रात बापू मेरे सपने में आये और बोले ;’काश मै उस दिन ही मर गया होता

इंजीनियर वक़ार अली , बापू के ज़ख़्मी भारत का एक नागरिक

Ashraf Ali Bastavi

रात  बापू मेरे सपने में आये मै उन्हें इस चकाचौंध भरी विकास की ओर अग्रसर दुनिया में अपने सामने देखकर स्तब्ध हो गया और अपने प्यारे बापू से पूछ बैठा की बापू आप को तो गोडसे ने गोली मार दी थी तो आप यहाँ मेरे सामने कैसे तो बापू ने मुझसे जो बात कही उसे मै शायद ही कभी भुला पाउँ।

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बापू के कहा कि जब गोडसे ने मुझे गोली मारी तब मैं मरा नही अमर हो गया था।

काश मै उस दिन ही मर  गया होता तो ठीक था। पूरी दुनिया इस देश को बापू का देश समझती है। तुम लोगों ने मुझे राष्ट्रपिता तो बना दिया पर तुम लोग कभी मेरे बेटे न बन सके।

बापू की इस नाराज़गी पर मैंने एक भारतीय होने का सबूत देते हुए कहा बापू दिक्कत कहाँ नही होती हमारे देश में भी है पर हम लगातार विकास कर रहे है और हम आपके सपने को साकार करने के लिए लगातार दिन रात मेहनत कर रहे हैं और एक दिन हम अपने देश को विकसित देश के रूप में ज़रूर देखेंगे।

मेरे इस उत्तर से बापू जो कि बड़ी मुश्किल से क्रोधित होते हैं अति क्रोधित होकर बोले मुझे पता है तुम लोगों ने कितना विकास किया है। और फिर बापू रो पड़े , बोले कि जब सारा देश आज़ादी की खुशियां मना रहा था तब मै देश के एक कोने में पड़ा आमरण अनशन कर रहा था क्यूंकि साम्प्रदायिकता इस देश में अपने कदम ज़माने की कोशिश कर रही थी जो कि मेरे जीते जी संभव नही था।

मगर मेरे जाने के बाद ये तुम लोगों ने देश का क्या हाल कर दिया। यहाँ हर गली मोहल्ले में साम्प्रदायिकता अपने पंजे जमाये हुए पंडित और मुल्ले अपनी दुकान चला रहे हैं और तुम लोग आपस में ही एक दुसरे को मार रहे हो।

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पिछले कई सालों में मेरी इस पवित्र धरती पर सैकड़ों सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं। और किसी की माँ किसी की बहन किसी की बेटी की इज़्ज़त से खिलवाड़ होता है, कभी इसको मारा जाता है कभी उसको मारा जाता है।

तुम लोग ये याद रखो कि तुम लोग दंगों में लोगों को नही मुझे मारते हो। मै हर पल मर रहा हूँ। अब तुम ही बताओ क्या तुम तरक्की कर रहे हो। फिर बापू ने कहा कि अगर तुम लोग मुझे ज़रा भी अपना मानते हो और थोड़ी भी शर्म बाक़ी है तो अहिंसा दिवस मनाना बंद करो और हर एक सेकंड को अहिंसा दिवस बना दो।

मै इस देश में ऊँची इमारतें नही देखना चाहता। मै इस देश में खुश रहते लोग देखना चाहता हूँ। बापू की ये बात सुनते ही मेरी आत्मा को तगड़ी चोट लगी।

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इससे पहले की मै कुछ कहता मेरी नींद खुल गयी मगर अब मुझे नींद नही आती। बापू के ये शब्द मुझे सोने नही देते। इसीलिए मै कसम खता हूँ कि मै अपनी जान लगा दूंगा मगर बापू के इस देश में साम्प्रदायिकता नही फैलने दूंगा।

नोट : यह लेख बियॉन्ड हेड लाइन्स में पहली बार 2 Oct 2014 को प्रकाशित हुआ था

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