कासगंज हिंसा में पुलसिया करवाई एक तरफ़ा रही है: पूर्व आईजी एस आर दारापुरी

पुलिस ने हिंसा के 14 घंटे गुज़र जाने के बाद, 40 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की और उसके बाद एक तरफ़ा कार्यवाही करते हुए, विशेष समुदाय के लोगों की ही गिरफ़्तारी की गयी है।

एशिया टाइम्स

लखनऊ: पूर्व आईजी एस आर दारापुरी ने कासगंज हिंसा के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि, इस पुरे मामले में पुलिस ने न सिर्फ एक तरफ़ा कार्यवाही की है बल्कि कई मुद्दों भी सामने आये हैं जहाँ पुलिसिया कार्यवाही पर प्रश्न भी खड़े होते हैं।

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग टीम ने पिछले दिनों कासगंज में जा कर मौके पर लोगों से बातचीत की थी जिसके बाद उन्होंने आज लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में अपनी रिपोर्ट के कुछ अंश मीडिया के सामने रखे।

एस आर दारापुरी ने कहा कि पुलिस ने हिंसा के 14 घंटे गुज़र जाने के बाद, 40 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की और उसके बाद एक तरफ़ा कार्यवाही करते हुए, विशेष समुदाय के लोगों की ही गिरफ़्तारी की गयी है। इस मामले को अगर हिन्दू मुसलमान एंगल से न देखे तो काफी हद तक राजनितिक साज़िश समझ आएगी।

चंदन की हत्या में संदिग्ध आरोपी सलीम व अन्य लोगों की गिरफ्तारी पर बोलते हुए, पूर्व आईजी, एस आर दारापुरी ने कहा कि पुलिस ने पहले तो सलीम के घर का दरवाज़ा तोडा और फिर वहां से एक लाइसेंसी बन्दूक और एक ग़ैर लाइसेंसी देसी कट्टा बरामद करना बताया है। मेरे एक बात समझ नहीं आती के जिसके पास लाइसेंसी बन्दूक है वह आदमी कट्टा क्यों रखेगा। दूसरी चीज़ और भी लोग जिनको गिरफ्तार किया गया है उनके पास भी, कट्टा और कारतूस मिल रहा है, जब की उन लोगों को पता था की पुलिस उनको ढूंढ रही है वह यह सब अपने क्यों रखेंगे। ऐसे कई सारे सवाल हैं जिनके जवाब अभी मिलना बाकी है।

उन्होंने आरोप लगते हुए कहा कि मैंने भी पुलिस में 32 साल नौकरी की है और मुझे भी पता है की कैसे पुलिस कट्टे और कारतूस बरामद करती है। हमारे उपमुख्यमंत्री और डीजीपी कहते हैं की तिरंगा यात्रा निकलने के लिए परमिशन नहीं चाहिए होती है, अगर ऐसे है तो जो लोग अब्दुल हमीद चौक पर परमिशन लेकर गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम कर रहे थे, पुलिस को उनको सुरक्षा नहीं देनी चाहिए थी?

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य व पत्रकार अलीमुल्लाह खान ने कहा कि कासगंज का पूरा मामला सुनियोजित तरीके से करवाया गया था वरना तिरंगा यात्रा में हथयार लाने की क्या ज़रुरत थी, जो हाल ही में आये वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा है। यही नहीं जो लोग इसको साम्प्रदायिक हिंसा कह रहे हैं, उनको यह जान लेना चाहिए के अब्दुल हमीद चौक पर हिन्दू मुस्लिम मिलकर गणतंत्र दिवस मानाने जा रहे थे और तिरंगा यात्रा के नाम पर बवाल कर रहे लोगों को स्थानीय हिन्दू मुस्लिम लोगों ने ही रोका था। “जिनकी दुकाने जली हैं उन्होंने डर के मारे पुलिस में शिकायत नहीं लिखवाई थी, की कहीं पुलिस उनके खिलाफ ही कार्यवाही ना कर दे।”

जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, मोहित पांडेय ने कहा कि इस दंगे का पैटर्न पहले जैसे दंगो की तरह था, जहाँ बिना परमिशन एक यात्रा निकाल कर माहौल खराब किया जाता है और उसका ठीकरा दूसरे समुदाय पर फोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में मीडिया का रोल भी कुछ सही नहीं था खासकर स्थानीय मीडिया, जिन्होंने अफवाह को खबर बना दिया था। लेकिन किसी ने यह सवाल नहीं उठाये की तिरंगा यात्रा निकाल रहे लोगों के पास हथियार क्या कर रहे थे।

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ने सूबे की योगी सरकार से मांग की है की कासगंज हिंसा की न्यायिक जाँच होनी चाहिए और साथ ही दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष हो कर कार्यवाही की जाए।

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