चिकन गुनिया और नोट गुनिया में एक समानता है वह यह कि दोनों धर्म, जाति, क्षेत्र, नस्ल और धन के आधार पर लोगों में भेदभाव नहीं करते

लोग चिकन गनिया को भूल भी नहीं पाए थे कि नोट गुनिया में फंस गए चिकन गुनिया तो देश के हर शहर में चाँद हजार को ही हुआ था। नोट गुनिया तो एक ऐसी महामारी है जिससे देश का कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है सिवाय उन लोगों के जो नोट बंदी से पहले अपने पुराने नोट बदल लिए थे। बाकी पूरा देश परेशान है। बताते हैं कि नोट गुनिया का एकमात्र इलाज यह है कि या तो एकांत में रूई या लाइन में खड़े होइए चाहे वह लाइन बैंक की हो या एटीएम की जहां भी आप खड़े



खेत बैंक

केवल इंफ्रास्ट्रक्चर

इस्लाम की नज़र में जाति बिरादरी का अर्थ

इमामुद्दीन अलीग

देश का एक बुद्धिजीवी वर्ग अक्सर यह दावा करता नज़र आता है कि देश के मुसलमानों में भी (इस्लाम में नहीं) जाति पात और खानदान बिरादरी की प्रथा उसी प्रकार प्रचलित है जिस प्रकार हिंदू समाज में है। यानी भारत में जाति पात की समस्या से कोई भी धर्म अछूत नहीं रह गया है। जबकि यह पूरा सच नहीं है! यह सच है कि कल्चरल इंटरेक्शन के कारण देश के मुसलमानों पर जाति पात का प्रभाव पड़ा है लेकिन उसे हिन्दू समाज

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