27/02/2017

add add स्कूली बस्ते के बोझ से बेहाल देश के नौनिहाल

नयी दिल्ली, 26 फरवरी :भाषा: देश के छोटे बड़े शहरों में भारी-भरकम स्कूल बैग, टिफिन बॉक्स तथा पानी की बोतल लेकर झुकी कमर और तिरछी चाल चलते मासूम स्कूल आते जाते दिख जाएंगे । इन मासूमों से स्कूली बस्ते सहजता से उठते भी नहीं, लेकिन वे स्कूल बैग ढोने के लिए मजबूर हैं। सरकार ने हालांकि कहा है कि वह बच्चों पर बस्ते का बोझ कम करने के लिए मानदंड तैयार करने जा रही है। सीबीएसई बस्ते का बोझ कम करने के लिए निर्देश जारी करती है लेकिन इनका



कोट और पेंट पहनने की वजह से संपादक और एंकर को ज्ञानी मानना छोड़

यह अभागी लाइब्रेरी उदास है चलिए आपको आज एक बिल्डिंग में ले चलता हूं। अगर आप दिल्ली में हैं, तो बेर सराय यानी ओल्ड JNU कैंपस से दक्षिण दिशा में वसंत कुंज की तरफ जाएंगे, तो यह अरुणा आसिफ अली मार्ग है। इस पर लगभग डेढ़ किलोमीटर चलने पर दाईं ओर एक बिल्डिंग नजर आएगी। यह इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन यानी IIMC है।

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दिल्ली से प्रकाशित अंग्रेजी अख़बार 'मिल्ली गज़ट'' ने अपने

नई दिल्ली: (एशिया टाइम्स / अशरफ अली बस्तवी ) वर्ष 2016 के दिसंबर के अंतिम दिनों

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