फेसबुक कमा कैसे रहा है?

इस सवाल का जवाब दे रहे है हस्सान मेहदी, एशिया टाइम्स की खास रिपोर्ट में

Hassan Mehdi

मुद्दे की बात: क्या आप जानते हैं कि दो बड़ी कंपनिया फेसबुक और गूगल कैसे हमारे देश कि सरकार के साथ साथ दुनिया भर कि सरकारों को इन्फ्लुएंस कर रही हैं ? उसकी जड़ें किस हद तक मज़बूत होती जा रही है कैसे उसका प्रभाव दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है आप और हम कितना क्यूँ न कहें कि हमें इस बात से फर्क नहीं पड़ता है लेकिन हम उनके प्रभाव से अछूते नहीं है और ये किस कद्र खतरनाक है इस बात का आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते|

फेसबुक फ्री है और हम सब इसे फ्री में यूज़ करते हैं तो सवाल ये है कि फेसबुक कमा कैसे रहा है ? आपको पता है फेसबुक के पास हमारा डेटा ,न कि सिर्फ नाम , पता , मोबाइल नंबर , लोकेशन और ईमेल ऐड्रेस के बल्कि उनके कितने फ्रेंड है ,उन फ्रेंड्स का क्या प्रोफाइल है फिर उसी हिसाब से हमारी प्रोफाइल तैय्यर करता है , मान लीजिये कपड़ों का कोई ग्रुप आपने ज्वाइन कर रखा है , अगर कोई कपड़े बनाने वाली कम्पनी फेसबुक पर एड करती है तो ये ऐड उसी बन्दे को दिखाएँ जायेंगे जिसने वह ग्रुप ज्वाइन कर रखा है क्यूँ कि उसके खरीदिने और साइट्स पर विज़िट करने के चांस ज्यादा रहते हैं इसी तरह कोई भी प्रोडक्ट , खाने पीने कि चीज़े और हम जिन जिन चीज़ों को फेसबुक पर ज्यादा श्येर करते हैं

फेसबुक को पता रहता है कि हमारी पसंद न पसंद क्या है हम किन चीज़ों पर ज्यादा समय व्यतीत करते हैं , इसी तरह एड करके फेसबुक कमाता है |

आप जान कर हैरान होंगे कि सिर्फ दो कम्पनियाँ गूगल और फेसबुक पिछले साल पूरी दुनिया में जितना भी  #Digital_Advertisement_expenditures किया गया है उसका 20 प्रतिशत इन दोनों कम्पनियों पर किया गया है ,#Googal और #facebook इतने बड़े हो चुके हैं कि आज के समय में ये दोनों कंपनिया ट्रिलियन डालर कि कंपनी बनने को तैयार हो रही हैं|

अब इसमें भारत के लिए क्या चिंता हैं , अभी हाल ही में #Bloomberg ने रिपोर्ट किया है कि भारत कि सरकार भी फेसबुक के थ्रू पोलिटिकल कैम्पेन कर रही है ,और ऐसी भी न्यूज़ आ रही है कि 2019 के इलेक्शन में देश कि बड़ी पार्टियाँ इसका भरपूर फायदा उठाएंगी जैसे कि पिछले लोकसभा इलेक्शन में किया गया था , फेसबुक के सबसे ज्यादा यूजर भारतीय हैं और उन सबका डेटा फेसबुक के पास है , फेसबुक इसमें हमारी #साइकोलॉजीकल#प्रोफाइल बना सकता है और उस हिसाब से हमें पोलिटिकल एड दिखा सकता है हमारी जो चोइस है कि किसको हम वोट डालें उसका इन्फ्लुएंस कर सकता है ,जैसे कि उस पर अमेरिकी इलेक्शन में ट्रम्प को सपोर्ट करने के लिए लग हैं साथ ही साथ डेटा चोरी का आरोप भी , इससे हमारा लोकतंत्र खतरे में है ,आप सोच रहे होंगे कि हम प्रभावित नहीं हो सकते न हुए है लेकिन ऐसा नहीं है

इससे पहले अमेरिका , और बिट्रेन के साथ साथ भातर के चुनाव में इसका प्रभाव देखने को मिल चूका है एक आम जनता इस बात को समझ ही नहीं पाती जब फेसबुक जैसी कम्पनियाँ उनका ब्रेन वाश कर चुकी होती है|

अब सवाल ये है कि भारत को इतना सब कुछ पता होने के बावजूद इस पर कोई सवाल क्यूँ नहीं उठा रहा है ? कोई भी लीडर , मंत्री , मुख्यमंत्री इसमें किसी ने आवाज़ क्यूँ नहीं उठाई इसका कारण ये है ये बड़ी बड़ी कंपनिया फेसबुक , गूगल , ट्विटर ये सब भारत के जितने भी राज्य हैं उनको प्रभावती करती है उनके साथ मिलकर ये बड़े बड़े #digital_Initiative चालती हैं , जैसे महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए फेसबुक ने अभी अभी उडीसा सरकार के साथ #she_means_business नाम का प्रोजेक्ट शुरू किया है , आंध्रप्रदेश कि सरकार का जो #Digital_Fiber_Project है उसे फेसबुक सपोर्ट करता है |

इसी तरह से सरकार के जो किरण रिजीजू मंत्री है उन्होंने हाल ही में कहा है कि आपदा प्रबंधन है उसमे भातर कि सरकार दुनिया में पहली ऐसी सरकार है जो फेसबुक के साथ मिलकर काम कर रही है इसी तरह से लगभग सभी राज्यों कि सरकारें इन कम्पनियों पर कही न कहीं निर्भर हैं या होती जा रही है|

कहने को तो गूगल बहूत से भारतीय रेलवे स्टेशन पर फ्री इंटरनेट सेवा दे रहा है लेकिन ये कुछ भी फ्री नहीं है ये बस एक तरीक़ा है कल को ये सरकार पर दबाव बना सकें और धीरे धीरे ये देश को #कामर्शियल गुलाम बना सकें जैसे कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने व्यापार का लालच दे कर देश पर काबिज़ हो गई थी ,ठीक आज उसी तरह कि गुलामी में हम जा रहे हैं , #paytm क फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने बड़ा बयान दिया था कि ये बड़ी बड़ी कम्पनियाँ दुसरे देश को गुलाम बनाने को तत्पर हैं .

इन दो बड़ी कम्पनियों के अलावा भी बहूत सी कम्पनियाँ है जो इसी रास्ते पर आगे बढ़ रही है चिंता का विषय ये कि ये अपनी सेवा देने के बजाय एक बड़े स्तर पर देश दुनिया कि राजनीत आयर अर्थव्यवस्था को न सिर्फ प्रभावित कर रही है बल्कि अपने अनुसार उनकी दिशा तय कर रही है ये हम सबके लिए बहूत बड़ा खतरा है क्यूँ कि लोकतान्त्रिक व्यवस्था में जनता तय करती है हमारा भविष्य , हमारी राजनीत , हमारा देश कैसा होगा न कि कोई बाहरी कम्पनी|

लेखक: हस्सान मेहदी 

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