26/09/2017


जब महिलाओं के अधिकारों को दबाया जाता है

मोहम्मद सोहेल रहमान

 

पिछले महीने 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया गया।लेकिन एक महीने बीत जाने के बाद कही भी महिला सशक्तिकरण की बात नहीं की जा रही हैं।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पूरे विश्व में महिलाओं के सम्मान की बात होती है।लेकिन जैसे ही महिला दिवस ख़त्म होती है।

महिलाओं की बात गायब हो जाती है।महिलाओं के सम्मान की बात करने से पहले उसे अमल करने की जरुरत है।क्योंकि जब महिलाओं के अधिकारों को दबाया जाता है।तो एक व्यक्तित्व का विकास रुक जाता है।हम सभी अपने समाज में महिलाओं को एकमाँ,बहन,बेटी,पत्नी,बहु,सहेली के रूप में स्वीकार कर सकते हैं।लेकिन महिलाओं को एक शिक्षक,अभियंता,डॉक्टर,बैंकर,उद्यमी,प्रोफेसर,सांसद.विधायक,मुखिया,सरपंच,प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति,मुख्यमंत्री,के रूप में उतना सम्मान नहीं देते है।जितनी की वो हक़दार होतीं हैं।महिला आरक्षण की वजह से हम महिलाओं को अपना प्रतिनिधित्व तो चुन लेते हैं लेकिन उसका पूर्ण अधिकार उसे प्राप्त नहीं होता हैं।उसके पतियों के द्वारा उसका प्रतिनिधित्व किया जाता है।अक्सर ऐसा देखा जा सकता है कि मुखिया सरपंच महिला होतीं हैं।

लकिन उसके सारे अधिकार उसके पतियों के पास होता है।महिलाओं को सभी क्षेत्रों में आजादी देने की जरूरत है।अगर महिला एक माँ,बहन, पत्नी,बहु,बेटी के रूप में एक परिवार को सवाँर सकती है तो एक देश को क्यों नहीं।इसलिए महिला सशक्तिकरण की शुरुआत हम सभी को अपने घरों से करनी चाहिए।

वर्तमान परिदृश्य की बात की जाये तो 21 वीं सदीं की इस डिजिटल दौर में महिलाओं को कुछ अधिकार दिए गए हैं।जिसका परिणाम यह है कि आज महिला हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहीं हैं।आज विश्व के बड़ी से बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व महिलाओं के द्वारा सफल तरीके से किया जा रहा है।देश के सबसे बड़ी बैंक भारतीय स्टेट बैंक की प्रमुख एक महिला है जिनका नाम अरुंधति भट्टाचार्य हैं।

आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंद्रा कोचर,तथा पेप्सी कंपनी की सीईओ इंद्रा नोई हैं।जो एक महिला के रूप में अपनी कंपनियों को नयी बुलंदियों को छू रही है।जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर हेमलता महेश्वर जी हैं।इसके अलावा जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कई प्रोफेसर महिला भी है।

इन सब के आधार पर यह कहा जा सकता है कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए उन्हें शिक्षित करना बेहद जरुरी है।प्रधानमंत्री उज्वला योजना,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,प्रधानमंत्री सुकन्या योजना,स्वच्छ भारत अभियान जैसे योजनाओं के। माध्यम से केंद्र सरकार भी महिलाओं को सम्मान देने का कार्य कर रही है।

महिलाओं को सशक्त करने के लिए हमे अपनी सोच बदलने की जरुरत है।इसकी शुरुआत हम सभी को अपने घरों की माँ ,बहन,बेटी, पत्नी ,बहु को सम्मान देकर कर सकते हैं।हमारी माँ,बहन,बेटी,पत्नी,बहु, जिस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती है ।हमें भी एक पिता,भाई,पति,के रूप में उसका पूरा सहयोग करना चाहिए।

 
 लेखक,  जामिया मिल्लिया इस्लामिया  में अध्यनरत्न   प्रशिक्षु पत्रकार है 





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