चारा घोटाले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा

Awais Ahmad

रांची की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 20 साल पहले हुए चारा घोटाले के देवघर कोषागार मामले  में लालू प्रसाद को दोषी मानते हुए साढ़े तीन साल की सजा और पाँच लाख रूपये का जुर्माना लगाया। रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें आईपीसी के तहत धोखाधड़ी एवं आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण कानून के दो मामलों में 23 दिसंबर को दोषी ठहराया था। इन दोनों मामलों में उन्हें साढ़े तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इन दोनों मामलों में उन पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर और छह महीने की सजा काटनी होगी।

बता दें कि 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में चाईबासा ट्रेजरी से 37.5 करोड़ रुपये की अवैध निकासी में लालू को 30 सितंबर, 2013 को पांच साल की सजा सुनाई गई थी। लगभग ढाई महीने जेल में रहने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।

विशेष अदालत ने शुक्रवार को लालू समेत 11 दोषियों की सजा पर दोनों पक्षों की दलील सुनी थी, जबकि बाकी पांच दोषियों की सजा को लेकर शनिवार को बहस पूरी हुई। उसके बाद सभी को सजा सुनाई गई। इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र समेत छह लोगों को कोर्ट ने 23 दिसंबर को बरी कर दिया था।

चारा घोटाले में लालू प्रसाद पर आरोप है कि जांच के लिए उनके पास भेजी गई फाइल को पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अपने पास रोके रखा और जब यह घोटाला उजागर हो गया तो 2 फरवरी को जांच का आदेश दिया।

चारा घोटाले में  लालू प्रसाद के इलावा पूर्व सांसद आरके राणा, पूर्व आईएएस अधिकारी बेक जुलियस, महेश प्रसाद और फूलचंद सिंह, राज्य सरकार के अधिकारी कृष्ण कुमार और सुबीर भट्टाचार्य एवं सप्लायर/ट्रांसपोर्टर सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी को भी साढ़े तीन-तीन साल की सजा हुई है। साथ ही पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, सप्लायर/ट्रांसपोर्टर त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुनील गांधी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल और ज्याति कुमार झा को सात साल की सजा हुई है।

सज़ा के बाद लालू ने जेल से ही ट्वीट करते हाउ कहा कि बीजेपी की राह चलने की बजाय वो सामाजिक न्याय, सद्भाव और समानता के लिए खुशी से मरना पसंद करेंगे।

तीन जनवरी से मामले के दोषियों की सजा पर सुनवाई चल रही थी। लालू प्रसाद यादव के वकील ने शुक्रवार को लालू की खराब सेहत का हवाला देते हुए जज से न्यूनतम सजा की अपील की थी।  लालू प्रसाद ने अदालत से कहा कि हुजूर मैं बेगुनाह हूं। इस पर सीबीआई जज ने चारा घोटाला मामले में दोषी लालू यादव से कहा, ‘आपके नीचे खेल होता रहा, आप देखते रहे, आप मुख्यमंत्री थे, आपने कुछ नहीं किया। विधानसभा में भी हंगामा होता रहा आप खामोश रहे।’

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश जस्टिस शिवपाल सिंह केस की 2400 पेज की फाइल पर दस्तखत करने में चार पेन की स्याही खत्म कर चुके हैं।

बता दें देवघर ट्रेजरी से 1990 से 1994 के बीच 89.27 लाख रुपये की अवैध निकासी से संबंधित है। इस मामले में शुरू में सीबीआई ने 38 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें 11 की मौत हो चुकी है। तीन आरोपी सरकारी गवाह बन गए, जबकि दो ने फैसले से पहले ही अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। इस मामले में लालू प्रसाद के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत 22 अन्य लोग भी आरोपी थे।

अभी चारा घोटाले में लालू प्रसाद पर चार केस लंबित है जिनमें झारखंड में दुमका ट्रेजरी से 3.97 करोड़, चाईबासा ट्रेजरी से 36 करोड़, डोरंडा ट्रेजरी से 184 करोड़ रुपये और बिहार में भागलपुर ट्रेजरी से 45 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले लंबित हैं।

लालू यादव को 23 दिसंबर को चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद रांची की बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया था। रांची के बिरसा मुंडा में जेल भेजे गए लालू यादव जेल में नित्यकर्म व नास्ता करने के बाद रोज दरबार लगाते हैं। धूप में सजे लालू दरबार में लालू यादव अपने अनुभव शेयर करते हैं। लालू दरवार में उनके किस्से सुनने के लिए जेल में बंद कुछ आईएएस, जज और एक किन्नर भी शामिल होते हैं। लालू को भले जी चारा घोटाले में जेल हो गई हो मगर जले में लगने वाले उनके दरबार से यह बात तो साफ़ है लालू राजनितिक जीवन पर इन सज़ाओं का ज़्यादा असर नही पड़ेगा।

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