनों ओर लिखना। पुरानी किताबों को रद्दी बेंचने के बजाये किसीविद्याथी या पुस्तकालय को दान दे देना,घरो में अवश्यक रुप से बिजली के उपकरणों कोचलाये रखने के बजाये उपयोग के बाद बंद कर दे। आदी जैसे बहुत से छोटे-छोटो उपाय हैजिसे अपनाकर पर्यावरण का ख्याल रख के ही विभिनन् जल स्त्रोतों को बचाया जा सकता है। वनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। प्राकृतिक उर्जा स्त्रोतों का उपयोग किया जासकता है। इस कार्य से पर्यावरण संरक्षण मैं अपनी भूमिका को साबित कर सकते है और इसपृथ्वी को आने वाले पीढी के लिए सुरक्षित बना सकते हैं।


पर्यवारण के घटक वायु प्रदूषण के कारण दिल्लीसरकार ने दिल्ली में दो वार ओड इभेन का फार्मूला अपना चुकी है पर पहली की तुलनामें दूसरी कामयाब नही हो सकी।केन्द्र सरकार भी कई योजने बनाई है पर सही सेकर्यान्वयन की कमी से इसका सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा है। आम जन-जन को जागरुककरना कारगर सिद्ध हो सकता है।

अगर अब भी पर्यावरण के प्रति सचेत नही हुए तोबढ़ती हुई आबादी की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वन काटना होगा। जिससे प्रदूषण काअसर औऱ बढ़ेगा।ग्लोबल वार्मिग होनगा जिससे वातावरण का ताप बढ़ेगा अंततः ग्लेशियरपिघलेंगे औऱ समुंद्र का जलस्तर बढ़ेगा औऱ पृथ्वी एक दिन जल में समा जायेगी।

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