झूठी है सलमान नदवी के इत्तेहाद की बातें

मसीहुज़्ज़मा अंसारी

एशिया टाइम्स

जनता दरबार:- ऐसे मेँ जबकि कुछ ही दिनों मेँ बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है मुल्क मेँ अचानक हिन्दू-मुस्लिम इत्तेहाद के आइकॉन बन कर उभरे जनाब सलमान नदवी साहब से कोई ये पूछे कि आप अब तक इत्तेहाद पर ख़मोश क्यों थे? अब तक आप ने इत्तेहाद पर कोई ठोस काम क्यों नहीं किया? क्या इस से पहले हिन्दू-मुस्लिम इत्तेहाद आप का अजेंडा नहीं था? क्या अब तक मेल-जोल के पक्षधर नहीं थे आप?

आप कि तक़रीरों मेँ हज़ारों का मजमा होता है, मुसलमान आप को दिलो जान से मानते हैं, इतना ज़्यादा कि आप के झूठे आंसुओं पर भी आँखें बंद कर के यक़ीन कर लेते हैं। अगर आप पिछले दशक मेँ इसी मुद्दे पर काम करते तो शायद हिन्दू-मुसलमानों के बीच कि दूरी कुछ कम होती, गलतफ़हमियाँ ख़तम होतीं, तल्खियों मेँ कमी आती, मुल्क को दंगों से निजात मिलती। मगर अफसोस आपने ऐसा नहीं किया।

भाषणों मेँ हिन्दू मुस्लिम इत्तेहाद की लफ़्फ़ाज़ी से निकल कर आप कभी किसी हिन्दू आबादी मेँ शांति और सौहार्द की अपील के लिए गए हैं? भाईचारे की अपील करने के लिए आप नदवा से निकलकर कभी पास की मंदिरों और मठों मेँ गए हैं? नदवा से 500 मीटर पर लखनऊ युनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर हनुमान मंदिर है जहाँ लखनऊ के अधिकांश हिन्दू आस्था के मानने वाले आते हैं, क्या उन भीड़ के आस्थावान लोगों से आप का मिलना हुआ है?

कभी राम मंदिर पर उनका पक्ष जान ने की कोशिश की है आप ने? मुझे हिन्दू भाइयों पर इतना यक़ीन है कि अगर आप भाईचारे कि बात को लेकर एक क़दम आगे बढ़ते तो वो दो क़दम बढ़कर आप का साथ देते। मगर आप ने कभी ऐसा नहीं किया। अपनी तक़रीरों मेँ मुसलमानों से सोना बेचकर लोहा ख़रीदने की अपील करके उन्हें हिन्दू आबादी से डराने का काम तो किया है मगर सौहार्द के लिए सिर्फ़ लफ़्फ़ाज़ी की है आप ने।

हिन्दू मुस्लिम तो छोड़ दीजिये, क्या कभी शिया सुन्नी इत्तेहाद पर बात की है आप ने? क्या शिया हज़रात के लिए आप के दिल मेँ जगह है? क्या शिया भाइयों को मुसलमान मानते हैं आप? क्या बाबरी मस्जिद के मसले के हल के लिए जिस तरह आप हिन्दू धर्मगुरुओं से मिले वैसे ही शिया सुन्नी इत्तेहाद के लिए कभी शिया धर्मगुरुओं से मिलने की कोशिश की आप ने?

क्या कभी सामने आकार एलान करेंगे कि शिया हज़रात को मुसलमान मानते हैं आप? हरगिज़ नहीं, आप ऐसा नहीं कह सकते क्यों कि आप शिया लोगों से मतभेद रखते हैं और हिन्दू-मुस्लिम इत्तेहाद का झूटा नाटक करते हैं। जिस इंसान के सही और गलत का दायरा इतना तंग और संकुचित हो वो इत्तेहाद का दावा कैसे कर सकता है?

झूठा है तुम्हारा दावा? और झूठा इंसान हमारा रहनुमा नहीं हो सकता। मुसलमानों के जज़्बात से खेलना बंद करिए जनाब, अब ये क़ौम आप के पीछे चलने वाली नहीं है। इंशाअल्लाह मदरसे के वो चंद तालिबे इल्म जो अब भी आप पर एतमाद किए बैठे हैं आप की असलियत से वाकिफ़ हो जाएंगे। और जल्द ही आप के जज़्बात से तामीर झूठ और फ़रेब का क़िला ध्वस्त हो जाएगा।

मसीहुज़्ज़मा अंसारी

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