अयोध्या से एशिया टाइम्स के संवादाता  मेहदी हसन एैनी की ग्राउंड रिपोर्ट

Asia Times Desk

अयोध्या: (एशिया टाइम्स / मेहदी हसन एैनी )  आज 23 नवम्बर रात के ग्यारह बजे मैं अयोध्या पहुंच चुका हूं, शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया है, राम भक्तों के स्वागत और शुभकामनाओं के बैनर के साथ साथ “राम की मन्दिर हम बनाएंगे, यहीं बनाएंगे” जैसे नारे हर ओर चिपके नज़र आ रहे हैं।चारों ओर हज़ारों की संख्या में पुलिस और विशेष फोर्स तैनात है, रेलवे स्टेशन पर हजारों की भीड़ है उनमें कुछ कार्तिक पूजा से वापस जा रहे कुछ घर बार छोड़ कर जा रहे हैं तो सैंकड़ो लोग 25 नवम्बर के प्रोग्राम के लिए आ रहे हैं। खास बात यह है कि शहर छोड़ कर जाने वालों में कुछ हिन्दू भी हैं जो हालात सामान्य होने तक अपने रिश्तेदारों के यहाँ जा रहे हैं, सख़्त चेकिंग की जा रही है, कहीं समाजसेवी तो कहीं पत्रकार बनना पड़ रहा है।

वो देखने पर मज़बूत नज़र आ रहे हैं लेकिन अंदर से सहमे हुए हैं

शायद शहर में ज़्यादा अंदर तक एंट्री न हो सके सिक्योरिटी फ़ोर्स और ख़ुफ़िया दस्ते एलर्ट हैं जवाब देना मुश्किल हो गया है।कोशिश यह है कि मुस्लिम बाहुल्य इलाक़ो तक पहुंच सकूँ अभी तक जिन मुस्लिम भाइयों से मुलाक़ात हुयी है वो देखने पर मज़बूत नज़र आ रहे हैं लेकिन अंदर से सहमे हुए हैं। अलबत्ता मीडिया ने हद से ज़्यादा प्रोपगेंडा किया हुआ है एक बात यह नोट करने की है कि हिंदुओं के चेहरे और बॉडी लैंग्वेएज से प्रतीत हो रहा है कि जैसे इन्होंने अयोध्या को जीत लिया हो और राम मंदिर बना लिया हो।

शिवसैनिकों से भरी स्पेशल ट्रेन मुंबई से अयोध्या रेलवे स्टेशन पहुँची है

कहीं कहीं जत्थे के जत्थे नारे भी लगा रहे हैं। आज तक और ज़ी न्यूज़ के रिपोर्टर हर तरफ माइक ले कर घूम रहे हैं। मैं धीरे धीरे आगे बढ़ रहा हूँ
पहली ट्रेन का आगमनसाढ़े ग्यारह बजे के आसपास शिवसैनिकों से भरी स्पेशल ट्रेन मुंबई से अयोध्या रेलवे स्टेशन पहुँची है, हज़ारों शिव सैनिक हाथों में डंडे और बैनर लिए हुए हैं, स्टेशन से ही आसमान तक गूंजने वाले नारे लगाते हुए बाहर निकले, उनके आने के बाद से माहौल और संवेदनशील हो गया है, सेक्युरिटी अधिकारी हाथों में टार्च और मेटल डिटेक्टर लिए हुए यहां वहाँ दौड़ रहे हैं, पूरा माहौल भगवा हो गया है, अभी पान की दुकान पर एक पुजारी मिले मुझे यहाँ देख कर बड़े हैरान हुए कहने लगे आप यहाँ कैसे? शोर मचाते कि मैं ने कहा बाबा मैं यहीं का हूँ। कहने लगे मियां मैंने आपको यहाँ कभी नहीं देखा, यहाँ से निकल लो यह शिवसेना वाले कहीं तुम को कोई नुक़सान न पहुँचा दें।

सरकारी प्रबन्ध का जायज़ा

विवादित स्थान तक पहुंचने के कई रास्ते हैं जिन्हें सरकार ने सील कर दिया है, केवल एक रास्ता दशरथ महल के सामने से हनुमान गढ़ी होते हुए राम लला के दर्शन का है जिसपर चारों ओर ड्रोन कैमरे लगाए गए हैं, CRPF, RF, UP Police, P.A.C. के अधिकारी हर एक आदमी की चेकिंग कर रहे हैं एक पहचान पत्र जारी किया गया है जिस के पास वो होगा उसी को उस रास्ते से जाने दिया जाएगा और बार बार इसका ऐलान किया जा रहा है, यहां पर मुझे एक पत्रकार मिल गए जो यहाँ दो दिन से हालात कवर कर रहे हैं उन्होंने बताया कि अब तक 20 हज़ार से अधिक सेक्युरिटी अधिकारी आ चुके हैं जिनमें सीआरपीएफ़ और पीएसी की 12 कम्पनियां हैं,

ए डी जी  टेक्निकल अशुतोष पांडेय और झांसी रेंज के डीआईजी सुभाष सिंह बघैल को ख़ास तौर पर तैनात किया गया है और अयोध्या को दो ज़ोन में बाँट दिया गया है एक रेड ज़ोन जिसमें विश्व हिंदू परिषद के प्रोग्राम होने हैं दूसरा ब्लू ज़ोन जिसमें शिव सेना के प्रोग्राम होने हैं।
इन दोनों अधिकारियों पर विवादित स्थानों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है, राम लला के दर्शन के लिए 100 मीटर पहले बैरिकेडिंग किया गया है,वहीं से दर्शन किया जा सकता है, पूरे शहर व चारों ओर धारा 144 लागू है। हमें दशरथ महल की ओर जाने वाले रास्ते से काफ़ी पहले रोक दिया गया है, सख़्त चेकिंग के बाद मोबाइल ज़ब्त करने को कोशिश की गयी है, जब पत्रकार प्रमाण पत्र और दो चार हवाले देने से इस शर्त पर वापस किया गया है कि हम तत्काल यहां से वापस चले जायेंगे

हमारे अंदेशे और मौके के हालात

अयोध्या में मुस्लिम आबादी तीन जगहों पर रहती है, इसमें से सबसे ज़्यादा संवेदनशील स्थान बाबरी मस्जिद से बिल्कुल सटे मुसलमानों का क्षेत्र है, अयोध्या में लगभग आठ हज़ार मुसलमान रहते हैं, मेरी मुलाकात असलम पान वाले से हुयी उनसे तफसील जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि चार हज़ार से ज़्यादा मुस्लिम फैज़ाबाद, बाराबंकी और लखनऊ वगैरह अपने रिश्तेदारो या जानने वालों के यहां जा चुके हैं। बहुत सारे अमन पसन्द हिंदू भी अयोध्या से जा चुके हैं जो हिन्दू मुसलमान हैं तो वो गल्ला राशन व सामान इकट्ठा करके अपने घरों में दुबक गए हैं

असलम ने बताया कि अभी तक तो सब ठीक चल रहा है पर कल उद्धव ठाकरे के आने के बाद क्या होगा ख़ुदा ही जानता है। असलम ने मुझे बाबरी मस्जिद दंगों में अपना घर खोने वाले सैफुल क़ादरी के बेटे फ़ैजुल से मिलने का मश्वरा दिया, लेकिन मेरे आसपास ख़ुफ़िया दस्ते के लोग लगातार मंडला रहे थे इसलिए मैंने किसी को परेशानी में डालना उचित नहीं समझा। मैंने सोचा कि लगे हाथों दो चार और लोगों से मुलाकात करता चलूं एक चाय की दुकान पर पहुंचा। उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वो कुछ बोलने से कतराता रहा। 2 चाय ऑर्डर किए और उससे दुकानदारी का पूछा तो कहने लगा जनाब आपको यहां नहीं आना चाहिए था बहुत ग़लत किया आपने हम तो इस तरह के हालात झेलने के आदी हैं।

मैंने कहा कि मैं तो यूँ ही आप लोगों का हालात जानने के मक़सद से आ गया था अभी जा रहा हूँ मेरे इतना कहते ही उसने अंदर का गुबार निकालना शुरू कियाबेतरतीब अंदाज़ में उसने बहुत कुछ बताया अंत में उसने अपना नाम हबीब बताया उसके दो भाई शफ़ीक़ और कलीम अपने रिश्तेदारों के यहाँ जा चुके हैंहबीब भी कल शाम तक शायद यहाँ चला जाये या रहेगा। अभी सोच में हैं। चार बज चुके हैं शोर है कि मुंबई से दूसरी ट्रेन भी पहुंचने वाली है।

वर्तमान हालात पर मेरा नज़रिया 

शिवसेना चूंकि भीड़ जमा करके सरकार और सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाना चाहती है ताकि राम मन्दिर के लिए दिसम्बर संसदीय सेशन में सरकार अध्याधेश य लाये या सुप्रीम कोर्ट जल्द फ़ैसला करेतो दूसरी ओर बीजेपी की कोशिश यह है कि राम मंदिर मुद्दा पूरे ज़ोर शोर से उछले और चुनाव तक गर्म रहे लेकिन सेहरा शिवसेना के सिर पर न बंधे, बल्कि बीजेपी ही उसका दूल्हा बने इसलिए वो विश्न हिंदू परिषद को सपोर्ट कर रही है उसके प्रोग्राम के लिए इजाज़त भी दी गयी है।
अफ़वाहों का बाज़ार गर्म किया जा रहा है, पचास हज़ार की भीड़ को पांच लाख बताया जा रहा है, सेक्युरिटी दस्ते अभी तक पूरी तरह से एलर्ट नज़र आ रहे हैं पर अगले चार दिनों में हालात क्या होंगे अभी इस पर नज़रिया क़ायम करना मुश्किल है।

हम क्या करें

ऐसे में जमीयत उलमा ए हिन्द, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमात इस्लामी हिन्द समेत सभी इंसाफ़ पसंद संगठनों को चाहिए कि एक ज्वाईंट डेलीगेशन ले कर सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस, गृह मंत्री भारत सरकार और राष्ट्रपति से मुलाकात करें और उनपर इसका दबाव बनाए कि हंगामी हालात में फैज़ाबाद डिवीज़न में हाई अलर्ट जारी करके हर निवासी की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्वयं होम मिनिस्टर सुनिश्चित करें और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तत्काल ऑर्डर जारी करे.य!
आम नागरिकों को मीडिया के अफ़वाहों से बचते हुए ख़ुसूसी दुआ का एहतेमाम करना होगा और अपने अपने इलाक़ो में हालात पर पैनी नज़र रखनी होगी। लॉ एंड ऑर्डर की बहाली के लिये एक ज़िम्मेदार शहरी और एक कामिल मोमिन का फ़रीज़ा अंजाम देना होगा।

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