कहाँ गुम हो गया वो शास्त्री का नारा “जय जवान जय किसान”

महाराष्ट्र के किसानों ने सरकार की गलत नीतियों से तंग आ कर आखिरकार जन आन्दोलन शुरू कर दिया है|

एशिया टाइम्स

जन आन्दोलन: जब देश का अन्न दाता किसान ही भूखा मरने लगे और आतमहत्या पर मजबूर हो जाये तो समझ लेना चाहये देश में इन्कलाब की चिंगारी बहुत जल्द सुलगने वाली है| हमारे देश के हालात भी इस वक़्त कुछ ऐसे हैं| देश का किसान जो पुरे मुल्क का पेट भरता है वो सरकार की गलत नीतियों की वजह से भूखा मर रहा है| हालत यहाँ तक पहुँच गये हैं कि किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पर रहा है|

कर्जे में डूबा किसान नीरव मोदी तो है नहीं के पैसे ले और देश से रफ्फु चक्कर हो ले| वो बेचारा इसी देश में बैंक वालों और शाहुकारों से जलील होते होते एक दिन खुद को ही खत्म (आत्महत्या) कर लेता है|

ऐसे भयानक हालत में किसान सब कुछ छोड़ छाड़ के जन आन्दोलन न करे तो क्या करे? महाराष्ट्र के किसानों ने सरकार की गलत नीतियों से तंग आ कर आखिरकार जन आन्दोलन शुरू कर दिया है|

और तो और कमाल तो ये देखें कि सरकार के मंत्री कहते है कि ये किसान नक्सली है| अरे भईया जिनके पास खाने को एक दाना नहीं खुद एक वक़्त की रोटी के लिए सड़कों पर है वो आपको नक्सली नज़र  आते हैं|

तक़रीबन 50 हजार से भी ज्यादा किसानों ने पुरे महाराष्ट्र से इकठ्ठा हो कर इस बीजेपी सरकार के खिलाफ आन्दोलन शुरू कर दिया है| किसानों की हालत कितनी दयनीय है इसका अंदाजा इसी से होता है कि रैली में शामिल किसानों के पैरों से खून निकल रहा है वो लोग भूख से बिलख रहे है खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं है मगर फिर भी जुटे हुये है जन आन्दोलन में अपने हक के लिये|

आन्दोलन के अन्दर ही एक बूढी औरत ने तख्ती पकड़ रखी थी जिस पर लिखा था “हक चाहिए मेहरबानी नहीं”

हमारा प्यारा देश भारत किधर जा रहा है ये सोचने वाली बात है| जब अन्नदाता किसान खुद ही भूखे मरने की कगार पर है और अपने हक के लिए जन आन्दोलन कर रहा है तो हम कहाँ चाँद सूरज और विश्वशक्ति बनने के झूठे ख्वाबों में जी रहें है|

जरा इन बेचारे किसानों को जगह खुद को रख कर देखये अगर आँखों और दिल दोनों से आँसू न निकल गये तो हमारे इंसान होने पर ही लाहनत है|

पूरी विडियो देखने के लिये यहाँ क्लिक करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *