ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू, राष्ट्रपति रूहानी बोले-प्रतिबंध तोड़कर ईरान बेचेगा तेल

Ashraf Ali Bastavi

वाशिंगटन, प्रेट्र/रायटर। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 2015 के अंतरराष्ट्रीय समझौते से हटने के बाद अमेरिका ने सोमवार से तेहरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इनका उद्देश्य ईरान के मिसाइल व परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना और मध्य पूर्व में उसके प्रभाव को खत्म करना है। प्रतिबंधों के दायरे में ईरान का बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र आएगा। साथ ही ईरान से तेल आयात बंद नहीं करने वाले देशों पर पेनाल्टी भी लगाई जा सकेगी।

ईरान ने प्रतिबंधों को ‘आर्थिक युद्ध’ करार देते हुए तेल निर्यात जारी रखने का एलान किया है। वहीं, चीन ने कहा है कि वह ईरान से तेल का आयात जारी रखेगा। फिलहाल, अमेरिकी प्रतिबंधों के लागू होते ही तेल बाजार अलर्ट पर आ गया है। माना जा रहा है कि अगले कुछ हफ्ते बाजार की नजर ईरान के निर्यात और उत्पादन पर रहेगी।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूचिन ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि ईरानी शासन को तब तक वित्तीय अलगाव और आर्थिक गतिरोध का सामना करना पड़ेगा जब तक वह अपने अस्थिर रुख में बुनियादी बदलाव नहीं लाता। जवाब में ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि उनका देश गर्व के साथ अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करेगा क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा, ‘हम आर्थिक युद्ध के हालात में हैं और एक दादागिरी करने वाली ताकत का सामना कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अमेरिका के इतिहास में व्हाइट हाउस में कभी ऐसा व्यक्ति आया है जो कानून और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के इतना खिलाफ हो।’

रूहानी ने आगे कहा, ‘वे (अमेरिकी) लगातार संदेश भेज रहे हैं कि आइए और बैठकर बात कीजिए। लेकिन हम क्या बात करें? पहले आप उन वार्ताओं का सम्मान कीजिए जो हम पहले कर चुके हैं ताकि अगली वार्ता के लिए आधार तो हो।’ उन्होंने बताया कि सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए उनकी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान चार देशों ने उनके समक्ष मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया था।

उधर, चीन ने एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध किया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चनिंग ने प्रेस क्रांफ्रेंस में कहा, ‘हम मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन का सामान्य सहयोग (ईरान के साथ) कानूनी और वैध है और इसका सम्मान किया जाएगा।’

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान परिस्थितियों में हम सभी पक्षों से व्यापक दृष्टिकोण अपनाने, अपने कर्तव्यों को निभाने और इतिहास के सही पक्ष के साथ खड़े होने की उम्मीद करते हैं।’ बता दें कि ईरान के साथ 2015 के समझौते पर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और रूस के साथ चीन ने भी हस्ताक्षर किए थे।

भारत समेत आठ देशों को छूट

अमेरिका ने फिलहाल भारत, चीन, जापान, इटली, ग्रीस, दक्षिण कोरिया, ताइवान तथा तुर्की को ईरान से तेल खरीदते रहने की सुविधा प्रदान कर दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बताया कि 20 देशों ने ईरान से तेल आयात पहले ही घटा दिया है।

अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा करेंगे यूरोपीय देश
यूरोपीय यूनियन, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर खेद व्यक्त किया है। उनका कहना है कि वह ईरान के साथ वैध कारोबार कर रही अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा करेंगे।

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