25/09/2017


आज केसमाचार पत्रों से

आज के समाचार पत्रों ने विविध विषयों पर अपने सम्पादकीय लेख लिखे हैं। इसके अतिरिक्त समाचार पत्रों की सुर्खियां भी ध्यान आकर्षित करती हैं।

जी-20 शिखर सम्‍मेलन के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग की बैठक की संभावना समाप्त होने पर राष्‍ट्रीय सहारा की सुर्खी है- भारत ने कहा, तय नहीं, चीन बोला हालात नहीं। दैनिक जागरण की टिप्‍पणी है- माहौल के बहाने चीन का नया पैंतरा। राजस्‍थान पत्रिका ने पवन कुमार चामलिंग के बयान पर टिप्‍पणी की है- सिक्किम के मुख्‍यमंत्री के बागी बोल। गोरखालैंड मुद्दे पर पश्चिम बंगाल में बंद के मद्देनजर हिन्‍दुस्‍तान लिखता है- चामलिंग की धमकी के केन्‍द्र बना सकता है ममता पर दबाव।

किसानों की आत्‍महत्‍या के मामले पर उच्‍चतम न्‍यायालय की टिप्‍पणी पर दैनिक जागरण की सुर्खी है- किसानों की योजनाएं जमीन पर उतारी जाएं। सरकार को योजनाओं का असर देखने के लिए छह माह की मोह‍लत। राजस्‍थान पत्रिका का शीर्षक है- राज्‍यों को अपनी फसल बीमा कम्‍पनी बनाने की अनुमति। राजस्‍थान और पंजाब से होगी शुरूआत।

भारतीय रिजर्व बैंक के नये आदेश पर अमर उजाला लिखता है- ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी की तीन दिन में करें शिकायत, दस दिन में खाते में आ जाएगी रकम। लेनदेन का एसएमएस अनिवार्य रूप से ग्राहकों को भेजने का निर्देश।

गुरूग्राम में पीजी मालिक की दरिंदगी पर हिन्‍दुस्‍तान लिखता है- पानी मांगने पर पांचवीं मंजिल से विद्यार्थी को फेंका, छात्र की मौत। बाउंसर बुलाकर छात्रों की पिटाई की।

अंग्रेजी दैनिक टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने सुप्रीमकोर्ट के हवाले से लिखा है- प्रधान न्‍यायाधीश और राज्‍यपाल सूचना अधिकार के दायरे में होने चाहिएं।

दैनिक जागरण की खबर है- उत्तर प्रदेश में 50 वर्ष की उम्र पार करने वाले दागी और ढीले अफसरों की होगी छुट्टी। केन्द्र ने पहले ही किया है ऐसे कर्मियों को रिटायर।

 

खतरे की मिसाइल’ शीर्षक से प्रकाशित अपने संपादकीय में नवभारत टाइम्स लिखता है कि उत्तर कोरिया के आक्रामक रवैये ने दुनिया में अशांति की आशंका पैदा कर दी है। उसकी वजह से ताकतवर मुल्कों में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अमेरिका ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो वह उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य ताकत का इस्तेमाल करेगा। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में कहा कि उत्तर कोरिया के ताजा मिसाइल परीक्षण से उसकी सैन्य ताकत में तेज बढ़ोतरी हुई है, और रूस तथा चीन को आगाह किया कि अगर उन्होंने उत्तर कोरिया का साथ देना बंद नहीं किया तो अमेरिका को मजबूरी में अपनी अलग राह पकड़नी होगी। निकी हेली ने नॉर्थ कोरिया के खिलाफ व्यापार प्रतिबंधों के इस्तेमाल की भी धमकी दी। गौरतलब है कि नॉर्थ कोरिया ने पिछले दिनों अपनी अब तक की सबसे ताकतवर बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है, जो जापान की समुद्री सीमा में जाकर गिरी। इस साल अब तक उत्तर कोरिया 11 मिसाइल परीक्षण कर चुका है। नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अमेरिका को बर्बाद करने की चेतावनी दी है। इस ताजा मिसाइल परीक्षण से ठीक पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ चर्चा की थी पर कोई नतीजा नहीं निकला। सचाई यह है कि नॉर्थ कोरिया के मुद्दे पर अमेरिका और चीन आमने-सामने आ गए हैं। चीन का कहना है कि प्योंगयांग के साथ बातचीत के जरिये समस्या का समाधान निकाला जाए, जबकि अमेरिका चाहता है कि चीन उत्तर कोरिया पर दबाव बनाकर उसे अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए तैयार करे। चीन इसके लिए तैयार नहीं है। उसने रूस के साथ मिलकर यह प्रस्ताव भी रखा था कि अगर अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपना संयुक्त सैन्य अभ्यास रद्द कर देते हैं, तो इसके बदले में उत्तर कोरिया को उसकी सैन्य योजनाओं को रोकने के लिए बाध्य किया जा सकता है। अमेरिका न सिर्फ ऐसी किसी संभावना के खिलाफ है, बल्कि इस प्रस्ताव को ही वह दबाव डालने की रणनीति की तरह ले रहा है। नॉर्थ कोरिया के गैर जिम्मेदाराना रवैये से दुनिया के एक बड़े क्षेत्र के लिए संकट पैदा हो गया है। ऐसे मौकों पर संयुक्त राष्ट्र की बड़ी भूमिका हो सकती थी, लेकिन दिक्कत यह है कि बड़े मसलों में कोई इस मंच को पूछता भी नहीं। आज नॉर्थ कोरिया के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में लाने वाला अमेरिका खुद कई मौकों पर इसकी उपेक्षा कर चुका है। अभी की स्थिति में सारे देशों को अपने निजी हितों से ऊपर उठकर इस पर विचार करना चाहिए। उम्मीद करें कि आज से जर्मनी में शुरू हो रहे जी-20 सम्मेलन में दुनिया के बड़े नेता इस संकट का कोई हल ढूंढने की शुरुआत कर देंगे।





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