26/09/2017


लोकतंत्र की हत्या कब तक

अवैस अहमद उस्मानी

लोकतंत्र की हत्या कब तक 

कहते हैं सियासत में कोई किसी का नहीं होता यह बात आज कल सच होती दिख रही है| देश की सियासत का रंग भी रोज़ बदल रहा है और जिस तेज़ी से रंग बदल रहा है वह देखने लायक है| सभी राज्य जहाँ पर बीजेपी सत्ता में नहीं है या है भी तो  मानो वहां पर विपक्ष के विधायकों की बीजेपी में शामिल होने की होड़ लगी हुई है कि पहले बीजेपी में कौन जायेगा| गुजरात से मणिपुर तक यही नज़ारा देखने को मिल रहा है|

बिहार में जो हुआ उसको सभी ने देखा कि कैसे 15 घंटे के भीतर बिहार की सत्ता पलट गई| बिहार की सत्ता पर अभी भी नितीश कुमार ही काबिज़ है लेकिन उनका सेनापति अब राजद के बजाये सहयोगी पार्टी बीजेपी का है| बिहार के उपमुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले बीजेपी के नेता सुशिल मोदी ने अब उनकी जगह ले ली| इसी के साथ बीजेपी ने विपक्ष का किला भी फतह कर लिया है| नितीश कुमार ने अपना इस्तीफा देते वक़्त कहा था कि अपनी अंतरआत्मा की आवाज़ सुनते हुए बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है| और महागठबंधन को तोड़ दिया और इसी के साथ मिटटी में मिलने और बीजेपी से हाथ न मिलाने वाली बात को भी जुमला साबित कर दिया| जैसे बिहार में उनकी सहयोगी पार्टी बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने 15 लाख वाले बयान को एक सियासी जुमला बता दिया था|

ख़ैर बिहार में नई सरकार बन चुकी है और गुजरात में जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है वह पर भी अब सियासी भूचाल आने लगा है| फ़िलहाल गुजरात में अभी राज्यसभा चुनाव होने है और कांग्रेस सोनिया गाँधी के करीबी अहमद पटेल को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है| वहीँ आये दिन कांग्रेस विधायक बीजेपी का दामन थाम रहे है| जिससे गुजरात में कांग्रेस की यह हालत हो गई है कि उसको अपने 44 विधायकों को बचाने के लिए उनको अहमदाबाद से बेंगलूरू भेजना पड़ गया| बीते तीन दिनों में गुजरात कांग्रेस के सात विधायक पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई विधायक अभी पार्टी छोड़ने की कतार में हैं। वहीँ सौराष्ट्र के जामनगर (ग्रामीण) निर्वाचन क्षेत्र के एक विधायक राघवजी पटेल ने कहा, “मैं भाजपा में जाना चाहता हूं और पांच अन्य भी हैं जो इसकी तैयारी कर रहे हैं।”

कांग्रेस पार्टी विधायकों में मचे भगदड़ के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला  करते हुए कहा कि बीजेपी गुजरात में विधायकों की खरीद फरोख्त कर रही है। पार्टी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि “गुजरात में भारतीय जनता पार्टी विधायकों की खरीद फरोख्त में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।“ अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘गुजरात कांग्रेस के विधायक पुनाभाई गामित ने बताया कि बीजेपी द्वारा उन्हें 10 करोड़ रुपये ऑफर किये गये थे।“

कांग्रेस छोड़ने वालों में सबसे पहले गुजरात काग्रेस के पूर्वमुख्मंत्री शंकर सिंह वाघेला है| जिनका कांग्रेस छोड़ना बीजेपी के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है| इसके एलावा बलवंत सिंह राजपूत, डॉक्टर तेजश्री पटेल, पीआई पटेल, छनाभाई चौधरी, मान सिंह चौहान और रामसी परमार का नाम शामिल है। अमित शाह पिछले दिनों गुजरात दौरे पर थे और उन्होंने ने वह से राज्यसभा के लिए परचा भी भरा है| जहा से उनका राज्यसभा जाना तय आना जा रह है|

बीते 10 दिनों में मणिपुर कांग्रेस के दो विधायक बीजेपी में शामिल हुए जिससे अब वहां पर कांग्रेस विधयाकों की संख्या 28 से घाट कर 20 हो चुकी है| इसी तरह गुजरात में भी सात विधायक बिजेपी में शामिल हुए जिससे वहां पर कांग्रेस के अब 50 विधायक रह गए है और अहमद पटेल का राज्यसभा पहुचना मुश्किल होता नज़र आ रहा है| हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव में ऐसा हो चुका है। कांग्रेस के 57 विधायक होने के बावजूद मीरा कुमार के समर्थन में सिर्फ 49 वोट पड़े थे।

वहीँ दूसरी तरफ गुजरात के बाद अब उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। इधर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष अमित शाह लखनऊ दौरे पर पहुंचे,उधर समाजवादी पार्टी के दो और बीएसपी के एक एमएलसी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। विपक्ष भले ही इन घटनाओं को लोकतंत्र की हत्या बता रही हो या खरीद फरोख्त की बात कह कर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही हो| लेकिन इन सब बातों के बाद भी बीजेपी में शामिल होने वालों की कमी नहीं है| 2019 के चुनाव को देखते हुए विपक्ष के लिए यह हालात बेहद गंभीर हैं| जहाँ विपक्ष को मज़बूत होना चाहिए वही विपक्ष ताश के पत्ते की तरह बिखरता हुआ नज़र आने लगा है और बिहार की घटना इसका जीता जागता उदाहरण है|     





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