26/07/2017


माँ का दूध प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है

डॉ. शबनम सय्यदा

आम तौर पर यह तो हम सभी जानते है कि माँ का दूध बच्चे के लिए अति आवश्यक है| पर इस बात को अत्यंत गहराई से जानने की ज़रूरत है कि स्तान्पान की शुरुआत कब की जाये, इसमें पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम बच्चे के लिए कितना ज़रूरी है, माँ के दूध की पोषाहारीय महत्त्व क्या है, माँ के दूध के अन्य लाभ क्या हैं और किस प्रकार माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है|

पोषाहारीय महत्त्व क्या है

शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर स्तान्पान की शीघ्र शुरुआत करना, स्तान्पान की सफलता और माँ के आरम्भिक दूध कोलेक्ट्रम प्रदान करने के लिए ज़रूरी है|  नवजात शिशु अपने जीवन के प्रथम एक घंटे के दौरान बहुत सक्रिय होता है| यदि उसे माँ का दूध पिलाने का प्रयास किया जाये तो वह स्तान्पान करना जल्द ही सीख जाता है| बच्चे द्वारा जल्द स्तान्पान  आरम्भ करने से माँ के शरीर में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और माँ के स्तन में दूध का प्रवाह होने लगता है| शिशु को उतनी बार और उतनी देर तक स्तान्पान कराया जाए जितना शिशु चाहे| शिशु के जीवन में इस्तान्पान का इतना बड़ा महत्त्व है कि वह जीवन भर माँ के दूध के लाभ से लाभान्वित होता रहता है|

अक्सर यह देखा जाता है कि हमारे समाज में औरतें, जीवन के प्रथम छः माह के दौरान ही दूध की अलावा अन्य पेय पदार्थ जैसे घुटटी, शहद और पानी आदि पिलाने लगती हैं, यह सही नहीं है| शिशु के जीवन के प्रथम छः माह के दौरान केवल माँ का दूध पिलाया जाए| माँ का दूध पिने वाले शिशु पूर्ण पोषण प्रदान करता है| माँ का दूध पिने वाले शिशुओं को किसी अन्य पदार्थ या पेय जल जैसे ग्लूकोज़, घुट्टी, फलों का रस, और पानी जैसे किसी पेय पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती है यहाँ तक की गर्मी के मौसम में भी शिशु को पानी की आवश्यकता की पूर्ति माँ के दूध से पूरी हो जाती है| छः माह तक केवल इस्तान्पान शिशुओं के स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम  शुरुआत है |

कोलेस्ट्रम को प्रतिरक्षक भी कहा जाता है

शिशु जन्म के उपरान्त माँ के दूध को कोलेस्ट्रम  कहा जाता है| थ दूध गाढ़े पीले रंग का होता है और आरम्भ के कुछ दिनों तक ही आता है| इस गाढ़े पीले दूध को लेकर हमारे समाज में बहुत सी महिलाओं में अंधविश्वास है| बहुत सी औरते इसे शरीर की गन्दगी समझ कर निकाल कर फेक दी हैं| जबकि यह दूध अत्यधिक पोषक होता है और इसमें संक्रमण रोधी तत्व मोजूद होता है| कोलेस्ट्रम दूध में अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन होता है और कभी कभी यह प्रोटीन 10 प्रतिशत तक होता है जब कि बाद में आने वाले दूध में यह मात्रा कम होती है| माँ के दूध में पाये जाने वाले संक्रमण रोधी तत्व बच्चे  को अनेक रोगों से बचाते हैं| कोलेस्ट्रम को प्रतिरक्षक भी कहा जाता है|  

माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम प्रकिर्तिक आहार है

माँ का दूध सुपाच्य और परिपाच्य होता है इसे शिशु आसानी से पचा और आत्मसात कर सकत है| माँ के दूध में मौजूदा प्रोटीन, कैल्शियम और वसा को शिशु आसानी से पचा लेता है| इसमें मौजूदा दूध शकर्रा शिशु को तुरंत उर्जा प्रदान करते हैं| इसके अलावा एक दूसरा लाभ यह है कि दुग्धशकर्रा का एक भाग आंतों में जा कर दुघाम्ल बना कर वहा मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को समाप्त क्र देता है| माँ के दूध में पाये जाने वाले विटामिन ए, सी और थायेमीन की मात्रा माँ द्वारा लिये जाने वाले आहार पर निर्भर करती है|  अतः माँ को पोष्टिक भोजन लेना ज़रूरी है| स्तन्पान  शिशुओं के स्वस्थ्य विकास के लिए सम्पूर्ण आहार प्रदान करते है| यह महिलाओं के स्वस्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण एवम प्रजनन प्रक्रिया का एक हिस्सा भी है|  माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम प्रकिर्तिक आहार है और इसे खरीदने की आवश्यकतानहीं होती है | माँ का दूध स्वच्छ और आसानी से 24 घंटे उपलब्ध होता है| इसकी प्राप्ति के लिए विशेष रूप से किसी भी तरह की तैयारी नहीं करनी पड़ती है| माँ का दूध शिशु को अनेक बीमरियों से बचाने के साथ साथ बुद्धिमान भी बनता है| माँ के दूध में मौजूद फैटी एसिड बोद्धिक स्तर में वृध्दि करता है| स्तनपान करने वाले बच्चे का बौद्धिक स्तर, स्तनपान न करने वाले बच्चे की तुलना में 8  अंक अधिक होता है| स्तनपान द्वारा दो बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने में सहायता मिलती है और गर्भावस्था के दौरान माँ का बढ़ा हुआ वज़न कम करने में भी सहायक होता है| माँ का दूध शिशु की आंत में पाचक रस तैयार करने में भी मदद करता है जिससे बच्चे की पचान शक्ति बढ़ती है|

माँ का दूध प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है

ओपरेशन द्वारा शिशु जन्म होने के 4-6 घंटे के अंदर स्तनपान आरम्भ किया जा सकता है| इसके लिए माँ को सहारा देने की ज़रूरत होती है| नवजात शिशुओं को उसकी माताओं के करीब रखा जाना चाहिए ताकि शिशु को माँ का दूध मिल सके| शिशु जन्म के प्रथम छः माह तक केवल स्तनपान, छः माह की आयु के बाद दो वर्ष तक स्तनपान के साथ साथ पूरक आहार का आरम्भ करना चाहिए| माँ का दूध पप्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है|





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