मुसलमान गलती ये कर रहे हैं कि…..

Asia Times News Desk

मुसलमान गलती ये कर रहे हैं कि वो अपना लीडर बनाने के बजाए दूसरों के यहाँ अपना लीडर तलाश रहे हैं। 20% मुसलमान अपना लक्ष्य बनाने के बजाए दूसरों के लक्ष्य के पीछे भाग रहे हैं। मुसलमान इलेक्टोरल सीटों पर कब्जा जमाने के बजाए, चंद सीटों पर अपने लिये जगह की भीख मांग रहे हैं।

ये हक़ीक़त है कि आजादी के समय मुसलमान दलित वर्ग और पिछडो को नेतृत्व देने की पोजीशन में थे लेकिन आप चूक गए। उस समय मुसलमान अगर कमजोर समाज की शिक्षा और राजनीति को नेतृत्व देने के लिये आगे बढे होते, कम्युनिटी बेस्ड राजनीति करते हुए बहुजन समाज को जोड कर सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश करते, 3% ब्राह्मण वर्ग को अल्पसंख्यक बनाने और उनके “हिंदू” के फर्जी मिथक का तोड निकालने का प्रयास करते तो आज हालात बिलकुल मुख़्तलिफ़ होते।

ऐसे में कम्युनिटी के आधार पर आज आप बहुसंख्यक बन कर इस देश को लीड कर रहे होते। हो सकता है कि आज़ादी के तुरंत बाद बटवारे के ताज़ा ताज़ा घाव और विरोधी माहौल उस समय ऐसा करने में रुकावट बना हो लेकिन अब भी वक़्त है, आप अब भी कर सकते हैं।

बस आपको पहले चरण में अपनी कमज़ोर लीडरशिप को तस्लीम करके उसे बल देना होगा और फिर अगले चरण में अन्य कम्युनिटीज और उनके नेतृत्व से राजनीतिक और सामाजिक गठबंधन का मामला होगा मगर अन्य पार्टियां इतनी आसानी से आप के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करेंगी बल्कि इसके लिए भी मुसलमानो को लगातार उन्हें अपने वोटों से मायूस करके बताना होगा कि अब हमारे नेतृत्व से गठबंधन ही आप के लिए एकमात्र रास्ता बचा है।

 

इसके बाद के चरण में अन्य कम्युनिटीज को अपने से जोड़ते हुए संघियो (ब्राह्मणों) के “हिंदू” भ्रम को तोडना और खुद को अल्पसंख्यक भ्रम से बाहर निकालना होगा।

साभार : इमामुद्दीन अलीग के फेस  बुक पजे से 


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