47वें आईएचजीएफ-दिल्ली मेला स्प्रिंग2019 में विदेशीखरीदारों के स्वागत को तैयार इंडिया एक्सपो सेंटर ऐंड मार्ट

उम्रुल हसन

Asia Times Desk

 

ग्रेटर नोएडा (एशिया टाइम्स ) दुनिया का सबसे बड़ा हस्तशिल्प मेला, 47वें आईएचजीएफ- दिल्ली मेला स्प्रिंग 2019′, ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर ऐंड मार्ट में 18-22 फरवरी2019 तक आयोजित किया जा रहा है, जहां 110देशों के साथ-साथ देश के घरेलू खरीदार शिरकत करेंगे.

ईपीसीएच के अध्यक्ष श्री ओपी प्रह्लादका ने कहा, “पांच दिवसीय इस मेले में देशभर के लगभग3,200 भारतीय हस्तशिल्प निर्यातक अपने होम, लाइफस्टाइल, फैशन और टेक्सटाइल उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे.”

‘आईएचजीएफ- दिल्ली मेला स्प्रिंग 2019’ अपने तरह का अनूठा मेला है और इस संस्करण के लिए 14 उत्पाद वर्गों जैसे कि, हाउसवेयर, होम फर्निशिंग, फर्नीचर, गिफ्ट और डेकोरेटिव्स, लैंप और लाइटिंग, क्रिसमस व फेस्टिव डेकोर, फैशन जूलरी और एक्सेसरीज, स्पा और वेलनेस, कालीन और रग्स, बाथरूम एक्सेसरीज, बागवानी एक्सेसरीज, शिक्षा से जुड़े खिलौने और गेम्स, हाथ से बने कागज के उत्पाद और स्टेशनरी, चमड़े के बैग इत्यादि में ट्रेंड पर आधारित 300 से अधिक नए डिजाइनों के 2,000 से अधिक उत्पादों का व्यापक चयन किया गया है.मेला 1,90,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है.

ईपीसीएच के महानिदेशक श्री राकेश कुमार ने विस्तार से बताया, “इस मेले की खासियत यह है कि यहां प्रदर्शित उत्पादों में हाथ से बनाये गये उत्पादों का बोलबाला है और उन्हें बनाने में मशीन का इस्तेमाल सिर्फ इन्हें अंतिम रूप देने में किया गया है. हालांकि दुनिया के कई अन्य देशों में आयोजित मेलों में भी हाथ से तैयार उत्पादों का प्रदर्शन किया जाता है लेकिन यह भी तथ्य है कि चीन, ताइवान, कोरिया, इंडोनेशिया इत्यादि के उत्पाद मुख्य तौर पर मशीन से बनाए जाते हैंताकि उन्हें थोक में ऑर्डर मिल सके.उन्होंने कहा, “इसके विपरीत, भारत में अभी भी हाथ से तैयार किये गए उत्पादों का वर्चस्व है और यही कारण है कि भारत शिल्प कौशल, फिनिश और देखने में अनोखे उत्पाद पेश करता है, जो तैयार उत्पादों की कीमतें और बढ़ाता है.”

मेले के आगंतुकों में थोक व्यापारी, वितरक, चेन स्टोर, डिपार्टमेंटल स्टोर, रिटेलर्स, मेल ऑर्डर कंपनियां, ब्रांड के मालिक, बाइंग हाउसेज और डिजाइनर और ट्रेंड की भविष्यवाणी करने वालों समेत दुनिया भर के विदेशी खरीदार शामिल होते हैं.

अल्बानिया, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, अर्जेंटीना, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, कनाडा, चीन, डेनमार्क, फ्रांस, घाना, जर्मनी, ग्रीस, हॉलैंड, हांगकांग, इटली, इसराइल, ईरान, जापान, कोरिया, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, नाइजीरिया, नीदरलैंड, ओमान, फिलीपींस, पोलैंड, कतर, रोमानिया, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, स्लोवैकिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, टोगो, तुर्की, अमरीका, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और जिम्बाब्वे समेत 110 से अधिक देशों के विदेशी खरीदार इस मेले में आएंगे.

वो कंपनियां और डिपार्टमेंटल स्टोर्स जिन्होंने इस मेले में आने की पहले ही पुष्टि कर दी है, उनमें बेल्जियम की डेकोकैंडल, पोमैक्स, चेहोमा; ब्राजील की सनपैन; कनाडा की लिडिया कलेक्शन, कारवैन; फ्रांस की लोबेरोन, लैम्बर्ट, जीएमबीएच; जर्मनी की टॉप टेन; इसराइल की मार्टिनसेन एएस; नॉर्वे की लाइफस्टाइल होम कलेक्शन; नीदरलैंड की ग्लोबस; स्विटजरलैंड की ऑस्कर ऐंड क्लोथिल्ड; स्वीडन की स्टूडियो 19; दक्षिण अफ्रीका की लंदन ऑर्नामेंट्स, ग्राहम ऐंड ग्रीन, पार्लेन इंटरनैशनल, स्कार्थिंगवेल, एंथ्रोपोलोजी; ब्रिटेन की एक्सेंट डेकोर, एचएफबी, मैकेंजी टाइल्ड, मोएस होम, कलालो, रोस स्टोर्स, बर्टन+बर्टन, मिडवेस्ट सीबीके, फोरसाइड होम ऐंड गार्डेन, नेपा होम ऐंड गार्डेन, ब्रूस्टर होम फैशन, पेटिना, ए ऐंड बी होम, सियान डिजाइन्स, टूज कंपनी इंकॉर्पोरेशन डब्लूईसीए, रग्स, द इम्पोर्ट कलेक्शन इत्यादि शामिल हैं.

भारत के प्रमुख खुदरा/ऑनलाइन ब्रांड इस मेले में नियमित रूप से आते हैं. इस साल कई नई ऑनलाइन खुदरा कंपनियां जैसे ट्रेंड्सबी, निकोबार, जेमपोरिया, फैबएनरग्स, टॉमी हिलफिगर, स्लीपवेल ने भी मेले में आने के लिए रजिस्टर करवाया है. रेमंड्स, गोदरेज, फैबइंडिया, डीएलएफ ब्रांड, गुडअर्थ, आर्चिज वेस्टसाइड, पर्पल टर्टल, ओबेरॉय होटल्स, पेपरफ्राइ, पेटीएम और इंडिया बाजार तब से ही इस मेले में आ रहे हैं जब से ईपीसीएच ने बड़े खुदरा खरीदारों को मेले में अपनी जरूरतों को स्रोत करने के लिए आमंत्रित करना शुरू किया था.

श्री कुमार ने इसके बाद कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के शिल्प पर आधारित थीम पवेलियन इस मेले की नियमित विशेषता बन गई है. भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) शिल्प के मामले में भारत का सबसे धनी क्षेत्रों में से है. भारत के पूर्वोत्तर राज्य जैसे कि असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम और त्रिपुरा बेंत, बांस, लकड़ी, सिल्क, चिकनी मिट्टी (क्ले), प्राकृतिक रेशे (नैचुरल फाइबर) जैसे अपने प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के लिए जाने जाते हैं. ईपीसीएच के निरंतर प्रयासों के कारण पूर्वोत्तर के शिल्पों के निर्यात में वृद्धि देखी गई है. 2016-17 में जो निर्यात 1141.07 करोड़ रुपये था वो आंशिक वृद्धि के साथ अब 1145.74 करोड़ रुपये पर पहुंचा है.जम्मू-कश्मीर पर एक और थीम पवेलियन स्थापित किया जा रहा है.

श्री कुमार ने बताया कि प्लास्टिक उत्पादों की जगह लेते केले के रेशे, टिकाऊ इंडिगो शिल्प (सस्टेनेबल इंडिगो क्राफ्ट), सूखी लौकी से बने उत्पाद; हाथ से बने खादी के नए घरेलू कपड़े, नारियल के छिलकों के इस्तेमाल से पारंपरिक शिल्पों और सामानों को बनाने वाले विभिन्न युवा डिजाइनरों को बढ़ावा देने के लिए उनके नए डिजाइन उत्पादों पर आधारित एक डिजाइनर थीमभी मेले में स्थापित किया जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कई प्रासंगिक विषयों पर मेले के दौरान कई नॉलेज सेमिनार की योजना भी बनाई गई है.

इस साल ये नॉलेज सेमिनार ‘साइबर क्राइम से कैसे सुरक्षित रहे’, ‘भारत-ईरान के बीच व्यापार की संभावनाएं’, ‘ऑनलाइन व्यापार को नियंत्रित करने वाली चुनौतियां और नियामक नीतियां’, ‘अफ्रीकी बाजारों में निर्यात के अवसरों की संभावनाएं’, ‘ट्रेंड्स ऐंड फोरकास्ट्स’, ‘अमरीका के साथ अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए भारतीय निर्यातक एवं उत्पादक और क्या कर सकते हैं’, ‘लकड़ी के हस्तशिल्पों के लिए वैकल्पिक प्रजातियों की उपलब्धता’, ‘जोखिम का आंकलन और प्रबंधन’ और ‘वित्तीय विवाद एवं समाधान’ जैसे विषयों पर आधारित होंगे.मेले के दूसरे, तीसरे और चौथे दिन फैशन शो भी अन्य प्रमुख आकर्षणों में से होंगे.

ईपीसीएच अध्यक्ष श्री ओपी प्रह्लादका ने सूचित किया कि परिषद ने विज्ञापनों के जरिए अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं, ऑनलाइन वेबसाइट्स, आउट डोर मीडिया और विभिन्न अतरराष्ट्रीय मेलों में रोड शो के जरिये दुनिया भर में इस शो के व्यापक प्रचार का अभियान चलाया है.

ईपीसीएच के महानिदेशक श्री राकेश कुमार ने सूचित किया कि 2017-18 के दौरान हस्तशिल्प का निर्यात 23,029.36 करोड़ रुपये था. हालांकि, वर्तमान वित्त वर्ष में अप्रैल 2018 से जनवरी 2019 के 10 महीनों के दौरान 21,460.56 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है और इसमें बीते वर्ष की तुलना में 13.26% की वृद्धि हुई है.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *