जामिया नगर के भूख व प्यास से बेताब दो बच्चे

Ashraf Ali Bastavi

नई दिल्ली (एशिया टाइम्स / अशरफ अली बस्तवी) इस तस्वीर को जरा गौर से देखो यह तस्वीर नई दिल्ली के जामिया नगर के अबुल फ़ज़ल एन्क्लेव, ई ब्लॉक में स्थित दो मेज वाले एक छोटे से होटल की है।

एक पंद्रह वर्षीय किशोर होटल की मेज पर एक ओर अध्ययन में डूबा ज्ञान की प्यास बुझाने में लगा हुआ है दूसरी ओर भूख से बेताब एक युवक अपने पेट की आग बुझाने में मसरूफ है। मेज पर दो भूखे प्यासे इकट्ठे बैठे हुए हैं, लेकिन दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है।

होटल पर कोई बोर्ड नहीं है, लेकिन इस होटल को इस क्षेत्र में ‘नईम होटल’ के नाम से जाना जाता है। आसपास के प्राइवेट छात्रावासों में रहने वाले युवा सुबह सुबह कबाब का नाश्ता करने आते हैं ।

पहले, इस होटल में चूड़ियों के झंकार में तैयार रोटी ने ध्यान केंद्रित किया था, रोटी पकाने का काम नईम की पत्नी घर से किया करती थी .
मुहम्मद नईम बिहार के समस्तीपुर जिले से हैं, आँखों में उज्ज्वल भविष्य का सपना सजाए सन 2000 में दिल्ली आ गए थे लगभग पांच साल तक विभिन्न होटलों पर नौकरी करने के बाद होटल मालिकों के शोषण और व्यवहार से तंग आकर 11 साल पहले अपना होटल शुरू किया उनके इस काम में उनकी पत्नी तबस्सुम परवीन सहित उनका पूरा परिवार मिलकर काम करता है। तीनों बेटे मोहम्मद इकबाल, मुहम्मद अफजाल और मोहम्मद फैजान स्कूल से वापसी पर पूरा समय माता पिता का साथ देते हैं और वेटर की ज़िम्मेदारी अंजाम देते हैं।

सुबह सात बजे से रात साढ़े ग्यारह बजे तक लगभग 17 घंटे की ड्यूटी के बाद होटल में ही रात का खाना खा कर गरीबी से दो-दो हाथ करने में दिन रात व्यस्त यह परिवार पास ही में किराए के कमरे में कुछ घंटे आराम के लिए चल देता है।

एशिया टाइम्स से अपने जीवन में पेश आने वाली समस्याओं का ज़िक्र करते हुए नईम कहते हैं कि पिछले पंद्रह साल से हम लगातार अपने हालत से जूझ रहे हैं. सबसे ज़्यादा समस्या का सामना आज से तीन साल पहले तब हुआ जब हमारे होटल में मौजूद बर्तन सहित सभी चीजें चोर उठा ले गए थे, और उन दिनों तबस्सुम की रीढ़ की हड्डी में तकलीफ थी जिसका इलाज चल रहा था।

तबस्सुम के साथ यह हादसा उस समय पेश आ या था जब हम होटल के लिए खाना घर पर ही तैयार किया करते थे रात के अंधेरे में रोटी बनाते समय तबस्सुम छत से गिर गई और उसकी कमर में गंभीर चोट आ गई थी।

यह पूछने पर कि क्या किसी व्यक्ति या सामाजिक संगठन ने आपको कोई वित्तीय सहायता दी ?, बताते हैं कि तीन साल पहले एक सर ने हमें बुलाया था, वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात भी की थी लेकिन जब हम दूसरी बार मिले , तो उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं ली ।

होटल का येही मेज उनका रीडिंग टेबल है ज़रा सोचिये इन बच्चों की समस्याओं का अंदाज़ा लगायें होटल पर अध्ययन कितना दर्दनाक और मुश्किल होता होगा, जब कोई ग्राहक अचानक एक और छोटी रोटी का आदेश देता होगा !

इकबाल उच्च शिक्षा प्राप्त करके अपने माता-पिता का सहारा बनना चाहते हैं,

ऐसा माना जाता है कि जामिया नगर क्षेत्र पूरे देश में मुस्लिम सामाजिक संगठनों के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। विभिन्न संगठनों के अधिकारियों का नईम होटल से रोज़ आना जाना है । लेकिन शायद किसी की नईम के टेबल पर अभी तक नज़र नहीं पड़ी है।

हमारा हाल भी कानून के रखवाले भारतीय पुलिस की तरह है जो अपनी आँखों से के सामने होते हुए ” गैरकानूनी “काम को तब तक अनदेखा करती है जब तक कोई व्यक्ति या समूह पुलिस में लिखित शिकायत नहीं दर्ज कराता है ।

लेकिन नईम तो हज़रत उमर फारूक रजी. की तर्ज़े खबर गीरी की बात करने वालों की आबादी में रहते हैं। यहाँ की हर गली से हर हफ्ते यही सदा बुलंद होती है की हमें सीरत रसूल और सहबा की ज़िन्दगी से सबक लेकर आगे बढ़ना है। ज़रा गौर कीजिये क्या हम अपने दावे में कितने सचे हैं।

 


    Warning: Invalid argument supplied for foreach() in /home/asiatimes/public_html/urdukhabrein/wp-content/themes/colormag/content-single.php on line 85

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *