मैं लड़कियों के हक़ की आवाज़ के लिए चुनाव लड़ रही हूं : ज़ैनब रहमान अध्यक्ष पद की प्रत्याशी अबदुल्लाह गर्ल्स कॉलेज

Awais Ahmad

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम अक्सर विवादों और सियासी गलियारों में गूंजता रहता है और  अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर जम कर सियासत भी होती है। लेकिन आज कल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सियासी माहौल छाया हुआ है चाय की दुकान से लेकर क्लास रूम तक छात्र संघ चुनाव को लेकर तैयारी जोरों पर है। चुनाव में छात्राओं की भागीदारी भी हो वह सिर्फ वोर्ट देते तक सीमित ने रह जाए इस लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अब्दुल्लाह गर्ल्स कॉलेज का छात्र संघ चुनाव भी अलग से होता है। जिसमे पूरी जिम्मेदारी सिर्फ लड़ियों की होती है। वोट देने से लेकर वोट मांगने तक का काम सिर्फ लड़कियों का होता है। अब्दुल्लाह गर्ल्स कॉलेज में अलग अलग पद के लिए छात्राएं चुनाव में खड़ी होती है और छात्राओं की आवाज़ को उठती है उनकी परेशानियों को उठती है और उनके हक की लड़ाई के लिए लड़ती है। “आई डोंट जस्ट स्पीक दा चेंज, आई मेक दा चेंज” नारे के साथ चुनावी मैदान में उतरी है और अब्दुल्लाह गर्ल्स कॉलेज की लड़कियों के सशक्तिकरण की बात करती है। और बहुत बेबाकी से छात्राओं को होने वाली दिक्कतों और परेशानियों को खत्म करने की बात करती है। हमने ज़ैनब रहमान से खास बात चीत की और जानने की कोशिश किया कि वो इस बार चुनाव में किन मुद्दों के साथ मैदान में उतरी है।

सबसे पहले ज़ैनब रहमान का छोटा से तार्रुफ़ आपसे कर देते है। जैनब रहमान का अलीगढ़ और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पुराना रिश्ता रहा है। इन्होंने प्राइमरी तालीम से लेकर ग्रेजुएशन तक कि पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ही पूरी कर रही है और अभी ज़ैनब रहमान बी ए साइकोलॉजी फाइनल इयर की छात्रा है। इनके पिता जी का नाम इहताशम उर रहमान है जो बुलंदशहर में सरकारी मुलाज़िम है।

सवाल : ज़ैनब आपका छात्रा संघ चुनाव में अहम मुद्दा क्या है ?

जैनब : देखिए भाई, हमारा सबसे बड़ा मुद्दा यह कि जिन छात्रों का इस साल अब्दुल्लाह गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन हुआ है उन सभी को हॉस्टल मिले, क्योंकि इस बार छात्राओं का एडमिशन ज़्यादा हुआ है तो होस्टल मिलने में दिक्कत आ रही है। मेरी पेहली कोशिश होगी कि सभी छात्रों को हॉस्टल मिले अगर ऐसा नही होता है तो Annexe बनवा के उनके हॉस्टल में रहने का बंदोबस्त किया जाएगा। हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की परेशानियों की सुनवाई, उनको छोटी छोटी जो परेशानियां हॉस्टल में होती है वह दूर हो, प्रोवेस्ट तक छात्राओं की ऐडही पहुँच हो। उनको अपनी परेशानियों को लेकर कभी होस्टल की हेड गर्ल तो कभी वॉर्डन के पास बार बार चक्कर ना काटना पड़े। हॉस्टल में मेस के कहने की भी प्रॉब्लम होती है तो उसको भी दूर करना हमरी प्राथमिकता होगी। छात्राओं को हॉस्टल की मेस में साफ और पोषण से भरा खाना मिले। छात्राओं की दूसरी सबसे बड़ी परेशानी हेल्थ सर्विस को लेकर होती है। अक्सर होता है कि एम्बुलेंस बहुत देर में मेडिकल या यूनिवर्सिटी के हेल्थ सेंटर ले जाती है। हम अगर प्रेजिडेंट बने तो छात्राओं की यह परेशानी भी जल्द दूर करने का काम करेंगे। जिससे उनको जल्द से जल्द सही उपचार मिल सके। हम एम्बुलेंस की संख्या भी बढ़ाएंगे हॉस्टल में कम से कम तीन एम्बुलेंस हो जो हर समय सेवा में रहे। हॉस्टल में साफ सफाई हो इसको भी ध्यान में रखा जाएगा और जो ज़रुरी कदम होगा वह मैं उठाऊंगी। NRSC  छात्राओं को कॉलेज आने के लिए जो बस है उनका तादात भी बढ़ाई जाए और उनके राउंड भी ज़्यादा करवाने की कोशिश होगी। कभी कभी सिर्फ एक बस चलती है तो उसकी जगह तीन बस चले इस पर भी जोर दिया जाएगा। कॉलेज में NRSC छात्रों के लिए कॉमन रूम बनवाया जाएगा जहां वह बैठ सके और अपनी पढ़ाई कर सके। जो भी बातें मैं आपसे कर रही हूं मैं वह हर काम कर के दिखाऊंगी अगर अब्दुल्लाह की बुलबुल  अगर इस बुलबुल को अपना लीडर बनने के काबिल समझती है या अगर मैं अब्दुल्लाह गर्ल्स यूनियन की अध्यक्ष बनती हूँ। तो जो भी मैंने कहा है उनको पूरा करूंगी।

सवाल : छात्रओं की इतनी परेशानियों की बात आप कर रही है। आप इनको कैसे पूरा करेंगी? क्या आप इनको सब मांगों को पूरा कर पाएंगी?

ज़ैनब : जैसा मैंने पेहले भी कहा कि मैं जो भी कह रही हूं उसको पूरा करूंगी। जहां तक इन सब मांगों की बात है तो मैं अपनी बहनों से वादा कर रही हूं। मैं उनके हक की आवाज़ को उठा रही हूं। क्योंकि अगर मैं चुनाव जीतती हूँ तो मैं ही उनकी आवाज़ बनूंगी और उनकी जो जायज़ मांग है उसको पूरा करूंगी। मुझको नही लगता कि इन सब मांगों में से कोई भी मांग जायज़ नही है। मैं आपके जरिये यह बात कह रही हूं कि अगर में चुनाव जीतती हूँ तो लड़कियों की हर जायज़ मांग को पूरा करूंगी भले ही मुझको भूख हड़ताल क्यों ना करनी पड़े।

सवाल : छात्राओं की आउटिंग को लेकर सवाल खड़ा होता रहा है, चाहे वह जामिया हो या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, हॉस्टल की लड़कियों की आउटिंग के मसले को आप किस तरह देखती हैं ?

ज़ैनब : जहां तक हॉस्टल की लड़कियों की आउटिंग का मसला है वोमेन्स कॉलेज में लड़कियों को रविवार को पूरा दिन और शुक्रवार को शाम में 3 बजे से 5 बजे तक बाहर  जाने को इजाज़त है और अगर किसी लड़की को बीच के किसी भी दिन कोई काम होता है तो उसको बाहर जाने की इजाज़त मिल जाती है उसके लिए कुछ रूल्स है जैसे कि एप्लिकेशन लिखनी पड़ती है और प्रोवेस्ट और वार्डन से इजाज़त लेनी पड़ती है। रही बात रोज़ आउटिंग की या बाहर जाने की तो मेरा मानना है कि हॉस्टल की सभी लडकियां इसके हक़ में नही है अभी जो रूल्स है वह उससे खुश है। हाँ एक बात जरूर कहूंगी की जो लड़कियां हॉस्टल में रह रही हैं उसके माता, पिता या गार्जियंस अगर रोज़ बाहर जाने की इजाज़त की हिमायत करते है तो हम इसको भी अमल में लाने की पूरी कोशिश करेंगे और अगर उनके माता पिता मना करते है तो हम इस मामले में कुछ नही कर सकते क्यों अब्दुल्लाह में बहुत दूर दूर से लड़कियों को पढ़ने के लिए उनके माता पिता भेजते है और वो हमारे ज़िम्मेदारी है उनकी रक्षा हमारी ज़िम्मेदारी है उनके साथ बाजार में राह चलते कोई हादसा न हो यह भी हमारी ज़िम्मेदारी है और उनको सही शिक्षा का माहौल मिले वो जिस काम ( पढ़ाई ) के लिए आई है उसमें कोई कमी ना रह जाए यह भी हमेरी ज़िम्मेदारी है जैसा कि सर सैय्यद साहब चाहते थे कि यहां से पढ़ कर कोई निकले तो उसके एक हाथ मे क़ुरआन और दूसरे हाथ मे साइंस हो और अच्छी शिक्षा मिले यही मैं भी चाहती है और यह हम सब की ज़िम्मेदारी है।

सवाल : लाईब्रेरी को लेकर पिछले साल बहुत बवाल मचा था काफी धरने हुए थे कि मौलाना आजाद लाईब्रेरी में अब्दुल्लाह की लड़कियों को जाने की इजाज़त नही है इस तरह के सवाल उठे थे क्या अब यह समस्या पूरी तरह से सुलझा ली गई है या अभी भी लड़कियों को मौलाना आज़ाद लाईब्रेरी आने की इजाज़त नही है और आप उस पूरी घटना को किस तरह देखती है ?

ज़ैनब : जहां तक मौलाना आज़ाद लाईब्रेरी में लड़कियों को जाने की इजाज़त का मामला है तो उनको वहां जाने की इजाज़त है लाईब्रेरी सबके लिए होती है और सबको वहां जाने की इजाज़त है। मगर मेरा मानना है कि अबदुल्लाह गर्ल्स कॉलेज में जो लाइब्रेरी है उसको दुरुदस्त करने की ज़रूरत है। लाईब्रेरी में किताबों को तादाद बढ़ाई जाए इस पर हम ज़ोर देंगे। लाईब्रेरी उसके बन्द होने के वक़्त की मियाद को बढाने की ज़रूरत है। मेरे ख्याल से उस लाईब्रेरी को 11 बजे रात तक खुलना चाहिए। ताकि लड़कियां लाईब्रेरी का सही इस्तेमाल कर सके। और जहां तक मौलाना आजाद लाईब्रेरी में जाने की इजाज़त का मामला है उस मसले को सियासत के लिए और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को बदनाम करने के लिए बढ़ा चढ़ा कर लोगो के सामने पेश किया गया। अभी अबदुल्लाह गर्ल्स कॉलेज की लाइब्रेरी को दुरुस्त करना ज़्यादा ज़रूरी है।

सवाल : जिन्ना की तस्वीर विवाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पिछले कुछ दिनों बहुत छाया रहा और अभी मौलाना आजाद लाइब्रेरी में गांधी जी के साथ जिन्ना की फ़ोटो दुबारा लगा दी गई, इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है?

ज़ैनब : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर आज़ादी के बाद नही लगाई गई वह यूनियन हाल में आज़ादी के पहले से लगी हुई है और जहां तक मुझको जानकारी है हिंदुस्तान में जिन्ना की तस्वीर और भी जगहों पर लगी हुई है। जिनको सियासत करनी होती है वह इस मामले को बड़ा बनाने की कोशिश कर रहे थे। जिन्ना की तस्वीर एक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रिवायत या कह लिए ट्रेडिशन की वजह से लगी हुई है क्यों कि जिनको भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ की सदस्यता दी गई उन सबकी तस्वीर यूनियन हॉल में लगी हुई है गांधी जी की भी तस्वीर लगी हुई है।

सवाल : आप गर्ल्स यूनियन का चुनाव लड़ रही है 2019 भी करीब है तो क्या आगे भी मुख्य धारा की राजनीति में  जाने का इरादा रखती है आप??

ज़ैनब : चुनाव में इस लिए नही लड़ रही हूं कि मुझको सियासत करनी है या मेरा मक़सद सियासत करना है मैं अब्दुल्लाह की अपनी बहनों की आवाज़ उठाने के लिए, उनकी आवाज़ बनने के लिए चुनाव लड़ रही हूं, अबदुल्लाह गर्ल्स कॉलेज की लड़कियों के वेलफेयर और उनके हक़ के लिए चुनाव लड़ रही है जहां तक मुख्य राजनीति में जाने की बात है यह सब बाद कि बात है अभी तो मैं अब्दुल्लाह गर्ल्स कॉलेज की लड़कियों के हक़ की आवाज़ के लिए चुनाव लड़ रही हूं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *