बाबरी मस्जिद विवाद: सभी पक्षकारों ने मध्यस्थता के लिए नाम सुझाए, सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पर फैसला सुरक्षित रखा

Awais Ahmad

अयोध्या मामले में मध्यस्थता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुरक्षित रख लिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस. ए. बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय पीठ ने आज मध्यस्थता को लेकर सुनवाई की।

आयोध्या मामले में मध्यस्थता के लिए मुस्लिम पक्षकारों भी सहमती जताते हुए सुप्रीम कोर्ट को एक नाम मध्यस्थता के लिए दिया हैै। अखिल भारतीय हिंदू महासभा मध्यस्थता के लिए तैयार हो गया। अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट को 3 नाम दिए। जिनमें पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, पूर्व चीफ जस्टिस जे एस खेहर, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक के नाम शामिल है। वहीं निर्मोही अखाड़े ने भी सुप्रीम कोर्ट को मध्यस्थता के लिए 3 नाम दिया गया। जिसमेें पूर्व जस्टिस कुरियन जोसेफ,  पूर्व जस्टिस एके पटनायक, पूर्व जस्टिस जीएस सिंघवी शामिल हैै।

जाने सुनवाई में दौरान क्या हुआ

हिंदू पक्षकारों में रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने मध्यस्थता से इनकार किया। निर्मोही अखाड़े ने कहा कि वह मध्यस्थता के लिए तैयार है। मुस्लिम पक्ष ने भी मध्यस्थता पर सहमति जताई।

मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने कहा मध्यस्थता के लिए तैयार है। मध्यस्थता के लिए सबकी सहमति जरूरी नहीं। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा ये विवाद दो समुदाय का है सबको इसके लिए राज़ी करना आसान काम नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान सबसे पहले एक हिन्दू पक्षकार की तरफ से कहा गया कि अयोध्या विवाद मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने से पहले पब्लिक नोटिस जारी किया जाना चाहिए। हिंदू पक्षकार की दलील दी कि अयोध्या मामला धार्मिक और आस्था से जुड़ा मामला है, यह केवल सम्पत्ति विवाद नहीं है।इसलिए मध्यस्थता का सवाल ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प को अपनाए बिना ही मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है लेकिन हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा जब वैवाहिक विवाद में कोर्ट मध्यस्थता के लिए कहता है तो किसी नतीजे की नहीं सोचता। बस विकल्प आज़माना चाहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ये नहीं सोच रहे कि किसी पक्ष को किसी चीज का त्याग करना पड़ेगा। हम जानते हैं कि ये आस्था का मसला है। हम इसके असर के बारे में जानते हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इतिहास भी जानते हैं। हम आपको बताना चाह रहे हैं कि बाबर ने जो किया उस पर हमारा कंट्रोल नहीं था। उसने जो किया उसे कोई बदल नहीं सकता।हमारी चिंता केवल विवाद को सुलझाने की है। इसे हम जरूर सुलझा सकते है। यह दिमाग, दिल और रिश्तों को सुधारने का प्रयास है। हम मामले की गंभीरता को लेकर सचेत हैं। हम जानते हैं कि इसका इम्पैक्ट क्या होगा। यह मत सोचो कि तुम्हारे हमसे ज्यादा भरोसा है कानून प्रक्रिया पर।

 

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में कहा कि कोर्ट ने इसे अपने फैसले में दर्ज किया था, वहां सुलह करने जैसा कुछ नहीं। स्वामी ने दलील दी कि नरसिंह राव सरकार कोर्ट में वचन दे चुकी है कि कभी भी वहां मंदिर का सबूत मिला तो वो जगह हिंदुओं को दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या एक्ट से वहां की सारी ज़मीन का राष्ट्रीयकरण हो चुका है।

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही हो तो उसमें क्या कुछ चल रहा है यह मीडिया में नहीं जाना चाहिए। हम मीडिया पर प्रतिबंध नहीं लगा रहे, परंतु मध्यस्थता का मकसद किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होना चाहिए। जस्टिस बोबड़े ने मध्यस्थता की विश्वसनीयता को बरकरार रखने पर जोर देते हुए कहा कि जब अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता चल रही हो तो इसके बारे में खबरे न लिखी जाएं और न ही दिखाई जाएं।

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