25/09/2017


ज़ेवर में मुस्लिम महिलाओं के साथ दरिंदगी और प्रशासन की चुप्पी....

आबिद अनवर

 

मुस्लिम महिलाओं पर इन दिनों मीडिया को बहुत प्यार आ रहा है। वह मुस्लिम महिलाओं के शोषण पर घड़ियाली आंसू बहा रहा है। तीन तलाक के मामले में सप्ताह में तीन दिन, चर्चा, स्टोरी और विशेष कार्यक्रम ज़रूर चला रही है। इसके बहाने मीडिया का उद्देश्य केवल इस्लाम पर हमला करना है और दुनिया को यह दिखाने की कोशिश करनी है कि इस्लाम महिलाओं को अधिकार नहीं देता, तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं का बड़े पैमाने पर शोषण किया जाता है, मुसलमानों में तलाक की दर बहुत अधिक है तथा सारी मुस्लिम महिलायें दरबदर की ठोकरें खा रहीं हैं,मुस्लिम समाज मुस्लिम महिलाओं को किसी भी तरह के अधिकार देने के लिए तैयार नहीं है .मुस्लिम महिलाओं के साथ दौरा जाहिलियत जैसा व्यवहार किया जाता है। मुसलमान पाषाण युग में रह रहे हैं। जबकि मामला इसके विपरीत है। सभी वर्गों धर्मों में मुस्लिम महिलाओं की तलाक की दर बहुत कम है। इस्लाम ने मुस्लिम महिलाओं को जो अधिकार दिए हैं वह सभी धर्मों और समाज के लिए उदाहरण है। इसी उदाहरण पर चलकर सभी समाज ने महिलाओं को अधिकार दिए हैं। मुस्लिम महिलाओं को चाहिए कि वह मीडिया के झांसे में न आएं,वह इस तरह का माहौल पैदा करके मुस्लिम महिलाओं को भड़िये के बाड़े में धकेलना चाहते हैं। अगर मीडिया और अदालत को मुस्लिम महिलाओं से सहानुभूति होती तो वह मुस्लिम महिलाओं के साथ किए जाने वाले अत्याचारों और दंगों के दौरान किए गए बलात्कार के खिलाफ आवाज उठाती, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करती। पिछले साल अगस्त में हरियाणा में दो मुस्लिम लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था, दो को मार डाला गया था, कुछ को बेरहमी से मारा गया था। दोनों मुस्लिम बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार उनके मामा और मामी के सामने की गई थी और यह समझकर छोड़ दिया गया था कि दोनों लड़कियां मौत के मुंह में चली गई हैं। लेकिन मीडिया बिल्कुल चुप रहा था। बात बात पर केंडल मार्च करने वाले मुख्य इकाई से गायब थे, इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन करने वाले भी कहीं दिखायी नहीं दिये थे, मुस्लिम महिलाओं पर नाम निहाद अत्याचार का रोना रोने वाले संगठन अचेतन अवस्था में थीं। निर्भया और मुंबई बलात्कार मामले में ज़मीन-आसमान एक करने वाला मीडिया किसी कोने में दुबक कर बैठ गया था और भाजपा, आरएसएस के तलवे चाट रहा था। चीख चीख कर बोलने वाली एंकर ने भी चुप्पी की मोटी चादर ओढ़ रखी थी। पिछले जुलाई के अंत में बुलंदशहर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुये बलात्कार के मामले को जोरदार तरीके से चलाया गया था, इस घटना में भी उस बार की तरह वाहन को रोक लिया गया और वारदात को अंजाम दिया गया। वाहन में कुल आठ लोग सवार थे, जिनमें से चार महिलायें और चार पुरुषों थे। जब कि उस मामले में एसएसपी, एसपी, द्रमुक सहित सभी बड़े अधिकारी और पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया था। पीड़ितों को मुआवजा दिया गया.पुलिस ने दोषियों को भी गिरफ्तार कर लिया था। इसके बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था और यूपी सरकार को नोटिस जारी करके कहा था कि वह पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसमें आजम खां को भी नोटिस जारी किया गया था और इस मामले पर टिप्पणी करने पर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया था। इस मामले में अदालत से लेकर लोकतंत्र के चारों स्तंभों की नींद हराम हो गई थी। एसा महसूस कराया गया था कि भारत में इससे बड़ा अपराध अब तक हुआ ही नहीं है। 25 दिन में न्याय न मिलने पर पीड़ितों ने आत्महत्या की धमकी दी थी। इस मामले को संसद में उठाया गया था। सांसद बिन पानी की मछली की तरह तड़प रहे थे। कैंडल मार्च वालें ने इंडिया गेट सहित जगह जगह धरने और प्रदर्शन किए थे। हर अत्याचार के खिलाफ आवाज़ा उठाना चाहिए, चाहे वह किसी के भी साथ हो, लिकन ज़ेवर, बुलंदशहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले गंभीर घटना में सब शांत हैं। केंडल मार्च करने वाली महिलायें भी न जाने कहां सोई पड़ी हैं। मुस्लिम महिलाओं का रोना रोने वाली मुस्लिम महिला मंच भी कान में तेल डालकर सो रही है। महिलाओं और महिलाओं से संबंधित संगठन उस समय भी सो रही थी जब हरियाणा में इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया था, ना तो अदालत, न प्रशासन, न विधायिका न मीडिया, न एनजीओ न ही महिला आयोग ने कोई कार्रवाई की। क्या भारत का कानून मुसलमानों के लिए अलग है? पीड़ित अगर मुसलमान हैं तो अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसका सबूत पूर्ब में घटित हो चुकी घटनायें हैं, हरियाणा में कार्रवाई के नाम पर अभी तक कुछ खास नहीं किया गया हे, न मुआवजा, न पुलिस निलंबन और न ही किसी निम्न से लेकर उच्च अधिकारी के खिलाफ़ कोई कार्रवाई की गई,मुसलमान इस व्यवहार को क्या समझें? क्या सरकार ने अघोषित तौर पर मुसलमानों पर अत्याचार करने की अनुमति दे दी है। क्या भारत में मुसलमानों का खून बहाने उनके मान-सम्मान व जान-माल को हानि पहुंचाने की स्वीकृति दे दी गई है?

जिला गौतमबुद्ध नगर के ज़ेवर में जिस भयानक अपरीध को अंजाम दिया गया उसका सबसे चिंताजनक विषय यह है कि अधिकारियों की मंशा ही नहीं है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई हो, जिसका सबूत यह है कि प्रभावित महिलायें कह रही हैं कि हमारे साथ सामूहिक बलात्कार किया गया, लेकिन योगी सरकार की प्रयोगशाला में यह साबित नहीं हो पा रहा है। एसएसपी लव कुमार ने बताया कि ज़ेवर क्षेत्र के सुबूत गांव के पास कल रात आधा दर्जन सशस्त्र बदमाशों ने इको कार में जा रहे एक परिवार के साथ वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने कार के टायर में गोली मार कर उसे रोका। प्रभावित परिवार के मुखिया की बहन की डिलीवरी होने वाली थी। उसकी बहन बुलंदशहर के एक अस्पताल में भर्ती थी, जिसे देखने के लिए वह अपने परिवार के साथ बुलंदशहर जा रहा था। जब वह रामनीर के पास पहुंचा, तभी बदमाशों ने कार को निशाना बनाया। विरोध करने पर बदमाशों ने परिवार के मुखिया को तीन गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बदमाश पीड़ित परिवार से आभूषण और करीब 45 हजार रुपए लूट कर फरार हो गए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज़ेवर के पास एक व्यक्ति की हत्या और चार महिलाओं के साथ हुए कथित गैंगरेप मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई दूसरी तरफ इस मामले में एक पीड़ित महिला ने बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य को कथित घटना की जानकारी दी। उसने कहा, '' हमारी कार पंक्चर हो गई थी ... स्टेपनी लगाने के लिए हम कार से उतरे। वहाँ छह लोग इकट्ठे होकर आ गए,हमें मारते और छेड़ते जंगलों में ले गए,हमारी तलाशी ली। हमारे सारे पैसे, गहने सब ले लए.हमें मार लगाकर हमारे आदमियों को बांधकर हमारे साथ बदतमीजी (बलात्कार) किया। वहाँ मेरा बच्चा भी था। वह उसे गोली मारने जा रहे थे। मेरे हाथ में हजार रुपये रह गए थे, पांच सौ रुपये के दो नोट मैंने बच्चे की जेब में रख दिए थे, उसकी जेब से हजार रुपये निकाल कर वह उसे गोली मारने जा रहे थे तो मैंने कहा मुझे मार दो। उन्होंने हमारा मुंह बंद कर दिया था और हाथ पैर बांध दिए थे,पुलिस वहाँ तीन चार घंटे के बाद पहुंची, तब उन्होंने हमें बचाया। लोगों ने बताया कि जब पुलिस आई थी बदमाश वहीं थे और पुलिस के आने के बाद ही भागे थे लेकिन पुलिस ने उनका पीछा नहीं किया आसानी से बदमाशों को जाने दिया। इस समय तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। यूपी सरकार का रवैया देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें पीड़ितों को न्याय दिलाने में कोई रुचि नहीं है। इसके विपरीत यूपी के एक मंत्री सुरेश खन्ना ने निहायत ही बेशर्मी दिखाते हुए कहा कि इतना बड़ा प्रांत है यूपी, अपराध मुक्त बनाना असंभव है। उन्होंने कहा इतना बड़ा प्रांत है यूपी हमने कभी शून्य अपराध की बात नहीं की थी। लेकिन कोई भी दोषी हो उसे सजा मिलेगी। मंत्री का यह बयान चार महिलाओं के गैंगरेप के बाद आया है। इसी तरह पिछले महीने मुजफ्फरनगर में एक मुस्लिम लड़की को राशन वालों ने राशन देने के नाम पर बुलाया और छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया, तीन दिन के बाद मामला दर्ज हो पासा लेकिन कार्यवाही शून्य रही।
भाजपा शासन वाले राज्यों में मुसलमानों का जीना दूभर कीया जा रहा है, पिछले दिनों की घटनायें इसका सबूत हैं। झारखंड में मुस्लिम युवकों को गाय के नाम पर, कभी लव जिहाद के नाम पर तो कभी सोशल मीडिया पर कुछ लिखने के नाम पर तो कभी बच्चा चोरी के नाम पर हत्या की जा रही है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में जिस तरह मुस्लिम महिलाओं का अपमान, मुसलमानों को मारा और हमला किया जा रहा है वह भाजपा की मुसलमानों के प्रति घृणा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। पिछले साल में राष्ट्रीय राजधानी से लगभग 60 किलोमीटर दूर दरिंदगी की एक ऐसी ही सामने  आई थी, जिसे सुनकर हर किसी का दिल दहल जाएगा। गुड़गांव से सटे हरियाणा के सबसे पिछड़े जिले मेवात के ताउडू क्षेत्र के गांव डिंगरहीड़िय में बुधवार को 24,25 अगस्त की रात दरिंदों ने क्रूरता और मानवता की सारी हदें पार कर दी थीं। हैवानों ने सबको बंधक बनाया, फिर मामू और मामी के सामने भांजियों का सामूहिक बलात्कार किया और फिर बदमाशों ने भांजियों के सामने मामा और मामी का निर्मम तरीके से हत्या कर दी। डिंगरहीड़िय गांव में दो हत्या, एक नाबालिग और एक शादीशुदा लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना ने मेवात में लोगों को दहला कर रख दिया है। बदमाशों ने घर में रखे गहने और नकदी की लूटी और फिर लोहे की रॉड तथा धारदार हथियारों से  सात लोगों को घायल कर दिया था। इस बर्बर घटना को रात में लगभग एक बजे अंजाम दिया गया, जब सभी लोग गहरी नींद में थे। बलात्कार का शिकार हुई दोनों लड़कियों ने बताया कि रात करीब एक बजे बदमाश आए, पहले उनके माता पिता और मामा और मामी के हाथ पीछे की ओर बांध दिए, इसके बाद उन्होंने लाठी मारकर उन्हें जगाया, फिर उनके माता पिता और मामा और मामी के सामने चार बदमाशों ने रेप किया और उसके बाद उनके सामने ही उनके मामा मामी की  हत्या कर दी। जहूर अल दीन ने बताया कि बदमाशों ने उसके बेटे इब्राहीम और उसकी पत्नी रशीदा की हत्या कर दी। इसके अलावा सात अन्य लोगों को घायल कर दिया और आरोपियों ने इसी दौरान घर में रखे सोने चांदी के आभूषण औत नकदी लूटकर भागन गए। मेवात में मुस्लिम लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार करने वाले आरोपी आरएसएस से जुड़े हैं। 24 अगस्त को गिरफ्तार किए गए आरोपी गौ रक्षक संगठम  संबंध रखते हैं।अपराधी राहुल वर्मा की फेसबुक आईडी से पता चलता है कि वह आरएसएस का कार्यकर्ता है और आरएसएस के शिविर में लगातार मौजूद रहता आया है। वहीं राव अमरजीत के फेसबुक पेर से पता चलता है कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत रखने वाला व्यक्ति है और साथ ही उसने अपने को मोदी भक्त भी बताया है।
बुलंदशहर में होने वाली घटना को जिस तरह उत्तर प्रदेश सरकार, देश का मीडिया और अन्य मीडिया ने गंभीरता से लिया था उस तरह वे ज़ेवर की त्रासदी को नहीं ले रहे हैं। कारण स्पष्ट है कि पीड़ित मुसलमान हैं और भाजपा शासन वाले राज्य में मुसलमानों को इंसाफ दिलाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल नहीं है। इसलिए पुलिस अब तक कुछ भी नहीं कर पाई है और न ही यहां के एसएसपी, द्रमुक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है। यहां की पुलिस भी, अगर प्रभावित मुसलमान है तो उनका रवैया टालमटोल का रहता है,वह दिल और जान से अपराधियों को बचाने में लग जाते हैं। यह बात हवा में नहीं कही जा रही हैं बल्कि मुसलमानों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के दोषियों को सजा न मिलना यह साबित करता है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसी में पक्षपातपूर्ण अधिकारियों की भरमार है जिस कारण मुसलमानों को न्याय नहीं मिल पाता.हरियाणा सहित देश के विभिन्न भागों में मुसलमानों के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहीर किया जा रहा है, मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाकर उनका बलात्कार किया जा रहा है, लेकिन सजा के मामले में मामला हमेशा शून्य रहा है। यह बलात्कार का मामला कब थमेगा,मुस्लिम संगठ भी अकेले, अकेले जाती हैं और अपनी अपनी डफली बजाती हैं। एकजुट होकर मुस्लिम संगठनों ने अब तक कोई सन्तोष जनक कदम नहीं उठाया है। क्या इसी तरह भारत में मुस्लिम महिलाओं का सम्मान लुटता रहेंगा। मुसलमान बच्चियां न्याय पाने के लिए दरबदर की ठोकरें खाती रहेंगी,क्या हम कोरमा, बिरयानी खाकर सेमिनार में गरजते बरसते रहेंगे? यह संदेश कब देंगे कि जो सम्मान दामिनी, निर्भया और मरखल पीड़ितों की है वहीं हरियाणा, ज़ेवर, मेरठ, मुजफ्फर नगर की मुस्लिम बच्चियों की भी है। बुलंद शहर की घटना में जिस तरह तेजी से कार्रवाई हुई उसी तरह हरियाणा और ज़ेवर अपराध पीड़ित मुस्लिम महिलाओं के साथ दरिंदगी करने वालों के खिलाफ क्यों नहीं किया गया। इससे यह साबित होता है अदालत, मानवाधिकार आयोग, प्रशासन और सरकार के सभी मुसलमानों के खिलाफ द्वेष रखते हैं और उनके दोषियों को सजा देना नहीं चाहते अगर ऐसा नहीं होता तो इलाहाबाद हाईकोर्ट भी बुलंदशहर मामले की तरह से ही कार्रवाई करती। मानव अधिकार आयोग स्वतः संज्ञान लेकर सरकार से सवाल पूछती।  

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